देश में 9 राज्य को-ऑपरेटिव बैंक और 191 केंद्रीय को-ऑपरेटिव बैंक अभी भी बिना लाइसेंस के चल रहे हैं। चौंकानेवाली बात यह है कि दशकों से भारी संख्या में ऐसी सहकारिता संस्थान बगैर किसी बैंकिंग लाइसेंस के चलते रहे हैं। लेकिन वित्तीय क्षेत्र आकलन समिति ने सिफारिश की थी कि 2012 के बाद किसी भी को-ऑपरेटिव बैंक को बगैर लाइसेंस लिए काम न करने दिया जाए। इसी के बाद रिजर्व बैंक ने तय किया कि वह उनऔरऔर भी

पिछले तीन साल के दौरान देश में दालों का उत्पादन करीब 140 लाख टन से 148 लाख टन के बीच ठहरा हुआ है, जबकि इस अवधि में दालों की अनुमानित मांग 170 लाख टन से 180 लाख टन रही है। इस तरह देश में हर साल 30-40 लाख टन दाल की कमी पड़ती है। वर्ष 2008-09 के में दाल उत्पादन 145 लाख टन था, जो 2009-10 में 147 लाख टन हो गया। यानी साल भर में दालऔरऔर भी

आप में और मुझ में क्या अंतर है? मैं जो हो रहा है, उसे देखता हूं, समझता हूं और उसके हिसाब से सलाह देता हूं, जबकि आप सलाह मिलने के बाद भी वही करते हैं जो स्क्रीन बताता है। थोड़े में कहूं तो आपको अपने ही ऊपर भरोसा नहीं है। जब बाजार 300 अंक गिर गया तो आप निचले भावों पर खरीद के बजाय बाजार के दबाव में आ गए और घाटा खाकर भी शेयर बेच डाले।औरऔर भी

सुप्रीम कोर्ट ने यूलिप विवाद पर पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी द्वारा दायर याचिका पर विचार करने के बाद केंद्र सरकार और 14 जीवन बीमा कंपनियों को औपचारिक नोटिस जारी कर दिया है। कोर्ट में इस मामले पर आज एकदम थोड़ी देर के लिए सुनवाई हुई। यह सुनवाई जस्टिस सरोश होमी कपाडिया की अध्यक्षता वाली खंडपीठ कर रही है। बता दें कि कल सेबी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की है कि इस विवादऔरऔर भी

अब यह किसी अटकल या सूत्रों के हवाले मिली खबर की बात नहीं है। यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस पॉलिसी (यूलिप) की गड़बड़ियों और उस पर अधिकार पर साफ-सफाई के लिए पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गई है। भारत के एटॉर्नी जनरल जी ई वाहनवती के कार्यालय ने इसकी पुष्टि कर दी है और यह भी कहा है कि सेबी की याचिका पर सुनवाई खुद देश के चीफ जस्टिस के जी बालाकृष्णन की अध्यक्षता वालीऔरऔर भी

ऊपर वाला सब पर बराबर मेहरबान रहता है। सूरज चाहे भी तो किसी को कम या ज्यादा धूप कैसे दे सकता है!! हमें मिल नहीं पाता तो इसमें दोष खुद हमारा या हमारे सामाजिक तंत्र का है।और भीऔर भी

वित्त वर्ष 2010-11 का बजट आज लोकसभा में पास हो गया। लेकिन इससे पहले सरकार ने कॉफी किसानों को कर्ज में राहत, रुई व आयरन ओर निर्यात को महंगा करने, स्टेनलेस स्टील उद्योग को राहत, नए अस्पताओं को कर रियायत और रीयल्टी व कंस्ट्रक्शन उद्योग में सेवा कर में थोड़ी छूट देने का ऐलान कर दिया। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने वित्त विधेयक में नए संशोधनों का प्रस्ताव रखा जिसे ध्वनिमत से पास कर दिया गया। लेकिनऔरऔर भी

इसमें शायद ही कोई दो राय होगी कि विदेश संस्थागत निवेशक (एफआईआई) हमारे शेयर बाजार के प्रमुख खिलाड़ी बन चुके हैं। इतने बड़े कि बाजार उनके पीछे चलता है। एफआईआई अपना निवेश बहुत सोच-समझ कर गहन रिसर्च के बाद करते हैं। ऐसे में यह जानना बहुत महत्वपूर्ण होता है कि वे किन शेयरों में अपना निवेश बढ़ा रहे हैं क्योंकि इन ‘महाजनों’ के पथ पर चलकर आम निवेशक भी उनकी विशेषज्ञता का फायदा उठा सकते हैं। हमारीऔरऔर भी

पिंक पैंथर हॉलीवुड की फिल्म भी है, कार्टून कैरेक्टर भी। पिंक पैंथर-2 में ऐश्वर्या राय भी काम कर चुकी हैं। लेकिन शेयर बाजार की महफिलों में पिंक पैंथर का एक ही नाम है – केतन पारेख। केतन पारेख पर भले ही सेबी ने बैन लगा हो, लेकिन माना यही जाता है कि यह शख्स बाजार में किसी न किसी रूप में बराबर सक्रिय रहता है। केतन ने जितनी भी फर्में बनाईं, ज्यादातर के नाम में पैंथर शब्दऔरऔर भी

सेटलमेंट से पहले अतिशय डर के कारण कल बाजार में कुछ ज्यादा ही ऊंच-नीच हो गई। समस्या नजरिए के साथ नहीं थी। समस्या थी अप्रैल के साथ-साथ मई के फ्यूचर्स में आपकी देनदारी की। आपके ब्रोकर कल ही आपको जिबह कर चुके थे तो आज बाजार या निफ्टी में और कमजोरी आने का कोई कारण नहीं था। मैं अब भी इसी सोच पर कायम हूं कि निफ्टी 5440 के स्तर पर पहुंचेगा। मैं यह भी मानता हूंऔरऔर भी