मेहनत करते समय गान और मेहनत करने के बाद मान मिल जाए तो काम करने का उत्साह चौगुना हो जाता है। फिर तो इंसान शान से श्रम का रस लेता रहता है और उसे इसका फल भी मिलता है।और भीऔर भी

अप्रैल के पहले हफ्ते से गेहूं की सरकारी खरीद चालू है। दिखाने के लिए सरकारी खरीद के लंबे-चौड़े लक्ष्य तय किए गए हैं। लेकिन सरकार इस दिशा में कुछ खास करने नहीं जा रही। गेहूं की सरकारी खरीद में एफसीआई समेत अन्य सरकारी एजेंसियां ढीला रवैया अपनाएंगी। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड समेत लगभग एक दर्जन राज्यों में एफसीआई गेहूं खरीद से दूर ही रहने वाली है। ये राज्य केंद्रीय पूल वाली खरीद में नहीं आते हैं।औरऔर भी

देश की खाद्यान्न सुरक्षा के लिए सरकार के पास न तो गोदाम हैं और न ही भंडारण क्षमता बढ़ाने की कोई पुख्ता योजना। भंडारण की किल्लत से भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) मुश्किलों का सामना कर रहा है। हर साल खुले में रखा करोड़ों का अनाज सड़ रहा है। इसके लिए सरकार अदालत की फटकार से लेकर संसद में फजीहत झेल चुकी है। लेकिन पिछले दो सालों से सरकार भंडारण क्षमता में 1.50 करोड़ टन की वृद्धि काऔरऔर भी

गेहूं की सरकारी खरीद और इसकी बर्बादी की तैयारी कर ली गई है। पहले से ही इफरात पुराने अनाज से भरे गोदाम एफसीआई की सांसत बढ़ाने वाले हैं। गेहूं की नई फसल के भंडारण के लिए गोदामों की भारी कमी है। रबी फसलों की बंपर पैदावार को देखकर खुश होने की जगह सरकारी एजेंसी एफसीआई के होश उड़ गये हैं। सुप्रीम कोर्ट से फजीहत झेलने के बावजूद खाद्य मंत्रालय ने पिछले दो सालों में मुट्ठी भर अनाजऔरऔर भी

कंपनियों के नतीजों का मौसम खत्म होने को है। अब तक तस्वीर यह बनी है कि जहां इनफोसिस और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी तमाम बड़े स्तर की कंपनियां बाजार की अपेक्षाओं को पूरा करने में नाकाम रही हैं, वहीं पोलारिस, एचसीएल टेक्नो व हिंदुस्तान जिंक जैसे मध्यम स्तर की कंपनियों ने उम्मीद के बेहतर नतीजे हासिल किए हैं। कुल मिलाकर कॉरपोरेट क्षेत्र का लाभार्जन बीते वित्त वर्ष 2010-11 में पहले से 20 फीसदी ज्यादा रहेगा। लेकिन चालू वित्तऔरऔर भी

राजद्रोह का मतलब राष्ट्रद्रोह नहीं होता। हालांकि हर सरकार यही बताने की कोशिश करती है। लेकिन राष्ट्र किसी भी राज से बहुत-बहुत ऊपर होता है। जो इस बात को समझता है, वही सच्चा देशभक्त है।और भीऔर भी

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के बयानों से आहत कर्नाटक के लोकायुक्त न्यायमूर्ति संतोष हेगड़े ने अण्णा हज़ारे की अगुवाई में भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू हुए आंदोलन में शामिल सामाजिक कार्यकर्ताओं के आग्रह को स्वीकार करते हुए लोकपाल विधेयक मसौदा समिति में बने रहने का फैसला किया है। पहले उन्होंने कहा था कि वे सोमवार को यह संयुक्त समिति छोड़ने की घोषणा कर सकते हैं। उधर, लोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार करने के लिए गठित मसौदा समिति मेंऔरऔर भी

सिर्फ बाजार भाव से नहीं पता चलता है कि कोई शेयर सस्ता है या नहीं। भाव बढ़ जाने के बावजूद वह सस्ता हो सकता है या महंगा। इसका पता इससे चलता है कि उसके मूल्यांकन का स्तर क्या है। और, मूल्यांकन का पैमाना है पी/ई अनुपात। यानी, बाजार भाव को उसके सालाना ईपीएस (प्रति शेयर लाभ) से भाग देने पर निकला अनुपात। आप कहेंगे कि यह तो अलग-अलग कंपनियों की बात हुई। कंपनियों के किसी सेट काऔरऔर भी

करीब महीने भर पहले मेरी मुलाकात नूतन संजय गीध से हुई। 33 साल की नूतन एक निजी कंपनी में काम करती है। बड़ी बेचैन थीं। बीते वित्त वर्ष में भारी भरकम इंक्रीमेंट मिलने के कारण उसका टैक्स का दायरा बढ़ गया था। सो, नूतन ने बीमा पॉलिसी में निवेश करने का मन बनाया। यह पॉलिसी वह टैक्स बचाने के लिए खरीदना चाहती थीं। जब मैंने इस बारे में सलाह देनी चाही तो वह बोली कि सर, रहनेऔरऔर भी

दुनिया में एक अरब डॉलर (लगभग 4500 करोड़ रुपए) से ज्यादा की संपत्ति वाले अमीरों की सूची में शामिल 55 भारतीयों में से 26 वैश्य समुदाय के हैं। वैश्य समुदाय भारत की आबादी का बमुश्किल एक फीसदी है। राज्यों के हिसाब से देखें तो 16 राजस्थानी और 13 गुजराती हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, व उड़ीसा से इस सूची में कोई नहीं है। सूची में 10 लोग दक्षिण भारत के हैं जिनमें से पांचऔरऔर भी