सीधी-सी बात
मेहनत के बिना कहीं आसमान से कुछ नहीं टपकता। हां, जानवर या मशीन जैसे काम के दाम कम हैं। पर पढ़-लिखकर इंसानी हुनर के माफिक काम करेंगे तो दाम भी ज्यादा मिलेंगे। सीधी-सी बात है।और भीऔर भी
मेहनत के बिना कहीं आसमान से कुछ नहीं टपकता। हां, जानवर या मशीन जैसे काम के दाम कम हैं। पर पढ़-लिखकर इंसानी हुनर के माफिक काम करेंगे तो दाम भी ज्यादा मिलेंगे। सीधी-सी बात है।और भीऔर भी
साल 2008 और 2009 में बाजार लेहमान संकट की भेंट चढ़ गया। अब 2011 पर यूरोप व अमेरिका का ऋण संकट मंडरा रहा है। अमेरिका की आर्थिक विकास दर के अनुमान को घटाकर 1 फीसदी कर दिया गया है। अमेरिका के इतिहास में यह भी पहली बार हुआ कि स्टैंडर्ड एंड पुअर्स ने शनिवार को उसकी रेटिंग एएए के सर्वोच्च स्तर से घटाकर एए+ कर दी और आगे एए भी कर सकती है। हालांकि अमेरिकी वित्त मंत्रालयऔरऔर भी
विचार जब तक धारा का हिस्सा हैं, तब आप उनमें गोता लगाकर आगे से आगे बढ़ते चले जाते हैं। लेकिन विचारधारा में बंधते ही आपका बढ़ना रुक जाता है और यथार्थ आपकी मुठ्ठी से फिसलने लगता है।और भीऔर भी
शेयरों में निवेश कोई घाटा खाने या कंपनियों से रिश्तेदारी निभाने के लिए नहीं करता। अभी हर तरफ गिरावट का आलम है, अच्छे खासे सितारे टूट-टूटकर गिर रहे हैं तो ऐसे में क्या करना चाहिए? जो वाकई लंबे समय के निवेशक हैं, रिटायरमेंट की सोचकर रखे हुए हैं, उनकी बात अलग है। लेकिन अनिश्चितता से भरे इस दौर में शेयर बाजार में लांग टर्म निवेश का क्या सचमुच कोई मतलब है? लोगबाग दुनिया के मशहूर निवेशक वॉरेनऔरऔर भी
भय व भ्रमों के चलते हम चीजों को आधा-अधूरा या आड़ा-तिरछा देखते हैं। सच देखने के लिए हमें निर्भय होना पड़ेगा और इसके लिए समाज व परंपरा से मिली सुरक्षा को तोड़कर असुरक्षित हो जाना जरूरी है।और भीऔर भी
देश के विभिन्न बैंकों के बढ़ते डूबत ऋणों या गैर निष्पादित आस्तियों (एनपीए) पर चिंता व्यक्त करते हुए वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि इस संबंध में उपयुक्त उपाए किए जा रहे हैं। साथ ही बैंकों से ऋण मंजूर करने के दौरान सभी जरूरी प्रक्रियाओं को अपनाने को कहा गया है। लोकसभा में सरकार की ओर से उपलब्ध कराए गए आकड़ों के अनुसार, मार्च 2009 में सरकारी क्षेत्र के बैंकों की बकाया राशि 44,039 करोड़औरऔर भी
यह सच है कि दुनिया के बवंडर में हमारे बाजार के भी तंबू-कनात उखड़ जाते हैं। लेकिन यहां भी कुछ अपना है जो अपनी ही चाल से चलता है। जैसे, शुक्रवार को जब तमाम शेयर तिनके की तरफ उड़ रहे थे तब सेसेंक्स की 30 कंपनियों में तीन शेयर बढ़ गए। सेंसेक्स की 2.19 फीसदी गिरावट के बावजूद ओएनजीसी में 1.08 फीसदी, हिंडाल्को में 0.77 फीसदी और सिप्ला में 0.73 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई। बीएसईऔरऔर भी
शुक्रवार को जब दुनिया भर के तमाम बाजारों के सूचकांक धांय-धांय गिर रहे थे, बीएसई सेंसेक्स 3.97 फीसदी और एनएसई निफ्टी 4.04 फीसदी गिर गया था, तब भारतीय शेयर बाजार का एक सूचकांक ऐसा था जो कुलांचे मारकर दहाड़ रहा है। यह सूचकांक है एनएसई का इंडिया वीआईएक्स जो यह नापता है कि बाजार की सांस कितनी तेजी से चढ़ी-उतरी, बाजार कितना बेचैन रहा, कितना वोलैटाइल रहा। जी हां, अमेरिका के एक और आर्थिक संकट से घिरऔरऔर भी
अमेरिका में मचा बवाल, डाउ जोंस का 512 अंक गिरना, एशियाई बाजारों को लगी चपत और यूरोप की अस्पष्टता अपने साथ भारतीय बाजार को भी बहा ले गई। वैसे, मंदडियों का समुदाय आज सबसे ज्यादा मौज में रहा होगा, बशर्ते उन्होंने पर्याप्त शॉर्ट सौदे कर रखे होंगे। लेकिन यह काफी मुश्किल लगता है क्योंकि बाजार में शॉर्ट सेलिंग के महारथी व जिगर वाले ट्रेडर मुठ्ठी भर ही हैं। उनके कौशल को मैं सलाम करता हूं क्योंकि मैंऔरऔर भी
अनिल अग्रवाल के वेदांता समूह की कंपनी स्टरलाइट इंडस्ट्रीज का शेयर गिरता ही चला जा रहा है। इस साल जनवरी में 195.90 रुपए पर था। अभी 151 रुपए पर है, साल भर पहले 25 अगस्त 2010 को हासिल न्यूनतम स्तर 149 रुपए के करीब। जो रुझान है उसमें हो सकता है कि नया न्यूनतम स्तर ही बन जाए। किया क्या जाए? जिनके पास हैं, वे क्या करें और जिनके पास नहीं हैं, वे क्या करें। कंपनी यकीननऔरऔर भी
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