यूरिया को डिकंट्रोल करने की मुहिम जारी है और उर्वरक कंपनियों के स्टॉक पर जुनून-सा सवार होता दिख रहा है। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता में बना मंत्रियों की समूह (जीओएम) शुक्रवार 3 दिसंबर को इस मुद्दे पर बैठक करेगा। पहले यह बैठक आज, सोमवार 29 नवंबर को होनी थी। लेकिन उर्वरक व रसायन मंत्री एम के अलागिरी इस बैठक से पहले उर्वरक उद्योग के प्रतिनिधियों से मिलना चाहते थे। यह मुलाकात 1 दिसंबर को होगी,औरऔर भी

रबी फसलों की बुवाई कहीं नमी की कमी से तो कहीं हाल की बारिश से बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसी के चलते अभी तक रबी सीजन की बुवाई पिछले साल के मुकाबले अभी तक आधी भी नहीं हो पाई है। सबसे चिंताजनक स्थिति गेहूं बुवाई की है। इसका रकबा पिछले साल के मुकाबले सर्वाधिक 30 लाख हेक्टेयर तक पीछे है। बुवाई में विलंब होने से गेहूं की उत्पादकता पर विपरीत असर पडऩे का खतरा है। इसेऔरऔर भी

संयुक्त अरब अमीरात में स्थित रास अल खमा मुक्त व्यापार (एफटीजेड) क्षेत्र भारत के छोटे व मझोले उद्यमियों को अपनी इकाइयां स्थापित करने के लिए आकर्षित कर रहा है। इस मुक्त व्यापार क्षेत्र ने दुबई और अबु धाबी के प्रतिष्ठित व्यापारिक केन्द्रों को चुनौती देने की तैयारी की है जिसके लिए वह लघु व मझोले उद्यमियों को आकर्षक पैकेजों की पेशकश कर रहा है। रास अल खमा एफटीजेड के चेयरमैन व शाही परिवार के सदस्य शेख फैसलऔरऔर भी

बाजार की हालत दुरुस्त हो चली है और एफआईआई ने अच्छे शेयरों को बटोरना शुरू कर दिया है। मीडिया की सुर्खियां भी दिखाती हैं कि हाउसिंग लोन घोटाले या रिश्वतखोरी का मामला अब धीरे-धीरे सम हो रहा है। हालांकि बाजार के लोगों को अब भी समझ में नहीं आया है कि यह गिरावट एचएनआई (हाई नेटवर्थ इंडीविजुअल) निवेशकों और ऑपरेटरों को ठिकाने लगाने के लिए थी क्योंकि रिटेल ने कोई खास खरीद कर नहीं रखी थी। खरीदऔरऔर भी

बाजार के नामी उस्तादों में से शुमार, शंकर शर्मा भी यूको बैंक को खरीदने की सलाह देते सुने गए हैं। वैसे, यूको बैंक (बीएसई कोड – 532505, एनएसई कोड – UCOBANK) में बढ़ने की थोड़ी गुंजाइश भी नजर आ रही है। इस शेयर की बुक वैल्यू 72.65 रुपए है। शुक्रवार को यह 6.79 फीसदी की गिरावट के साथ 131.15 रुपए पर बंद हुआ है। ठीक पिछले बारह महीनों का ईपीएस 18.29 रुपए है तो पी/ई अनुपात मात्रऔरऔर भी

जिंदगी में जितना वॉयड होता है, चाहतें उतनी लाउड होती हैं। धंधेबाज हमारे इस रीतेपन को अमानवीय होने की हद तक भुनाते हैं। उन्हें बेअसर करना है तो हमें अपना रीतापन भरना होगा, चाहतें अपने-आप सम हो जाएंगी।और भीऔर भी