नतीजों का दौर अपने उफान पर है। जैसे ही दिसंबर तिमाही का नतीजा आता है, कंपनी के शेयरो में हलचल मच जाती है। उम्मीद के मुताबिक रहे तो बिकवाली चलती है और खराब रहे तो ज्यादा ही निराशा छा जाती है। टीसीएस की बिक्री 33% बढ गई। लेकिन विश्लेषकों की अपेक्षा से कम थी तो उसके शेयर खटाक से 5.6% गिर गए। बीस महीनों में टीसीएस की सबसे तीखी गिरावट। ऐसी गहमागहनी के बीच बढ़ते हैं आगे…औरऔर भी

अच्छी चीज़ों के पीछे दुनिया भागती है। बस, पता नहीं होता कि अच्छी चीजें हैं कौन-सी। पता भी होता है तो भरोसा नहीं होता कि क्या वो चीज़ वाकई अच्छी है। एक छोटी-सी आईटी कंपनी है। टेलिकॉम व हेल्थकेयर उद्योग को सॉफ्टवेयर बेचती है। आपको यकीन नहीं आएगा कि बुधवार को उसके बारे में सुगबुगाहट शुरू हुई और अगले दो दिनों में ही उसका शेयर 22.82% बढ़ चुका है। तथास्तु में इसी कंपनी को पकड़ने की सलाह…औरऔर भी

इसे लिक्विडिटी कहें या सस्ते विदेशी धन का प्रवाह। इसी ने अमेरिका व जापान समेत दुनिया भर के शेयर बाज़ारों को चढ़ा रखा है। इसका अर्थव्यवस्था की मूल ताकत से खास लेनादेना नहीं। कुल विश्लेषक इसे अमेरिकी केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व द्वारा किया गया मैनिप्युलेशन बता रहे हैं। लेकिन शेयर बाज़ार में धनबल के दम पर ऐसी धांधली चलती रहती है। जब सरकारें तक इसमें लगी हों तो इसे कौन रोक सकता है! अब शुक्र की दिशा…औरऔर भी

कोल इंडिया ने प्रति शेयर 29 रुपए का अंतरिम लाभांश घोषित किया तो बाज़ार खुलने के कुछ ही पलों में उसका 6.56% बढ़कर 307.85 रुपए पर पहुंचना स्वाभाविक था। क्या आप जानते हैं कि इस डिविडेंड के लिए रिकॉर्ड तिथि भले ही 20 जनवरी हो, लेकिन यह 17 जनवरी से एक्स-डिविडेंड हो जाएगा। अगर आज आपने इसे खरीद लिया तभी आप लाभांश के हकदार होंगे। शुक्र को यह सीधे 29 रुपए नीचे खुलेगा। अब गुरु की चाल…औरऔर भी

ट्रेडिंग के लिए भावों की दशा-दिशा को कायदे से पढ़ना ज़रूरी है। पर इससे भी ज्यादा ज़रूरी है अपने मनोभावों को पढ़ना। मान लीजिए, आपने कोई स्टॉक पूरी गणना के बाद यह सोचकर खरीदा कि वो यहां से बढ़ेगा। लेकिन वो गिरने लगता है। आपका दिल डूबने लगता है। आप सोचते हैं कि जैसे ही यह उठकर ऊपर आएगा, आप बेचकर निकल लेंगे। दूसरे भी यही सोचते हैं। बेचनेवालों की भरमार, खरीदनेवाले नदारद। अब आज की ट्रेडिंग…औरऔर भी

जिस तरह ओस की बूंदों से प्यास नहीं बुझती, उसी तरह ट्रेडिंग में हर शेयर की तरफ भागने से कमाई नहीं होती। जिस तरह आपका अपना व्यक्तित्व है, उसी तरह हर शेयर का खास स्वभाव होता है। अपने स्वभाव से मेल खाता एक भी स्टॉक चुन लेंगे तो वो आपका फायदा कराता रहेगा। तमाम कामयाब ट्रेडर पांच-दस से ज्यादा स्टॉक्स में ट्रेड नहीं करते। इसलिए वही-वही नाम देखकर बोर होने की ज़रूरत नहीं। अब मंगल का ट्रेड…औरऔर भी

ट्रेडिंग का मकसद है खरीदने-बेचने का ऐसा चक्कर चलाना ताकि हमारे खाते में बराबर धन आता रहे। इसके दो खास तरीके हैं। दोनों के तौर-तरीके अलग हैं। स्विंग ट्रेड में पांच-दस दिन के लिहाज से एक-दो सौदे करते हैं और रिस्क रिवॉर्ड अनुपात 1:3 से ज्यादा रखते हैं। वहीं इंट्रा-डे में नियम है कि दिन में कम से कम दस सौदे करने चाहिए और न्यूनतम रिस्क रिवॉर्ड अनुपात 1:2.5 का होना चाहिए। अब नए हफ्ते का आगाज़…औरऔर भी

नामी ब्रोकरेज फर्म है। ईनाम भी बटोरे हैं। पैसे व बुद्धिमत्ता की बात करती है। उसने 26 दिसंबर को नए साल के लिए दस कंपनियां पेश की। अडानी पोर्ट, कैयर्न, एस्कोर्ट्स, क्रॉम्प्टन, एस्सेल प्रोपैक, महिंद्रा एंड महिंद्रा, पीएनबी, सेसा स्टरलाइट, टोरेंट फार्मा व विप्रो। इनमें से आठ में घाटा है। हमने तब से दो कंपनियां बताईं ल्यूपिन और टेक सोल्यूशंस। दोनों फायदे में हैं। यह है किसी ब्रोकर व निष्पक्ष सलाह का फर्क। अब आज की कंपनी…औरऔर भी

हमारी सोच में कुछ जन्मजात दोष हैं, जिनको दूर किए बगैर हम ट्रेडिंग में कतई कामयाब नहीं हो सकते। चूंकि अपने यहां इन सोचगत व स्वभावगत दोषों को दूर करने की कोई व्यवस्था नहीं है और सभी इस खामी का फायदा उठाकर कमाना चाहते हैं तो हम में ज्यादातर लोग घाटे पर घाटा खाते रहते हैं। किसी को हमें घाटे से उबारने की नहीं पड़ी है। पूंजी बाज़ार नियामक संस्था, सेबी बड़ी-बड़ी बातें ज़रूर करती है, लेकिनऔरऔर भी

आपने पतंग उड़ाई होगी या गौर से किसी को उड़ाते हुए देखा होगा तो आपको पता होगा कि पहले ढील देकर फिर अचानक डोर को खटाखट खींचकर कैसे सामनेवाले की पतंग काट दी जाती है। शेयर बाज़ार में नतीजों के दौरान उस्ताद लोग ऐसा ही करते हैं। इसलिए कम रिस्क उठाकर ट्रेडिंग करनेवालों नतीजों के दिन उस स्टॉक से दूर रहना चाहिए। उस्तादों की लड़ाई में कूदने की बहादुरी का कोई मतलब नहीं। अब शुक्रवार की ट्रेडिंग…औरऔर भी