वित्त वर्ष 2010-11 का बजट आज लोकसभा में पास हो गया। लेकिन इससे पहले सरकार ने कॉफी किसानों को कर्ज में राहत, रुई व आयरन ओर निर्यात को महंगा करने, स्टेनलेस स्टील उद्योग को राहत, नए अस्पताओं को कर रियायत और रीयल्टी व कंस्ट्रक्शन उद्योग में सेवा कर में थोड़ी छूट देने का ऐलान कर दिया। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने वित्त विधेयक में नए संशोधनों का प्रस्ताव रखा जिसे ध्वनिमत से पास कर दिया गया। लेकिनऔरऔर भी

इसमें शायद ही कोई दो राय होगी कि विदेश संस्थागत निवेशक (एफआईआई) हमारे शेयर बाजार के प्रमुख खिलाड़ी बन चुके हैं। इतने बड़े कि बाजार उनके पीछे चलता है। एफआईआई अपना निवेश बहुत सोच-समझ कर गहन रिसर्च के बाद करते हैं। ऐसे में यह जानना बहुत महत्वपूर्ण होता है कि वे किन शेयरों में अपना निवेश बढ़ा रहे हैं क्योंकि इन ‘महाजनों’ के पथ पर चलकर आम निवेशक भी उनकी विशेषज्ञता का फायदा उठा सकते हैं। हमारीऔरऔर भी

पिंक पैंथर हॉलीवुड की फिल्म भी है, कार्टून कैरेक्टर भी। पिंक पैंथर-2 में ऐश्वर्या राय भी काम कर चुकी हैं। लेकिन शेयर बाजार की महफिलों में पिंक पैंथर का एक ही नाम है – केतन पारेख। केतन पारेख पर भले ही सेबी ने बैन लगा हो, लेकिन माना यही जाता है कि यह शख्स बाजार में किसी न किसी रूप में बराबर सक्रिय रहता है। केतन ने जितनी भी फर्में बनाईं, ज्यादातर के नाम में पैंथर शब्दऔरऔर भी

सेटलमेंट से पहले अतिशय डर के कारण कल बाजार में कुछ ज्यादा ही ऊंच-नीच हो गई। समस्या नजरिए के साथ नहीं थी। समस्या थी अप्रैल के साथ-साथ मई के फ्यूचर्स में आपकी देनदारी की। आपके ब्रोकर कल ही आपको जिबह कर चुके थे तो आज बाजार या निफ्टी में और कमजोरी आने का कोई कारण नहीं था। मैं अब भी इसी सोच पर कायम हूं कि निफ्टी 5440 के स्तर पर पहुंचेगा। मैं यह भी मानता हूंऔरऔर भी

देश में आर्थिक सुधारों के लागू होने के लगभग दो दशक बाद भी हमारे शेयर बाजार में पूंजी नहीं बनती, नोट बनते हैं। बाजार में रोज के कारोबार का औसतन 75 फीसदी हिस्सा फ्यूचर्स व ऑप्शंस के डेरिवेटिव सौदों से आता है। डेरिवेटिव कांट्रैक्ट वास्तविक शेयरों की छाया की तरह होते हैं, जिनके बदले शेयर भी लिए जा सकते हैं। लेकिन अपने यहां अब भी इनका निपटान नोट में किया जाता है। भौतिक डिलीवरी का फैसला हालऔरऔर भी

मस्तिष्क हर पल समस्याओं का हल खोजने में लगा रहता है, जबकि मान्यताओं  व रूढ़ियों से बनी मानसिकता उसे खींचती रहती है। तरक्की वही लोग कर पाते हैं जिनका मस्तिष्क मानसिकता को हराता रहता है।और भीऔर भी

जीईआई इंडस्ट्रियल सिस्टम्स भोपाल की कंपनी है और औद्योगिक मशीनरी बनाती है जिसमें खास हैं मशीनों को ठंडा रखने के उपकरण। वह दुनिया में एयर कूलिंग सिस्टम बनानेवाली तीसरी बड़ी कंपनी है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के बी ग्रुप में उसके शेयर आते हैं। उसकी चुकता पूंजी 16.62 करोड़ रुपए है तो जाहिर है वह स्मॉल कैप कंपनी की श्रेणी में आएगी। कंपनी ने कल ही अपने शानदार नतीजे घोषित किए हैं। मार्च 2010 में खत्म चौथीऔरऔर भी