गिरता स्टॉक थोड़ा उठ जाए तो क्या! बढ़ता स्टॉक थोड़ा गिर जाए तो क्या!! नियम कहता है कि साल-छह महीने से बढ़ते शेयर को शॉर्ट न करें और साल-छह महीने से गिरते शेयर में लांग पोजिशन न पकड़ें। ऐसा नहीं कि गिरते शेयर थोड़े दिन बढ़ नहीं सकते या बढ़ते शेयर कुछ दिन गिर नहीं सकते। लेकिन अपट्रेंडिंग स्टॉक्स में लांग और डाउनट्रेंडिंग स्टॉक्स में शॉर्ट करना ट्रेडिंग में रिस्क को घटाने की रणनीति है। अब आगे…औरऔर भी

ट्रेडिंग के न जाने कितने इंडीकेटर, कितनी विधियां। टेक्निकल एनालिसिस से लेकर फिबोनाकी और इलियट वेव तक। यहां से 62% ऊपर, वहां से 38% नीचे। सीखने जाओ तो माथा घूम जाए। सभी अपने तरीके को सर्वश्रेष्ठ बताते हैं। लेकिन वे अंदर से क्या मानते हैं इसका पता चलेगा इससे कि वे यह सब करते हुए कमाते कितना हैं जिसे वे छिपा जाते हैं। सिस्टम वही ठीक जो कराए कमाई, बाकी बकवास। अब रुख गुरु के बाज़ार का…औरऔर भी

खबर यकीकन शेयर बाज़ार और संबंधित शेयरों के लिए अहमियत रखती है। लेकिन बनने से लेकर हमारे पास पहुंचने तक वो गुल खिला चुकी होती है। उस पर खेलनेवालों की तेज़ी को हम मात नहीं दे सकते है। इसलिए खबर हमारे जैसे आम निवेशकों का ट्रेडिंग टूल कतई नहीं बन सकती। जिस दिन बड़ी खबर हो, उस दिन बाज़ार से दूर रहना बेहतर। बासी खाना और बासी खबर हमारे लिए त्याज्य है। देखें अब बुध का बाज़ार…औरऔर भी

आज दुनिया कितनी ग्लोबल हो गई है, इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है कि अमेरिका में ऋण सीमा पर लटकी तलवार से उससे ज्यादा परेशानी चीन और जापान को हो रही है। इन देशों के मंत्रीगण अमेरिका को पटाने में लगे हैं कि किसी भी सूरत में ऐसी नौबत न आने दी जाए क्योंकि ऐसा हो गया तो उन्होंने अमेरिका को जो भारी भरकम कर्ज दे रखा है, उसे वापस पाना मुश्किल हो जाएगा। सोचिए, ऐसा तब हो रहाऔरऔर भी

हम बाज़ार या किसी स्टॉक के बारे में दो-चार सूचनाओं के आधार पर मन ही मन धारणा बना बैठते हैं और उसे बाज़ार पर आरोपित करते हैं। ठाने रहते हैं कि बाज़ार आज नहीं तो कल ज़रूर हमारे हिसाब से चलेगा। चार्ट पर भी हम अपनी पुष्टि के लिए मनमाफिक आकृतियां देख लेते हैं। लेकिन जब तक इस मूर्खता/आत्ममोह से निकलकर हम मुक्त मन से बाज़ार को नहीं देखते, तब तक पिटते रहेंगे। अब दशा-दिशा आज की…औरऔर भी

बड़े-बूढ़े कहते हैं कि दो-चार आदमी गलत हो सकते है, लेकिन हज़ारों-लाखों लोग गलत नहीं हो सकते। पर शेयर बाज़ार में लगता है कि इसका उल्टा है। यहां 95% ट्रेडर बड़ी मशक्कत के बावजूद घाटा खाते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि वे कुछ न कुछ गलती कर रहे हैं। सफल ट्रेडिंग का आधार ऐसा सूत्र है जिसमें दुरूहता नहीं, सरलता हो, जिससे आसानी से नोट बनाए जा सकें। हम उलझाते नहीं, सुलझाते हैं। अब देखें आज का बाज़ार…औरऔर भी