इस समय देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक ओ पी भट्ट का सालाना पैकेज 26.5 लाख रुपए का है। भट्ट का यह पैकेज सरकारी बैंक के प्रमुख होने के नाते है। दूसरी तरफ निजी क्षेत्र के दो बड़े बैंकों में से आईसीआईसीआई बैंक की प्रबंध निदेशक चंदा कोचर का सालाना पैकेज 2.08 करोड़ रुपए और एचडीएफसी बैंक के प्रबंध निदेशक आदित्य पुरी का सालाना पैकेज 3.40 करोड़ रुपए का है। मजे कीऔरऔर भी

स्विटजरलैंड के बासेल शहर में जब दुनिया भर के बैंकिंग नियामक नए मानक को लेकर माथापच्ची कर रहे हैं तब हमारे बैंकिंग नियामक भारतीय रिजर्व बैंक के गर्वनर डॉ. दुव्वरी सुब्बाराव का मानना है कि बासेल-III मानकों को अपनाने में भारतीय बैंकों को खास कोई मुश्किल नहीं होगी क्योंकि 30 जून 2010 तक ही वे 13.4 फीसदी का जोखिम-भारित आस्ति पूंजी पर्याप्तता अनुपात (सीआरएआर) हासिल कर चुके हैं, जिसमें टियर-1 पूंजी का हिस्सा 9.3 फीसदी है। डॉ.औरऔर भी

सेंसेक्स 18,600 पर पहुंच चुका है और एफआईआई बाजार में पैसा लगाए जा रहे हैं। यह उनका दोमुंहापन नहीं तो और क्या है। बिजनेस चैनलों पर वे कहते हैं कि 18,000 अंक पर बाजार महंगा है और दूसरी तरफ वे खुद खरीद किए जा रहे हैं। सच्चाई तो यह है कि वे सेंसेक्स के 26,000 होने तक भारत को नजरअंदाज नहीं कर सकते। इसकी तीन वजहें हैं। एक, भारत में वो सब कुछ है जिसके दम परऔरऔर भी

ओनिडा ने खुद की ब्रांडिंग ही ऐसी की है कि शायद हर कंज्यूमर के दिमाग में उसकी अलग जगह है। ओनर्स प्राइड, नेवर्स एनवी। कंज्यूमर डूयरेबल उत्पादों में इसकी रेंज भी काफी है। इस ब्रांड की मालिक कंपनी का नाम है मर्क इलेक्ट्रॉनिक्स। कंपनी अभिनव प्रयोगों और प्रस्तुति में कहीं से पीछे नहीं छूटी। बराबर समय के साथ चल रही है। लेकिन अभी तक समय उसका साथ नहीं दे रहा। तभी तो इतने मशहूर उपभोक्ता ब्रांड कीऔरऔर भी

पैर वर्तमान में और नापते हैं भविष्य को! कैसे संभव है? हम बहकने लगते हैं कि ये होगा तो वो करेंगे, ऐसा होगा तो वैसा करेंगे; जबकि तैयारी यह होनी चाहिए कि ये हुआ तो क्या करेंगे, वो हुआ तो क्या करेंगे।और भीऔर भी