वित्तीय समावेश क्यों महत्वपूर्ण है? सीधी-सी बात कि यह महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि यह बराबरी वाले विकास को लाने और टिकाए रखने की आवश्यक शर्त है। ऐसे बहुत ही कम दृष्टांत हैं जब कोई अर्थव्यवस्था कृषि प्रणाली से निकलकर उत्तर-औद्योगिक आधुनिक समाज तक व्यापक आधारवाले वित्तीय समावेश के बिना पहुंची हो। हम सभी अपने निजी अनुभव से जानते हैं कि आर्थिक अवसरों का गहरा रिश्ता वित्तीय पहुंच से होता है। ऐसी पहुंच खासकर गरीबों के लिए बहुतऔरऔर भी

देश की कुल 6 लाख बसाहटों में से बमुश्किल 30,000 या महज 5 फीसदी में किसी वाणिज्यिक बैंक की शाखा है। तकरीबन 40 फीसदी भारतीयों के पास ही बैंक खाता है। यह अनुपात देश के उत्तर-पूर्वी हिस्से में तो और भी ज्यादा कम है। ऐसे लोगों की संख्या जिनके पास किसी न किसी किस्म का जीवन बीमा कवर है, केवल 10 फीसदी है। साधारण बीमा की बात करें तो यह सुविधा लेनेवालों का अनुपात एक से भीऔरऔर भी

पुराने के बीच हमेशा नया बनता रहता है। पुराना हमें बांधे रखता है तो नया हमें खींचता है। इनके बीच हम तलवार की धार पर चलते हैं। लेकिन नया-नया रटने के बावजूद ज़रा-सा चूके तो पुराने के खेमे में जा गिरते हैं।और भीऔर भी

सूरज की गरमी में धरती के गरमाने और रात होते ही धरती का ठंडा हो जाना एक प्रक्रिया है जिसमें धरती को चारों ओर से घेरे महासागर, धरती के तापमान का अंतरिक्ष में परावर्तन और रात अपनी-अपनी भूमिका निभाते हैं। पेड़-पौधे वैसे ही इस धरती पर अपने वजूद को बचाए रखने की लड़ाई लड़ रहे हैं। लेकिन हाल ही में कुछ ऐसी अध्ययन रिपोर्टें पेश की गई हैं जिनमें पौधों को धरती के विलेन के तौर परऔरऔर भी

अनंत चुम्बकीय क्षेत्रों से घिरे हैं हम। अणु-परमाणु तक का अपना हलका है। ऐसे में खुद भी एक गुरुत्व व चुम्बकीय क्षेत्र के मालिक होने के नाते हम जितना चल सकते हैं, वह हमारी आजादी है। बाकी सब विधि का विधान है।और भीऔर भी

बढ़ती मुद्रास्फीति ने आखिरकार रिजर्व बैंक को बेचैन कर ही दिया और उसने आज, शुक्रवार को ब्याज दरें बढ़ाकर मांग को घटाने का उपाय कर डाला। रिजर्व बैंक ने तत्काल प्रभाव से रेपो दर (रिजर्व बैंक से सरकारी प्रतिभूतियों के एवज में रकम उधार लेने की ब्याज दर) 5.25 फीसदी से बढ़ाकर 5.50 फीसदी और रिवर्स रेपो दर (रिजर्व बैंक के पास धन जमा कराने पर बैंकों को मिलनेवाली ब्याज दर) 3.75 फीसदी से बढ़ाकर 4 फीसदीऔरऔर भी

इस साल भी दालों की महंगाई घटने के आसार नहीं हैं क्योंकि इस साल पिछले साल की बनिस्बत कम क्षेत्रफल में दलहन की बोवाई की गई है। कृषि मंत्रालय को राज्यों से मिले आंकड़ों के अनुसार 2 जुलाई 2010 तक देश भर में 5.15 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में दलहनी फसलें बोई गई हैं, जबकि साल भर पहले 2 जुलाई 2009 तक दलहन का बोवाई रकबा 5.18 लाख हेक्टेयर था। इस तरह इस साल 3000 हेक्टेयर कम रकबेऔरऔर भी

रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज लिमिटेड (आरएनआरएल) का विलय रिलायंस पावर में होगा। अनिल अंबानी समूह की इन दोनों कंपनियों की तरफ से शेयर बाजार बंद होने के बाद जारी बयान में बताया गया है कि इस सिलसिले में उनके निदेशक बोर्डों की अलग-अलग बैठक रविवार, 4 जुलाई को होगी। इसमें आरएनआरएल के रिलायंस पावर में विलय को मंजूरी दी जाएगी। लेकिन बाजार में इसकी सुगबुगाहट पहले ही शुरू हो गई थी। इसके चलते रिलायंस पावर के शेयर मेंऔरऔर भी

ज्यादातर उस्ताद यही कह रहे हैं कि बाजार आज शुक्रवार को भारी बिकवाली का शिकार हो गया। लेकिन हम इससे सहमत नहीं हैं। हमारा तो कहना है कि जब सारी दुनिया से बुरी खबरें आ रही थीं, तब भी बाजार (निफ्टी) ने खुद को 5240 अंक पर टिकाए रखा। अगले हफ्ते मेटल सेक्टर के शेयर स्टार परफॉर्मर होंगे। चाहे जो भी हो जाए, मेटल शेयरों में जल्दी ही कम से कम 25 फीसदी बढ़त होनी तय है।औरऔर भी

खानों के विकास और खनन अधिकारों से जुड़े नए विधेयक के प्रारूप पर मंत्रियों का समूह 22 जुलाई को चर्चा करेगा। यह जानकारी खान सचिव संता शीला नायर ने राजधानी दिल्ली में शुक्रवार को संवाददाताओं को दी। लेकिन सूत्रों के मुताबिक खान मंत्रालय के आला अधिकारियों ने कंपनियों की जबरदस्त लॉबीइंग के चलते विधेयक के मूल प्रारूप में ऐसा बदलाव कर दिया है जिससे खनन परियोजना से विस्थापित होनेवाले परिवारों को शाश्वत रूप से आर्थिक सुरक्षा देनेऔरऔर भी