शेयर बाजार में क्या थोक भाव होता है? जिस भाव पर देशी-विदेशी वित्तीय संस्थाएं, म्यूचुअल फंड व प्रोफेशनल ट्रेडर कोई स्टॉक खरीदते हैं, वही उसका थोक भाव है और जिस भाव पर उसे निकालते हैं, वह उसका रिटेल भाव। संस्थाओं का यह व्यवहार भावों के रोजाना और साप्ताहिक चार्ट पर आसानी से दिख जाता है। मौजूदा भाव से ठीक पहले भाव जहां से चढ़े और गिरे थे, ये दोनों स्तर बड़े अहम हैं। अब बुधवार की बुद्धि…और भीऔर भी

वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग मूलतः किसी भी अन्य व्यापार से अलग नहीं है। व्यापार में हम थोक भाव में खरीदते और रिटेल भाव पर बेचते हैं। इसी में 5-10 प्रतिशत मार्जिन कमा लेते हैं। यही काम शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग में करना है। फटाफट धन कमाने की लालच से दूर हटकर हमें यह धारणा मन में कहीं गहरे बैठा लेनी चाहिए। तभी हम हर पल उठते-गिरते इस बाज़ार से नियमित कमाई कर सकेंगे। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

देखते-ही-देखते साल 2019 खत्म होने को आ गया और नया साल 2020 दस्तक देने लगा। यह सप्ताह नए और पुराने साल का संधिकाल है। दो दिन पुराने साल में ट्रेडिंग और तीन दिन नए साल में। बुधवार को बुद्धि के दिन से नए साल का आगाज़ हो रहा है। यह एक बहाना है कि हम भावनाओं को किनारे रख वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग को बुद्धि के स्तर पर आत्मसात कर लें। आइए, अब देखें सोमवार का व्योम…औरऔर भी

अर्थनीति कभी सच को नज़रअंदाज़ नहीं करती। लेकिन हमारी मौजूदा राजनीति का हाल गजब है कि वह झूठ पर ही फल-फूल रही है। हकीकत स्वीकार लेने से उसकी तौहीन होती है। अन्यथा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐसा नहीं कह सकते थे कि पांच साल पहले देश की अर्थव्यवस्था तबाह हो रही थी जिसे उनकी सरकार ने संभाल लिया। वे स्वीकार करने को तैयार नहीं कि आज आर्थिक विकास की स्थिति बदतर हो चुकी है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

बाज़ार बढ़ने का मतलब कतई यह नहीं कि यहां हर कोई माने बैठा है कि हमारी अर्थव्यवस्था और कॉरपोरेट क्षेत्र की हालत बहुत अच्छी चल रही है। सच्चाई से किसी का इनकार नहीं। लेकिन चूंकि इफरात धन सीमित स्टॉक्स का पीछा कर रहा है तो उनके भाव बढ़ते जा रहे हैं और निफ्टी व सेंसेक्स नया ऐतिहासिक शिखर बना रहे हैं। पिछले कुछ हफ्तों से विदेशी संस्थाओं ने भी खरीद बढ़ा दी है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

कहा जा सकता है कि शेयर बाज़ार पूरी अर्थव्यवस्था का नहीं, बल्कि कॉरपोरेट क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है, वह भी केवल ढाई-तीन हज़ार लिस्टेड कंपनियो का। इसमें भी जिन शीर्ष सूचकांकों से हम बाज़ार की स्थिति मापते हैं, उनमें तो 30 से लेकर 50 कंपनियां ही शामिल हैं। इनके शेयर चढ़ रहे हैं तो शेयर बाज़ार चढ़ता दिखाई देता है, जबकि बाकी छोटी व मझोली कंपनियों के शेयर डूबते ही जा रहे हैं। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

अर्थव्यवस्था के साथ-साथ हमारे कॉरपोरेट क्षेत्र की हालत भी खस्ता चल रही है। यह हकीकत रिजर्व बैंक की एक ताज़ा रिपोर्ट में स्वीकार की गई है। इस रिपोर्ट में मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र की 2696 कंपनियो का लेखा-जोखा लिया गया है। उसका कहना है कि इन कंपनियों का शुद्ध लाभ सितंबर 2019 की तिमाही में साल भर पहले से 54.3% कम रहा है। इसकी सीधी वजह उनके उत्पादों की मांग का काफी घट जाना है। अब सोमवार की दृष्टि…औरऔर भी

अपना स्वभाव समझना, अपनी भावनाओं का तंत्र जानना और शेयर बाजार के काम करने के तरीके व उसके पीछे के मनविज्ञान को समझना। इसी में छिपा है यहां से कमाने का सूत्र। साथ ही टेक्निकल एनालिसिस के कैंडल के रूप, उसके स्थान के महत्व, कुछ मूविंग औसत व आरएसआई जैसे चुनिंदा संकेतकों की भाषा समझनी पड़ती है। यह रॉकेट साइंस जैसा कठिन काम नहीं, बल्कि आसान है। सब कुछ साधा जा सकता है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग से नियमित कमाना है तो बिजनेस चैनल देखने की आदत छोड़नी पड़ेगी। किसी स्टॉक में ट्रेडिंग के लिए रिटेल ट्रेडर को जितनी जानकारी चाहिए, वह उसके भावों में जज्ब होती है। इनसाइडर या अंदरूनी सूचनाओं पर आधारित ट्रेडिंग को छोड़ दें तो संस्थाएं भी भावों और उसके पीछे के मनोविज्ञान को समझ ट्रेड करती है। हम भी इस मनोविज्ञान को समझ लें तो बाज़ार से बराबर कमा सकते हैं। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

ट्रेडिंग के लिए बाहर की सलाहें तभी तक ज़रूरी होती हैं, जब तक आपका आत्मविश्वास नहीं बन जाता। उसी तरह जैसे बच्चों की साइकिल में सीखते समय पीछे के पहिए के अगल-बगल दो छोटे पहिए लगे होते हैं। आत्मविश्वास जमने के बाद किसी एक्सपर्ट की सलाह की दरकार नहीं होती। गांठ बांध लीजिए कि अचूक सलाह देने का दावा करनेवाले दरअसल सलाह बेचने का धंधा कर रहे हैं, आपको फायदा पहुंचाने का नहीं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी