यूरो संकट और इस हफ्ते शुक्रवार, 16 सितंबर को रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की आशंका को लेकर हमारा बाजार ज्यादा ही बिदक गया। सेंसेक्स में 2.17 फीसदी और निफ्टी में 2.23 फीसदी की तीखी गिरावट दर्ज की गई। ऊपर से जुलाई 2011 में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में महज 3.3 फीसदी की वृद्धि किसी का भी दिल बैठा सकती है। यह साफ-साफ अर्थव्यवस्था में सुस्ती आने का संकेत है। इस सूरतेहाल में मुद्रास्फीति को संभालनेऔरऔर भी

गांधीमती एप्लायंसेज चेन्नई की कंपनी है। एलपीजी स्टोव और मिक्सर ग्राइंडर बनाती है। तितली इसका समूह और ब्रांड है। दुकानों में तितली छाप के एलपीजी स्टोव व मिक्सर ग्राइंडर हो सकता है, देखें हों आपने। सरकार तक को साध कर रखती है कंपनी। उसे तमिलनाडु सरकार से हाल ही में करीब 285 करोड़ रुपए के टेबल टॉप वेट ग्राइंडर व मिक्सर ग्राइंडर सप्लाई करने ऑर्डर मिल रखा है जिसे उसे चालू वित्त वर्ष 2011-12 में ही पूराऔरऔर भी

अपने घर-परिवार और अपनी नजर में तो हर कोई मूल्यवान होता है। लेकिन असली बात यह है कि समाज की नजर में आपका मूल्य क्या है क्योंकि उसी से आपकी सुख-समृद्धि और चैन का फैसला होता है।और भीऔर भी

नौकरियां बढ़ाने के लिए ओबामा का 447 अरब डॉलर का पैकेज दुनिया के बाजारों में चहक नहीं ला सका क्योंकि समयसिद्ध नियम है कि जब भी कोई अच्छी खबर आती है, निवेशक हमेशा बेचते हैं। यह भी कि यह पैकेज रातोंरात असर नहीं दिखा सकता। लेकिन इसने इतना तो साबित कर दिया कि व्हाइट हाउस मानता है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था की हालत अच्छी नहीं है। इन हालात में दोतरफा बिकवाली होनी ही थी। जिन्होंने सुधार की उम्मीदऔरऔर भी

यहां-वहां, जहां-तहां, मत पूछो कहां-कहां। हर जगह शेयरों को खरीदने की जितनी भी सलाहें होती हैं, वे किसी न किसी ब्रोकरेज फर्म या उनकी तनख्वाह पर पल रहे एनालिस्टों की होती हैं। अगर कोई खुद को स्वतंत्र विश्लेषक भी कहता है तो उनकी अलग प्रोपराइटरी फर्म होती है जिससे वह खुद निवेश से नोट बना रहा होता है। क्या इन तमाम बिजनेस चैनलों या समाचार पत्रों में एनालिस्टों या ब्रोकरों की दी गई सलाहों पर भरोसा कियाऔरऔर भी

नई धारणाएं पुराने शब्दों में नहीं बांधी जा सकतीं। वे जीवन में जिस रूप, जिस भाषा में आएं, उन्हें वैसे ही स्वीकार करना होगा। नया हमारे हिसाब से नहीं ढलेगा। हमें ही उसके हिसाब से ढलना होगा।और भीऔर भी

टीम अण्णा देश में जन आंदोलन की नई तैयारी में जुट गई है। इस सिलसिले में अण्णा हज़ारे के गांव रालेगण सिद्धि में उनका दो दिन का जमावड़ा शनिवार से शुरू हो गया। पहले दिन की बैठक में तय हुआ है कि भूमि अधिग्रहण, चुनाव सुधार, जन प्रतिनिधियों को वापस बुलाने और उन्हें खारिज करने के अधिकार समेत सांसदों के प्रदर्शन का लेखा-जोखा कराने के संबंध में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखेंगे। भूमि अधिग्रहण जैसे संवेदनशीलऔरऔर भी

इस दुनिया में परिवार, प्यार व चंद दोस्तों के अलावा हर कोई पहले अपना फायदा देखता है। इक्का-दुक्का अपवाद संभव हैं। लेकिन फाइनेंस की दुनिया में यह अपवाद नहीं, नियम है। इसलिए पूरा संभलकर।और भीऔर भी

पिछले कुछ सालों में ही कंपनियों के प्रति निवेशकों का नजरिया बदल गया है। तीन-चार साल पहले 2007-08 तक अगर कंपनियों का बड़े नेताओं से ताल्लुक होता था तो उन्हें अच्छा माना जाता था। 2005 से 2007 तक चले तेजी के दौर में राजनीतिक संपर्कों वाली कंपनियों के शेयर जमकर चढ़े। लेकिन 2008 आते-आते यह दौर खत्म हो गया। अब हालत यह है कि राजनीतिक जुड़ाव होना एक तरह का जोखिम माना जाने लगा है और बड़े औरऔर भी

कैंसर की एक दवा सेतुक्सिमैब का अध्ययन कर रहे वैज्ञानिकों ने पाया है कि कैंसर कोशिकाएं इलाज से बचने के लिए उन्हें चकमा देती हैं और राह बदल लेती हैं। ये कोशिकाएं ट्रैफिक जाम में फंसी कारों की तरह व्यवहार करती हैं। जब एक रास्ता बंद हो जाता है तो वे वैकल्पिक रास्ता तलाश लेती हैं और उनका बढ़ना बदस्तूर जारी रहता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस नई खोज से ट्यूमर में दवा प्रतिरोध कोऔरऔर भी