ट्रेडरों के लिए आज का दिन बड़ा दुखदायी रहा। उनमें से ज्यादातर निराशा की गर्त में चले गए। उनकी निराशा की वजह वो खीझ है जो उन्हें विशेषज्ञों की इस राय पर भरोसा करने से हुई है कि निफ्टी अब बेरोकटोक 5800 तक गिरने जा रहा है, जबकि बाजार में ऐसा नहीं हुआ। शुरू में गिरावट आई जरूर। लेकिन बाद में बाजार संभल गया। मैंने तो यहां तक सुना कि टेक्निकल एनालिसिस के एक धुरंधर ने खुदऔरऔर भी

देश में एक बार फिर से बच्चों के गायब होने की घटनाएं सामने आ रही हैं। इन घटनाओं के आधार पर गौर करें तो बड़े शहरो में स्थिति ज्यादा भयावह है। गैर-सरकारी संस्थाओं का अनुमान है कि भारत में हर साल 45000 बच्चे गायब हो रहे हैं। साल 2007 में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि देश में सबसे अधिक बच्चे झारखंड, छत्तीसगढ़, आध्र प्रदेश, बिहार और उड़ीसा से गायब हो रहे हैं।औरऔर भी

सब कुछ देखने के तरीके पर निर्भर करता है। चाहो तो सारी दुनिया दोस्तों से भरी नजर आएगी। पेड़-पालव तक मदद के लिए हाथ बढ़ाते दिखेंगे। और, चाहो तो घर का आदमी भी बैरी दिखेगा। इसमें से चुनना आपको ही है।और भीऔर भी

दोपहर तक बीएसई सेंसेक्स 20,000 के नीचे और एनएसई निफ्टी 6000 के नीचे चला गया था। लेकिन यह कोई चिंता की बात नहीं, क्योंकि बाजार दो कदम आगे बढ़ने से पहले एक कदम पीछे चलकर अपने पैर जमाता है। चिंता की बात यह है कि हजारों कंपनियों के बीच हम निवेश के लिए किन-किन को चुनें। इसमें भी कंपनियों को चुनना तो बाद में होता रहेगा। उससे पहले यह जानने की जरूरत है कि कौन से सेक्टरऔरऔर भी