सोचो! शेयर नहीं, धंधा कहां जाएगा
सालों-साल से ट्रकों के पीछे लिखा रहता है देखो मगर प्यार से। लेकिन शेयर बाज़ार ऐसी चीज़ है जिसे देश के 92% लोग हिकारत से देखते हैं। बाकी लोग प्यार नहीं, लालच की नज़र से देखते हैं। सोचते और पूछते हैं कि बाज़ार कल या छह महीने बाद कहां तक जाएगा। असल सवाल उन्हें पूछना चाहिए कि जिस कंपनी का शेयर खरीद रहे हैं, उसका धंधा कहां जाएगा। ऐसा सोचना आवश्यक है। अब आज का लंबा निवेश…औरऔर भी
एंट्री अहम, पर मार्जिन भी महत्वपूर्ण
मित्रों! मेरा मकसद न तो आपको टिप्स देना है और न ही आपसे कमाई करना। मेरा पहला मकसद है उन सूचनाओं की खाईं को भरना जो अंग्रेज़ी जाननेवालों को आसानी से मिल जाती हैं, जबकि हिंदी जगत अंधेरे में टटोलता रहता है। यही हाल मराठी और अन्य भारतीय भाषाएं बोलने वालों का है। दूसरा मकसद है अंग्रेज़ी जाननवाले भी जिन जटिलताओं से घबराते हैं, उन्हें सुलझा देना। अब ट्रेडिंग की ऐसी ही कुछ उलझनों को सुलझाने केऔरऔर भी
असर दिखाएंगी क्या दो अच्छी खबरें!
आज दो अच्छी खबरें हैं जो कल बाज़ार बंद होने के बाद सामने आईं। एक तो यह कि लगातार दो महीने तक सिकुड़ने के बाद देश का औद्योगिक उत्पादन जुलाई महीने में 2.6% बढ़ा है। दूसरी खबर यह कि अगस्त में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित मुद्रास्फीति की दर घटकर 9.52% पर आ गई है, जबकि जुलाई में यह 9.64% थी। चलिए, देखते हैं कि आज शेयर बाज़ार पर इन खबरों का क्या असर होता है…औरऔर भी
खबर उल्टी, मगर शेयर भागते सीधे!
शेयर के भाव और खबरों का क्या रिश्ता है, इसे टाटा पावर के उदाहरण से समझा जा सकता है। मंगलवार को स्टैंडर्ड एंड पुअर्स ने इसे डाउनग्रेड कर दिया। कहा कि अगले बारह महीनों में ऋणों की देनदारी के चलते इसका कैश-फ्लो कमज़ोर रहेगा। लेकिन कल, बुधवार को इसका शेयर 4.07% बढ़ गया। सच यह है कि छोटी अवधि में खबरों के आगे-पीछे बहुतेरी शक्तियां काम करती हैं जिन्हें हम देख नहीं पाते। अब हाल बाज़ार का…औरऔर भी
जानो जमकर और कमाओ ट्रेडिंग से
ट्रेडिंग का वास्ता इससे नहीं कि आप कितने सही/सटीक हैं, बल्कि इससे है कि आपने नोट बनाए कि नहीं। फर्क इससे नहीं पड़ता कि आप कितना सारा जानते हैं, बल्कि इससे पड़ता है कि आप जो भी जानते हैं, उसे कितना जानते हैं। इंटरनेट का अथाह समुद्र एक क्लिक पर सूचनाओं के झाग उगलने लगता है। पर इसमें कितना है काम का? सौ से ज्यादा कैंडल। काम की केवल सात-आठ! इसलिए जितना जानो, गहरा जानो। अब आगे…औरऔर भी





