तथास्तु की यह सेवा जब पेड नहीं थी, तब भी हम यहां अच्छी व संभावनामय कंपनियों में निवेश की सलाह देते रहे हैं। ठीक दो साल पहले हमने यहां इनफोसिस में निवेश की सलाह दी थी। तब उसका शेयर 2865 रुपए पर था। अभी वो 3575 की ऊंचाई पर है। दो साल में 33% से ज्यादा बढ़त। यह है अच्छी कंपनियों में सही वक्त पर निवेश का कमाल। आज इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी से ही जुड़ी एक स्मॉलकैप कंपनी…औरऔर भी

यह ट्रेडिंग की दुनिया है। यहां हर कोई मिलने पर हालचाल से पहले यही पूछता है कि बाज़ार कहां जा रहा है, निफ्टी कहां जाएगा। हालांकि उसके पास इसका अपना जवाब भी होता है। बस, वह आपसे उसकी पुष्टि करना चाहता है। बड़ी मुश्किल से इक्का-दुक्का लोग मिलते हैं जो कहते हैं कि बाज़ार कहीं भी जाए, इससे हमें क्या फर्क पड़ता है। हम तो ट्रेडर हैं। हमारा काम ज्योतिषी की तरह भविष्यवाणी करना नहीं, कमाना है।औरऔर भी

बाज़ार कल दोपहर दो बजे तक ठीकठाक चल रहा था। निफ्टी सुबह-सुबह 6350 के ऊपर जाकर कमोबेश उसी रेंज में चल रहा था। तभी अचानक तेज बिकवाली का झटका आया और निफ्टी 1.28% की गिरावट के साथ दिन के न्यूनतम स्तर के करीब 6221.15 पर बंद हुआ। निफ्टी में शामिल 50 से मात्र छह स्टॉक्स बढ़े। बाकी सब धराशाई। पूरे बाज़ार में 299 बढ़े, 893 गिरे, 32 जस के तस। आखिर ये क्यों हुआ? देखते हैं आगे…औरऔर भी

हिंडाल्को व टाटा स्टील कभी अच्छी कंपनियां थीं। उनका कैश फ्लो अच्छा था। पर जब से इन्होंने बिजनेस मॉडल बदला, बड़े बड़े अधिग्रहण करने लगीं तो इन पर ऋण का बोझ बढ़ता और पूंजी पर रिटर्न घटता गया। बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक इन्होंने बीते बीस सालों में निवेशकों को इत्ता भी रिटर्न नहीं दिया कि महंगाई की भरपाई हो सके। सो, टेक्निकल के साथ फंडामेंटल को भी देखना ज़रूरी है। अब आज की ट्रेडिंग…औरऔर भी

यूं तो परिचित हैं हज़ारों। पर काम के दोस्त अक्सर 40-50 से ज्यादा नहीं होते। दरअसल इससे ज्यादा ज़रूरत भी नहीं। इसी तरह निवेश व ट्रेडिंग में हमें अपने व्यक्तित्व के हिसाब से स्टॉक्स चुनने चाहिए। ज्यादा से ज्यादा 40 कंपनियों में निवेश हो तो उनका अलग-अलग रिस्क कटकर मिट जाता है। ट्रेडिंग के लिए भी 20 स्टॉक्स बहुत होते हैं। इनसे गहरी पहचान हो तो कमाना आसान हो जाता है। अब करें नए साल-2014 का आगाज़…औरऔर भी

लोग सटीक ट्रेडिंग टिप्स के चक्कर में 25,000 रुपए/माह, साल के तीन लाख तक लुटाते हैं। ऊपर से दो लाख का घाटा। फिर रोते हैं कि हाय! मेरे पांच लाख गए। पहले तो टिप्स के चक्कर में पड़ने के बजाय ट्रेडिंग की पद्धति पकड़नी चाहिए। दूसरे, दस में सात सौदे भी गलत निकलें, तब भी आप हर महीने फायदा कमा सकते हैं। फॉर्मूला इतना-सा है कि रिस्क/रिटर्न अनुपात न्यूनतम 1:3 का रखें। अब 2013 की आखिरी ट्रेडिंग…औरऔर भी

शेयर/कमोडिटी में रोज़ाना लाखों लोग ट्रेडिंग करते हैं। इनमें 95% घाटा खाते हैं और 5% कमाते हैं। कारण, 5% प्रोफेशनल ट्रेडर हैं जो बुद्धि से ट्रेड करते हैं और बाकी 95% आम ट्रेडर भावना से। पहले को ख्याल रहता है कि सामने से कौन ट्रेड मार रहा है। दूसरे को होश नहीं कि आखिरकार सामने है कौन। किसी की टिप या अपने मन/इंट्यूशन से वो सौदा करता है। खुदा-न-खास्ता कभी कमाया तो आगे सब स्वाहा। अब आगे…औरऔर भी

साल या सालगिरह हमें समीक्षा का मौका देती है ताकि हम आत्ममुग्धता से ऊपर उठकर आनेवाली चुनौतियों को पकड़ सकें। आप जानते ही हैं, अवसर अक्सर चुनौतियों की शक्ल में सामने आते हैं। साल का आखिरी तथास्तु लिखते हुए हमें खुशी है कि हमने अब तक 38 में से 32 सलाहों में यह सेवा लेनेवालों का फायदा कराया है। अफसोस ज़रूर है कि बाकी छह में घाटा क्यों हुआ? लेकिन यही है अनिश्चितता और रिस्क। अब आगे…औरऔर भी

हालांकि शेयर बाज़ार में निवेश भी एक तरह की ट्रेडिंग है। फर्क बस चंद दिन, महीने और साल का है। फिर भी चूंकि साल का अंत है और तमाम ब्रोकर फर्में 2014 के टॉप-पिक्स जहां-तहां फेंकने लगी हैं तो सोचा कि हम भी आज निवेश की जांच-परख कर लें। आज हम तथास्तु में बताई गई ऐसी पच्चीस कंपनियों की सूची पेश कर रहे हैं जिन्होंने चंद महीनों में औसतन 25% से ज्यादा रिटर्न दिया है। इसमें अधिकतमऔरऔर भी

बड़ी सलाहकार फर्म है। इंट्रा-डे सलाह के 5000 रुपए महीना लेती है। डेरिवेटिव्स व फॉरेक्स में भी मार करती है। आजमाने के लिए कल मैंने उनकी सलाह ली। इंट्रा-डे में उन्होंने वोल्टास, टाटा मोटर्स व यूनियन बैंक को चुना। स्टॉप-लॉस की नौबत नहीं आई, पर तीनों लक्ष्य से रहे दूर। फिर भी आखिरी एसएमएस में उन्होंने ठोंका कि इन तीन कॉल्स में दिन की कमाई 4153 रुपए। कैसे और कितनी पूंजी पर? सोचते हुए बढ़ते हैं आगे…औरऔर भी