अनिश्चितता में फंसा शेयर बाज़ार गिर रहा होता है तब तलहटी और उभार की भविष्यवाणी करना बड़ा आसान लगता है। लेकिन इतने सारे अनजान कारक सक्रिय होते हैं कि कोई भविष्यवाणी काम नहीं करती। ऐसे में सतर्क रहते हुए सक्रियता घटाने के विकल्प पर गौर करना चाहिए। लेकिन दिक्कत यह है कि बाज़ार में हमेशा ऐसे ट्रेडर मिल जाते हैं जो अनिश्चितता की थाह लेने और उससे पार पाने में कहीं ज्यादा सुलझे होते हैं। बाज़ार मेंऔरऔर भी

जीवन के तमाम क्षेत्र हैं जहां जमकर मेहनत करो तो अच्छे नतीजे मिलते हैं। पढ़ाई से लेकर खेल तक में कठिन-कठोर प्रयास व अभ्यास से ज्यादा सफलता मिलती है। लेकिन शेयर बाज़ार के निवेश व ट्रेडिंग में अक्सर ऐसा नहीं होता। वहां तो अनिश्चितता की भंवर में ज्यादा हाथ-पैर मारने पर आप डूब सकते हैं। फिर भी कुछ बावले होते हैं जो मानते हैं कि वे बाज़ार या स्टॉक्स की तहलटी पकड़ने में माहिर है और वहांऔरऔर भी

आगे क्या होगा, कोई पक्के तौर पर नहीं जानता। शेयर बाज़ार यह सच बार-बार, हर बार साबित करता रहता है। सौ सालों की सबसे भयंकर महामारी साल 2020 से 2021 तक दुनिया को जकड़े रहे। लेकिन इस दौरान शेयर बाज़ार 50% से ज्यादा बढ़ गए। हमारे यहां तो निफ्टी मार्च 2020 में 7600 तक गिरने के बाद अक्टूबर 2021 में 18500 तक चला गया। जिस आपदा ने अर्थव्यवस्था को चूर-चूर कर दिया, उस दौरान निफ्टी-50 सूचकांक 143.42%औरऔर भी

शेयर बाज़ार में आशाओं और उम्मीदों का दौर खत्म। अब हर तरफ अनिश्चितता और चिंता छा गई है। यूक्रेन पर रूस के हमले का पांचवां दिन। फाइनेंस की दुनिया के केंद्र अमेरिका में मुद्रास्फीति चार दशकों के शिखर पर। जहां से भारत जैसे देशों में जमकर सस्ता धन आता है, वहां का केंद्रीय बैंक मौद्रिक नीति को कठोर बनाकर धन को महंगा करने जा रहा है। मार्च में ही ब्याज दरें बढ़ाने की योजना है। आर्थिक विकासऔरऔर भी

रूस ने 31 साल पहले तक अपने ही सोवियत संघ का हिस्सा रहे यूक्रेन पर भीषण हमला कर दिया है। यूक्रेन की सेनाएं भी लड़-मर रही हैं। यूरोप रूस के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंध लगाने की तैयारी में है। अमेरिका ने नाटो के दम पर चेतावनी दी है कि रूस को जबाव देना पड़ेगा। लेकिन रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने ललकारा है कि अगर कोई भी रूस भिड़ने की जुर्रत करेगा तो उसे इतिहास का भंयकरतम परिणाम भुगतान पड़ेगा।औरऔर भी

आशावाद के बाद बाज़ार में अभी अनिश्चितता का आलम है। जहां बेहतरी की कहानियां शेयर बाज़ार में लालच की भावना को हवा देती रहीं, वहीं अनिश्चितता भय को बढ़ाती जा रही है। बाज़ार से लालच की भावना भाग चुकी हैं। कभी यूक्रेन पर रूस के हमले और जवाब में अमेरिकी कार्रवाई के खतरे तो कभी अमेरिका में ब्याज दर बढ़ाए जाने की आशंका के नाम पर बाज़ार में बिकवाली बढ़ जाती है। इसमें भारत ही नहीं, दुनियाऔरऔर भी

शेयर बाज़ार में हर दिन ट्रेडरों के बीच जो गुत्थम-गुत्था चलती है, उसमें जान डालने के लिए माहौल बनाना पड़ता है। ऐसा माहौल जो लोगों की लालच व भय की भावना को भरपूर हवा दे। साल 2020 और 2021 में हर तरफ कहानियां फैलाई गईं कि अर्थव्यवस्था सुधर रही है। कोई कहता कि V के आकार में अर्थव्यवस्था उठ रही है, कोई कहता W के आकार में तो कोई कहता कि K के आकार में। हमारी अर्थव्यवस्थाऔरऔर भी

शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग में भाव लालच और भय की भावनाओं से तय होते हैं। लेकिन लालच और भय की इन भावनाओं को कहां से हवा व गति मिलती है? फिर चुनावों का संदर्भ लेते हैं। उत्तर प्रदेश में धारणा बनाई जा रही है कि समाजवादी पार्टी आ गई तो गुड़ों का राज होगा, सभी असुरक्षित, एक ही परिवार का डंका बजेगा। सामने से कहा जा रहा है कि भाजपा झूठ ही झूठ बोलती है, किसान विरोधीऔरऔर भी

चुनावों का मौसम है। बढ़-चढ़कर दावे किए जा रहे हैं। पक्ष-विपक्ष दोनों नहीं जीत सकते। लेकिन दोनों का दावा कि सामनेवाले का सूपड़ा साफ हो जाएगा। अवाम की भावनाओं को हवा दी जा रही है। शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग भी इसी तरह भावनाओं का खेल है। निवेश के सबसे बड़े गुरु बेंजामिन ग्राहम का मशहूर कथन है कि शेयर बाज़ार छोटे समय में वोटिंग मशीन की तरह काम करता है और लम्बे समय में तराजू का। उनकेऔरऔर भी

हिसाब बड़ा साफ है। अगर आप नौकरी से महीने में एक लाख रुपए की सैलरी हासिल कर रहे हैं तो शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग या किसी अन्य बिजनेस से एक लाख कमाते हैं तब असल में माना जाएगा कि आपके उद्यम का तुलनात्मक ‘आर्थिक मूल्य’ शून्य हुआ, यानी आप पहले जैसी ही स्थिति में बने हुए हैं। अगर ट्रेडिंग से आप महीने में 40-50 हज़ार रुपए कमा लेते हैं (जो बुरी कमाई नहीं है), तब आप प्रतिमाहऔरऔर भी