कच्चा तेल आज दो भूमिकाओं में है। एक तरह जहां वह एक भौतिक जिंस है, वहीं दूसरी तरफ वह निवेश के लिए एक वित्तीय माध्यम या आस्ति भी बन चुका है। अगर हमें इसके मूल्यों में आनेवाले उतार-चढ़ाव और सही मूल्य के अंतर को समझना है कि हमें कच्चे तेल के भौतिक व वित्तीय बाजार के अंतर्संबंध को समझना होगा। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री जयपाल रेड्डी ने मंगलवार को रियाद (सऊदी अरब) में अंतरराष्ट्रीय उर्जा फोरम की विशेषऔरऔर भी

बाजार तलहटी पकड़ चुका है। निराशा अपने चरम पर पहुंच चुकी है। निवेशक फिलहाल स्टॉक्स से कन्नी काट रहे हैं। इनमें भी जो छोटे निवेशक हैं वे डेरिवेटिव सेगमेंट में मार्क टू मार्केट की अदायगी के लिए जो कुछ भी पास में है, उसे बेचे जा रहे हैं। मैं कल आम निवेशकों के मूड का पता लगाने के लिए गुजरात में तीन छोटी जगहों पर गया था। मैंने पाया कि यह बात उनके मन में कहीं गहरेऔरऔर भी

हमारे स्टॉक एक्सचेंज निवेशकों के हितों के लिए बड़े चिंतित हैं। खासकर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) तो कुछ ज्यादा ही परेशान हैं। बाकायदा विज्ञापन जारी कर निवेशकों को समझाता है कि सोच कर, समझ कर, इनवेस्ट कर। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल से मिलकर रिसर्च रिपोर्ट जारी करता है ताकि निवेशक को निवेश की निष्पक्ष राय मिल सके और उनका पैसा सुरक्षित रहे। कैसे? एक ताजा बानगी पेश है। एनएसई ने क्रिसिल की तरफ से इसी 7 फरवरी कोऔरऔर भी

सिर्फ अपने या अपनों के लिए कमाने से नौकरी होती है, बरक्कत नहीं होती। बरक्कत तब होती है, दौलत तब बरसती है, जब आप किसी सामाजिक संगठन, संस्था या कंपनी के लिए कमाते हो।और भीऔर भी