आपने पतंग उड़ाई होगी या गौर से किसी को उड़ाते हुए देखा होगा तो आपको पता होगा कि पहले ढील देकर फिर अचानक डोर को खटाखट खींचकर कैसे सामनेवाले की पतंग काट दी जाती है। शेयर बाज़ार में नतीजों के दौरान उस्ताद लोग ऐसा ही करते हैं। इसलिए कम रिस्क उठाकर ट्रेडिंग करनेवालों नतीजों के दिन उस स्टॉक से दूर रहना चाहिए। उस्तादों की लड़ाई में कूदने की बहादुरी का कोई मतलब नहीं। अब शुक्रवार की ट्रेडिंग…औरऔर भी

ट्रेडिंग में नौसिखिया लोगों को हाथ नहीं डालना चाहिए। यह उन लोगों के लिए है जो बाज़ार की चाल-ढाल और टेक्निकल एनालिसिस को अच्छी तरह समझते हैं। उनके दिमाग में साफ होना चाहिए कि बाज़ार में कौन-कौन सी शक्तियां हैं जिनकी हरकत भावों को उठा-गिरा सकती है। बाज़ार में संतुलन का पूरा नक्शा उनके दिमाग में साफ होना चाहिए। चार्ट में लोगों की भावनाओं को पढ़ सकने की कला उन्हें आनी चाहिए। अब देखें गुरु की चाल…औरऔर भी

चूंकि हमारे शेयर बाज़ार में विदेशी निवेशक संस्थाएं (एफआईआई) बड़ी दबंग स्थिति में हैं। इसलिए बाज़ार का उठना गिरना इससे भी तय होता है कि डॉलर के मुकाबले रुपए का क्या हाल है। कल डॉलर का भाव 62.30 रुपए पर लगभग जस का तस रहा तो निफ्टी भी ज्यादा नहीं गिरा। हालांकि लगातार पांचवें दिन बाज़ार का गिरना पिछले तीन साल की सबसे बुरी शुरुआत है। पर सुबह दस बजे बाज़ार को बहुत तेज़ झटका लगा कैसे?…औरऔर भी

दिसंबर तिमाही के नतीज़ों के आने का सिलसिला शुरू हो गया। लिस्टेड कंपनियों ने चालू वित्तीय साल की तीसरी तिमाही में कैसा कामकाज किया, इसका ध्यान रखना ज़रूरी है क्योंकि शेयरों के भाव भले ही छोटी अवधि में डिमांड-सप्लाई के संतुलन से प्रभावित होते हैं, लेकिन हैं वे कंपनी के कामकाज या कैश फ्लो की ही छाया। मूल काया ही चौपट होगी तो छाया को मिटना ही है। इसलिए नतीज़ों पर नज़र रखते हुए बढ़ते हैं आगे…औरऔर भी

ट्रेडिंग में अगर हर दिन नोट बनने लगें तो इससे अच्छा क्या हो सकता है? हर कोई यही चाहता है। लेकिन नोटों के पीछे भागने से कभी आप खुश नहीं सकते क्योंकि सारी दुनिया का धन कभी आपके पास नहीं आ सकता। कामयाब/प्रोफेशनल ट्रेडर धन के पीछे नहीं भागता। वह अक्सर ट्रेडिंग पर बकबक भी नहीं करता। वो बड़े धीरज से कमाता है ताकि जीवन में कुछ दूसरी महत्वपूर्ण चीजें कर सके। अब नए सप्ताह का आगाज़…औरऔर भी