संसद का शीत सत्र (15वीं लोकसभा का 9वां सत्र और राज्यसभा 224वां सत्र) मंगलवार 22 नवंबर 2011 को शुरू होना है और सरकारी कामकाज की अनिवार्यता के अनुसार, यह सत्र बुधवार 21 दिसंबर 2011 को पूरा हो जाएगा। इन तीस दिनों में इस सत्र में 21 बैठकें होंगी। संसदीय कार्यमंत्री पवन कुमार बंसल ने बुधवार को संवाददाताओं को यह जानकारी देते हुए बताया कि सरकार की प्राथमिकता लंबित विधेयकों को पारित कराने की होगी। हालांकि यह सत्रऔरऔर भी

आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीईए) ने तय किया है कि अब खाद्यान्नों व चीनी कै उत्पादन का 90 फीसदी हिस्सा को जूट के थैलों में पैक करना जरूरी होगा। सीसीईए का यह फैसला जूट वर्ष 2011-12 (जुलाई 2011 से जून 2012 तक) से लागू हो जाएगा। हालांकि इसके कुछ अपवाद भी है। मसलन, जो चीनी निर्यात के लिए पैक की गई थी, लेकिन जिसका निर्यात न‍हीं हो पाया, वह इस आदेश से मुक्‍त रहेगी। छूट काऔरऔर भी

अभी आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के जन्मदिन समारोह को बीते दो दिन ही हुए हैं कि कांग्रेस आलाकमान और नेहरू परिवार की मुखिया सोनिया गांधी के खासमखास केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी के देश में व्याप्त भ्रष्टाचार के लिए नेहरू द्वारा अपनाई गई नीतियों को जिम्मेदार ठहरा दिया। श्री मुखर्जी ने बुधवार को भारतीय नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी या कैग) के 150वें वर्ष के समारोह की समाप्ति पर अपने संबोधन में कहा,औरऔर भी

बाजार में आज जमकर अफवाह चली कि भारत के वॉरेन बफेट माने जानेवाले प्रमुख निवेशक राकेश झुनझुनवाला (आरजे) चांदी की ट्रेडिंग में बुरी तरह फंस गए हैं और इसमें हुए नुकसान की भरपाई के लिए तमाम कंपनियों में अपना निवेश निकाल रहे हैं। मेरी समझ से यह मंदडियों द्वारा फैलाई गई अफवाह है। हालांकि यह सच है कि आरजे ने डेल्टा कॉर्प और वीआईपी इंडस्ट्रीज जैसे कुछ स्टॉक्स में अपनी होल्डिंग घटाई है क्योंकि अभी इनका मूल्यांकनऔरऔर भी

एवरेस्ट इंडस्ट्रीज लाभ के धंधे में लगी बराबर लाभ कमानेवाली कंपनी है। 1934 में बनी 77 साल पुरानी कंपनी है। बिल्डिंग से जुड़े साजोसामान बनाती रही है। छत व दीवारों से लेकर दरवाजे व फ्लोरिंग तक। फाइबर सीमेंट बोर्ड (एफसीबी) से लेकर प्री-इंजीनियर्ड स्टील बिल्डिंग तक। एस्बेस्टस पर्यावरण के लिए खतरनाक है, विकसित देशों से उसे निकाला गया तो कंपनी ने उसका विकल्प एफसीबी के रूप में पेश कर दिया। घरेलू बाजार के साथ-साथ कंपनी निर्यात भीऔरऔर भी

बड़ा आसान है निष्कर्षों में सच को फिट करके संतुष्ट हो जाना। लेकिन सच से निष्कर्षों को निकालना उतना ही मुश्किल है क्योंकि अपने करीब पहुंचते ही सच खटाक से नई-नई परतें खोलने लग जाता है।और भीऔर भी