पिछली नहीं, खेलती है भावी चंचलता
ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट का भाव तो बाजार निर्धारित करता है। लेकिन व्यवहार में देखें तो भाव बेचनेवाले तय करते हैं, खरीदनेवाले नहीं। फिर भी रिटेल ट्रेडर के पास यह सुविधा होती है कि वह अपने अध्ययन व समझ से यह परख सकें कि बाज़ार में चल रहा ऑप्शन का भाव सही है या नहीं। अगर उसके भाव बढ़ाकर रखे गए हैं तो वह बिना लालच में फंसे उससे दूर रह सकता है और किसी वजह से वाजिब याऔरऔर भी



