देश के सबसे बड़े बैक एसबीआई (भारतीय स्टेट बैंक) का शुद्ध लाभ चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में मात्र 0.45 फीसदी बढ़ा है, जबकि ब्रोकर समुदाय 21.64 फीसदी वृद्धि की उम्मीद लगाए बैठा था। नतीजे बाजार बंद होने के बाद घोषित किए गए। इसलिए शेयर के भाव पर इसका असर नहीं देखा गया। एसबीआई का शेयर सोमवार को 3515 रुपए तक पहुंच गया, जो उसका 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर है। हालांकि बंद हुआ मुहूर्त केऔरऔर भी

ग्रीन रिवोल्यूशन सीधे-सीधे भारत में हरित क्रांति के रूप में स्वीकार हो गई और कई दशकों तक उसका असर भी देखा गया, पर एवरग्रीन रिवोल्यूशन को सदाबहार क्रांति कहना शायद मुश्किल होगा। लेकिन भारत दौरे पर आए अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने विश्व में खाद्य सुरक्षा हासिल के लिए ग्रीन के बाद अब एवरग्रीन रिवोल्यूशन की पेशकश की है। उन्होंने राजधानी दिल्ली के हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ आयोजित संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधितऔरऔर भी

बीमा नियामक संस्था, आरआरडीए (इरडा) ने आम अवाम को आगाह किया है कि वह ऐसे जालसाज लोगों से सावधान रहे जो खुद को इरडा का प्रतिनिधि बताकर उन्हें बीमा पॉलिसियां बेचने की कोशिश कर रहे हैं। इस बारे में इरडा ने एक पब्लिक नोटिस जारी की है। नोटिस में कुछ ऐसे मामलों के सामने आने का जिक्र किया गया है कि जिसमें लोगों को इरडा का प्रतिनिधि बताकर फोन किया गया और उन्हें विभिन्न बीमा कंपनियों कीऔरऔर भी

बाजार (सेंसेक्स) खुला मुहूर्त से करीब 37 अंक बढ़कर, मगर बंद हुआ 152.58 अंक की गिरावट के साथ 20,852.38 पर जाकर। लेकिन घबराने की कोई बात नहीं। यह सब कुछ नहीं, बस मछली पकड़ने के जाल जैसा काम है। जाल को नीचे तक ले जाओ ताकि और मछलियां पकड़ में आ जाएं। बाजार अब पूरी तरह नियंत्रण में है और उतार-चढ़ाव इसलिए लाए जा रहे हैं ताकि आप यहां से वहां तक झूल, या कहें तो झूमऔरऔर भी

मुंबई की कंस्ट्रक्शन व इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी प्रतिभा इंडस्ट्रीज में इधर हलचल कुछ ज्यादा ही तेज हो गई है। कंपनी को पिछले हफ्ते तीन खास कांट्रैक्ट मिले हैं। पहला, गोदावरी मराठवाडा इरिगेशन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन, औरंगाबाद से 37.44 करोड़ रुपए का। दूसरा, रहेजा यूनिवर्सल की तरफ से मुंबई में तीन रिहाइशी इमारतें बनाने के लिए 63 करोड़ रुपए का कांट्रैक्ट, जिसमें 20 फ्लोर की तीन इमारतें बनाई जानी हैं। तीसरा कांट्रैक्ट है तमिलनाडु वॉटर सप्लाई एंड ड्रेनेज बोर्ड का।औरऔर भी

गुरु, किताब या ज्ञान के अन्य स्रोतों की भूमिका इतनी भर है कि वे हमारे मन-मस्तिष्क पर पड़े माया के परदे को हटा देते हैं। इसके बाद वास्तविक सच तक पहुंचने का संघर्ष हमें अकेले अपने दम पर करना पड़ता है।और भीऔर भी