साल 2010 पब्लिक इश्यू से जुटाई गई राशि के मामले में भारतीय कॉरपोरेट जगत में नया इतिहास बनाकर विदा हो रहा है। लेकिन नया साल 2011 इसको भी मात देने को तैयार दिख रहा है। कैलेंडर वर्ष 2010 में भारतीय कॉरपोरेट जगत ने पब्लिक इश्यू के जरिए 59,523 करोड़ रुपए जुटाए हैं। लेकिन कैलेंडर वर्ष 2011 में अगर सेबी के पास दाखिल निजी कंपनियों के प्रॉस्पेक्टस और सरकारी कंपनियों के विनिवेश को आधार बनाएं तो पब्लिक इश्यूऔरऔर भी

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने हफ्ते भर पहले की गई अपनी पेशकश को अमली जामा पहनाते हुए सोमवार को बाकायदा लोक लेखा समिति (पीएसी) को एक पत्र भेजकर कहा कि वे 2जी स्पेटक्ट्रम आवंटन घोटाले की जांच के सिलसिले में समिति के सामने पेश होने को तैयार हैं। उन्होंने पीएसी के अध्यक्ष और बीजेपी नेता मुरली मनोहर जोशी को यह पत्र उस दिन भेजा है, जब नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) विनोद राय भी पीएसी के सामने पेशऔरऔर भी

साल 2010 के बाकी चार दिन इसी तरह रंग-तरंग में मनाते रहिए। 30 दिसंबर को रोलओवर होना है और 31 दिसंबर म्यूचुअल फंडों द्वारा अपने एनएवी (शुद्ध आस्ति मूल्य) को दुरुस्त करने का दिन होगा। सेंसेक्स 180 अंकों की पेंग मारने के बाद 45 अंक गिरकर बंद हुआ है, जबकि निफ्टी में साढे तेरह अंकों की गिरावट आई है। अगले चार दिनों में कुछ भी खास नहीं होने वाला है। हां, एक बात अच्छी तरह दिमाग मेंऔरऔर भी

मुंबई, सात द्वीपों पर बना शहर, देश की आर्थिक राजधानी। लेकिन भारत में अंग्रेजों का शासन शुरू होने से 96 साल पहले ही यह शहर इंग्लैंड का हो चुका था। देश में ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन 1757 में प्लासी के युद्ध के बाद शुरू हुआ। लेकिन 1661 में ही इंग्लैंड के किंग चार्ल्स द्वितीय को मुंबई शहर पुर्तगाल की राजकुमारी से शादी करने के बाद राजसी दहेज के रूप में दे दिया गया था क्योंकि तबऔरऔर भी

बीएसई व एनएसई में मिलाकर हर दिन करीब तीन हजार कंपनियों के शेयरों में ट्रेडिंग होती है। इनमें से सैकड़ों शेयर हर दिन बढ़ते हैं। ऐसे में कोई चुनना चाहे तो हर दिन बढ़नेवाले दो-चार शेयर छांटना मुश्किल नहीं है। लेकिन हर दिन की बढ़त पर निगाह ट्रेडरों की रहती है जो दिन के दिन अपनी कमाई कर घर निकल लेते हैं। हमें तो ऐसे शेयर चुनने हैं जो छह महीने साल भर में एफडी से ज्यादाऔरऔर भी

ये वर्ग और वर्ग संघर्ष संक्रमण काल की चीजें हैं। शांति काल आते ही व्यक्ति ही अंतिम सत्य बन जाता है और सामाजिक व्यवस्था एक-दूसरे को निचोड़ने-खसोटने का जंगल राज बन जाती है।और भीऔर भी