अनिश्चितताओं का क्रम जारी है। बहुत से अनुत्तरित सवाल बाजार को डोलायमान किए हुए हैं। पिछले सेटलमेंट में सेंसेक्स 17,770 तक गिरने के बाद सुधरकर 18,600 पर आया ही था कि कुछ नई बुरी खबरों ने पटरा कर दिया। यकीनन, कच्चा तेल, मुद्रास्फीति और ब्याज दरों का बढ़ना जैसे पुराने मुद्दे बरकरार हैं। लेकिन इधर ग्रीस में फिर से उभरे ऋण संकट और अमेरिका में आई सुस्ती ने बाजार की मानसिकता को चोट पहुंचाई है। यहां तकऔरऔर भी

बाबा रामदेव का सत्याग्रह अकाल मृत्यु का शिकार हो गया। योगगुरु हरिद्वार में अपने पातंजलि योगपीठ आश्रम वापस पहुंच चुके हैं। दिल्ली राज्य के नई दिल्ली जिले में धारा 144 लगा दी गई है क्योंकि पुलिस को इंडिया गेट, बोट क्लब या जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन किए जाने की आशंका थी, जो नई दिल्ली जिले के इलाके आते हैं। कुछ दिनों में यह आशंका खत्म होते ही धारा 144 भी हटा ली जाएगी। हुआ यह किऔरऔर भी

माना कि मन ही मनुष्य के बंधन व मोक्ष का कारण है। लेकिन शरीर की स्वतंत्र सत्ता है। मन उसी के अधीन है। इसलिए जो शरीर को स्वस्थ नहीं रख पाते, वे मन की उदात्त अवस्था तक नहीं पहुंच पाते।और भीऔर भी

योगगुरु बाबा रामदेव ने दस सालों में जनता-जनार्दन में जो भी प्रतिष्ठा कमाई थी, उनकी एक चूक से वह एकदम मिट्टी में मिल गई। बाबा ने शुक्रवार को ही सरकार के साथ डील कर ली थी कि रामलीला मैदान में शनिवार सुबह को शुरू हुआ अनशन दोपहर तक खत्म कर देंगे, लेकिन 6 जून तक ‘तप’ जारी रहेगा। खुद बाबा रामदेव ने स्वीकार किया कि उनकी तरफ से संगठन के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने सरकार को इसऔरऔर भी

नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अमर्त्य सेन ने गंभीर आर्थिक संकट के दौर गुजर रहे पश्चिमी देशों को तेज आर्थिक वृद्धि के दौर से गुजर रहे भारत और चीन से सीख लेने की सलाह दी है। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के सेड बिजनेस स्कूल में संजय लाल विजटिग प्रोफेसरशिप ऑफ बिजनेस एंड डेवलपमेंट की शुरूआत करते हुए सेन ने एक पैनल चर्चा में कहा कि विकासशील देश पश्चिम में अर्थव्यवस्था को लेकर चल रही चर्चा में ‘स्तरीय विचार’ दे सकतेऔरऔर भी

दिल्ली के रामलीला मैदान में जहां एक ओर बाबा रामदेव नायक की भूमिका में हैं, वहीं दूसरी ओर भ्रष्टाचार को खलनायक के रूप में पेश किया गया है। राष्ट्रीय राजधानी में भीषण गर्मी के बावजूद बाबा रामदेव के प्रतिबद्ध समर्थकों ने समाज पर भ्रष्टाचार के असर को प्रदर्शित करने के लिए विभिन्न माध्यमों को अपनाया है। आंदोलन स्थल पर युवा समर्थक ‘कैन्वस’ और टीशर्ट पर पेंटिंग कर भ्रष्टाचार के खिलाफ नारे लिख रहे हैं। मैदान के प्रवेशऔरऔर भी

बाजार लोगों का झुंड नहीं होता, भीड़ नहीं होता। वह आगा-पीछा, भूत-भविष्य देख अपना फायदा सोचकर चलनेवालों का सामूहिक विवेक होता है। ठीक उसी तरह जैसे चुनावों में अवाम का फैसला भीड़ का नहीं, बल्कि सामूहिक विवेक का फैसला होता है। हां, पहले बूथ कैप्चरिंग वगैरह चलती थी तो अवाम की सही चाहत सामने नहीं आ पाती थी। ईवीएम मशीनें आने व चुनिंदा चुनाव सुधारों के बाद हालात पहले से बेहतर हुए हैं। इसी तरह हमारे बाजारऔरऔर भी

ज्ञान-विज्ञान की सारी जद्दोजहद प्रकृति व परिवेश के साथ पूरा तादात्म्य बनाने के लिए है। जो है, उसे समझने के लिए है। लेकिन एक के जानते ही पुराना बदल जाता है। इसलिए ज्ञान की यात्रा अनवरत है।और भीऔर भी

ई-पंचायत की अवधारणा को लागू करने के लिए केंद्र सरकार ने सभी राज्‍यों व केन्‍द्र-शासित क्षेत्रों को राष्‍ट्रीय पंचायत निदेशिका प्रोफाइलर तैयार करने की सलाह दी है। पंचायती राज मंत्रालय का सुझाव है कि हर पंचायत का एक विशिष्‍ट कोड होना चाहिए, क्‍योंकि सभी आवेदन इन विशिष्‍ट कोड पर आधारित होंगे। मंत्रालय का कहना है कि राज्‍यों को यह काम तुरंत पूरा कर लेना चाहिए। हालांकि अभी जीपीएस 2001 की जनगणना के कोड से मापे जाते हैं।औरऔर भी

बॉम्बे हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल कर मांग की गई है कि चुनाव आयोग को मतदान के दौरान इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) में ‘नकारात्मक मतदान’ यानी गोपनीयता के साथ किसी भी उम्मीदवार को वोट नहीं देने के प्रावधान को शामिल करने का निर्देश दिया जाए। ठाणे निवासी महेश बेडेकर ने पीआईएल दाखिल कर अदालत से अनुरोध किया है कि चुनावों के दौरान ‘नकारात्मक मतदान’ की गोपनीयता सुनिश्चित की जानी चाहिए क्योंकि मौजूदा नियमों में ऐसा नहींऔरऔर भी