संविधान सभा द्वारा 14 सितंबर, 1949 को सर्वसम्मति से हिंदी को संघ की राजभाषा घोषित किया गया था। तब से केंद्र सरकार के देश-विदेश स्थित सभी कार्यालयों में हर साल 14 सितंबर हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। लेकिन बहुतों को पता नहीं कि हिंदी केवल राजभाषा या सरकारी भाषा है, राष्ट्रभाषा नहीं। गुजरात हाईकोर्ट ने 13 जनवरी 2010 को एक आदेश में कहा था, “सामान्यत: भारत में ज्यादातर लोगों ने हिंदी को राष्ट्रभाषा कीऔरऔर भी

यह वक्त है देखने-समझने का कि हमने आपसे क्या कहा था और दुनिया भर के विश्लेषक क्या कह रहे थे। उन्होंने हिन्डेनबर्ग अपशगुन के नाम पर मुनादी की थी कि सितंबर में बाजार में जबरदस्त गिरावट आएगी, जबकि हमने डंके की चोट पर कहा था कि बाजार नई ऊंचाई पकड़ेगा। सीएनबीसी से लेकर एनडीटीवी व तमाम दूसरे चैनलों पर एनालिस्ट लोग आपका ब्रेनवॉश करते रहे और कहते रहे कि निफ्टी का 5600 अंक पर जाना असंभव है।औरऔर भी

देश के सारे गांवों को साल 2015 तक मोबाइल बैंकों से जोड़ देने की योजना है। रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर के सी चक्रबर्ती के मुताबिक अगले पांच सालों में हर गांववासी को वित्तीय सेवाओं के दायरे में शामिल कर लिया जाएगा। उन्होंने रविवार को वाराणसी में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान यह जानकारी दी। बता दें कि अभी देश की वयस्क आबादी के केवल 40 फीसदी हिस्से तक बैंकिंग सेवाएं पहुंच सकी हैं। श्री चक्रबर्ती नेऔरऔर भी

सरकारी गोदामों में सितंबर की शुरुआत में गेहूं चावल का 5.02 करोड़ टन का खाद्यान्न भंडार मौजूद था जो कि सरकारी बफर स्टॉक नियमों की तुलना में करीब दोगुना भंडार है। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के ताजा आंकडों के अनुसार एक सितंबर 2010 को उसके गोदामों में 2.04 करोड टन चावल और 2.98 करोड टन गेहूं का भंडार मौजूद था। निर्धारित बफर स्टॉक नियम के अनुसार हर साल एक अक्तूबर को उसके गोदाम में गेहूं और चावलऔरऔर भी

नितिन फायर प्रोटेक्शन इंडस्ट्रीज (बीएसई कोड – 532854, एनएसई कोड – NITINFIRE) तीन दशक पुरानी कंपनी है। तमाम अग्निशामक उपकरणों के साथ ही सीएनजी सिलेंडर भी बनाती है। राजस्थान के एक ऑयल ब्लॉक से कच्चा तेल निकालने के लिए बने कंसोर्टियम में भी 10 फीसदी हिस्सेदारी रखती है। उसकी एक सब्सिडियरी ने दुबई की एक फायर प्रोटेक्शन कंपनी में 40 फीसदी हिस्सेदारी ले रखी है। चालू वित्त वर्ष 2010-11 में जून की तिमाही में उसकी आय 67.3औरऔर भी

फूलों की पंखुड़ियों से लेकर तितलियों के पंखों तक में पैटर्न है। अंदर-बाहर की इस दुनिया में ऐसा कुछ नहीं, जहां क्रमबद्धता न हो, दोहराव न हो। हमारे जीवन तक में एक पैटर्न चलता है जिसे पकड़ने की जरूरत है।और भीऔर भी