बजट में एक ऐसी घोषणा है जिसे करने के लिए सरकार के खजाने से कुछ नहीं जाता। इसके लिए वित्त मंत्री को बस अपनी छटांक भर की जुबान चलानी पड़ती है। यह है कृषि ऋण के लक्ष्य में बढ़ोतरी। पूरी उम्मीद है कि वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी अगले हफ्ते शुक्रवार, 16 मार्च को 2012-13 का बजट पेश करते वक्त कृषि ऋण का लक्ष्य 25 फीसदी बढ़ा देंगे। चालू वित्त वर्ष के लिए कृषि ऋण का बजट लक्ष्यऔरऔर भी

चालू वित्त वर्ष 2011-12 में अप्रैल से फरवरी तक देश का निर्यात 21.4 फीसदी बढ़कर 267.4 अरब डॉलर पर पहुंच गया। शुक्रवार को इन आंकड़ों की घोषणा करते हुए वाणिज्य सचिव राहुल खुल्लर इतने खुश हुए कि उन्होंने कहा कि लगता है कि वित्त वर्ष के अंत तक 300 अरब डॉलर का निर्यात लक्ष्य हासिल कर लेंगे। वाणिज्य सचिव की तरफ से मीडिया को दी गई जानकारी के मुताबिक, फरवरी में देश से हुआ निर्यात 4.3 फीसदीऔरऔर भी

बाजार का रुझान तो बुधवार को ही बदलने लगा था क्योंकि ज्यादातर ट्रेडरों ने मंदी का नजरिया पकड़ लिया था। यहां तक कि मैंने भी 5277 के नीचे जाने पर बाजार के गिरने की धारणा पाल ली थी। लेकिन हमारी टीम के ही दूसरे सदस्यों ने कहा कि बेचो मत, बाजार ओवरसोल्ड अवस्था में पहुंच चुका है और बहुत तेजी से 5600 तक पहुंच जाएगा। आज मैं उनकी समझ व दृष्टि की दाद देता हूं। सभी लोगऔरऔर भी

वाणिज्य मंत्रालय ने सोमवार को विदेश व्यापार महानिदेशालय (जीडीएफटी) की अधिसूचना के जरिए कपास निर्यात पर तत्काल प्रभाव से जो बैन लगाया था, वह शुक्रवार शाम तक उठा लिया जाएगा। शुरुआती इजाजत 25 लाख गांठों के निर्यात की दी जाएगी। बुधवार को प्रधानमंत्री की हिदायत मिलने के बाद सरकार ने इसकी पूरी तैयारी कर ली है। शाम को वित्त मंत्रालय प्रणव मुखर्जी की अध्यक्षता में मंत्रियों का समूह अपनी बैठक में इस पर मोहर लगाने की औपचारिकताऔरऔर भी

यूं तो महज कागज की एक पट्टी होता है लिटमस। लेकिन द्रव में डालते ही खटाक से बता देता है कि वो अम्ल है या क्षार। काश! शेयर बाजार के लिए भी ऐसा कोई इकलौता लिटमस टेस्ट होता जो बता देता कि कोई कंपनी निवेश के काबिल है या नहीं। मुश्किल यह है कि यहां वर्तमान को ही नहीं, भविष्य को भी परखा जाता है। कई टेस्ट हैं। लेकिन वे आंशिक सच ही दिखाते हैं। अगर हमऔरऔर भी

विकास कभी रैखिक नहीं होता। वह छल्लों में चलता है। हर छल्ला पहले से ऊपर, पहले से बड़ा होता है। लेकिन पुराने छल्ले के ऊपर वह इस तरह चढ़ा रहता है कि अक्सर हमें ठहराव का भ्रम हो जाता है।और भीऔर भी