एफआईआई का नज़रिया है बेहद छोटा

जनवरी में एफआईआई के बेचने से आईटी व हेल्थकेयर कंपनियों के शेयर गिरते रहे, जबकि फरवरी में उनकी बिकवाली का दबाव आईटी कंपनियों पर कहर बरपाता रहा। पिछले दो महीनों के दौरान विदेशी संस्थाओं ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) में जमकर मुनाफावसूली की। इसका साफ असर एचडीएफसी जैसी मजबूत कंपनियों के शेयरों तक पर पड़ा। एफआईआई को लगता है कि रिजर्व बैंक नए वित्त वर्ष 2022-23 में 6-8 अप्रैल को होनेवाली पहली मौद्रिक समीक्षा में ब्याज दर बढ़ा देगा। इससे एनबीएफसी और बैंकों के प्रदर्शन पर बुरा असर पड़ेगा। इसलिए वे अभी से इन क्षेत्रों में मुनाफावसूली कर रहे हैं। नतीजतन, फाइनेंस व बैंकिंग सूचकांक में रह-रहकर भूचाल आ जाता है तो निफ्टी व सेंसेक्स भी हिल जाते हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…

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