शेयर बाज़ार में निवेश के दो तरीके हैं। पहला, कहीं किसी से, जान-पहचान वाले या टीवी पर एनालिस्ट से सुन लिया तो दांव लगा दिया। यह एक तरह की सट्टेबाज़ी है जो 100% नुकसान ही नुकसान करती है। आज देश के करीब दो करोड़ डीमैट खातों में से आधे से ज्यादा निष्क्रिय क्यों पड़े हैं? दूसरा तरीका है वैल्यू इनवेस्टिंग। इसमें कंपनी की अंतर्निहित ताकत को देखकर निवेश किया जाता है। तथास्तु में अब आज की कंपनी…औरऔर भी

ऐसा क्यों कि कंपनी गर्त में जा रही होती है और उसके प्रवर्तकों की मौज बढ़ती रहती है? सुज़लॉन एनर्जी की वित्तीय हालत और उसके शेयर की दुर्गति आप जानते होंगे। छह साल में शेयर 446 से 9.70 रुपए पर आ चुका है। लेकिन उसके प्रवर्तक तुलसी तांती ने अपनी सालाना तनख्वाह दो करोड़ से बढ़ाकर सीधे तीन करोड़ कर ली! हमें ऐसे प्रवर्तकों की कंपनियों से दूर रहना चाहिए। अब तथास्तु में आज एक लार्जकैप कंपनी…औरऔर भी

लालच के भाव से शेयर बाज़ार में कतई पैसा न लगाएं। नहीं तो घात लगाए शिकारी कभी भी आपका शिकार कर सकते हैं। निवेश का मूल मकसद है कि हम अपनी बचत को महंगाई/मुद्रास्फीति की मार से बचाएं और लंबे समय में दौलत बना सकें। इसलिए मोटामोटी नियम यह है कि जब शेयर बाज़ार सस्ता हो तो ज्यादा निवेश उसमें करें। चढ़ा हुआ हो तो ज्यादा धन एफडी-बांड वगैरह में लगाएं। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

कल क्या होगा, कोई नहीं जानता। भावी अनिश्चितता कोई मिटा नहीं सकता। यह शाश्वत सच है। सदियों से चला आ रहा है। लेकिन आज के जमाने में फर्क यह पड़ गया है कि अनिश्चितता को नाथने के साधन आ गए हैं, खासकर फाइनेंस के क्षेत्र में। बीमा यही तो करती है। इसी तरह स्टॉक्स में निवेश अगर लार्जकैप, मिडकैप व स्मॉलकैप में बांटकर किया जाए तो जोखिम बहुत घट जाता है। तथास्तु में आज एक मिडकैप स्टॉक…औरऔर भी

बच्चों की पढ़ाई से लेकर रिटायरमेंट की योजना काफी पहले से बनानी होती है। आप जो भी बचाते हैं, उसे मुद्रास्फीति खोखला न कर दे, इसका भी इंतज़ाम करना होता है। यह आप तब तक नहीं कर सकते, जब तक बचत का 20-30% हिस्सा स्टॉक्स में नहीं लगाते क्योंकि कंपनियां ही आपको 12-15% रिटर्न दे सकती हैं। वो भी तब, जब आप सुरक्षित व मजबूत कंपनियों का चयन करें। तथास्तु में आज ऐसी ही कुछ चुनिंदा कंपनियां…औरऔर भी

हर दिन राजनीति में नया बवाल। कतई साफ नहीं कि 2014 में देश में किसकी सरकार बनेगी। बहुतेरे निवेशक भविष्य की इस अनिश्चितता को लेकर परेशान हैं। पर सच यह है कि आखिरकार काम-धंधा और व्यापार ही राजनीति पर हावी पड़ते हैं। अगर भरोसा हो कि भारतीय अर्थव्यवस्था को अभी बहुत आगे जाना है तो निवेश के आकर्षक मौके मौजूद हैं। आज एक ऐसा ही मिड कैप स्टॉक पेश है जो आपका धन दोगुना कर सकता है…औरऔर भी

जिस चीज़ की मांग न हो, उसका आप कितना भी ढिढोरा पीट लें, वो चीज़ और उसे बनानेवाली कंपनी बाज़ार में कभी टिक नहीं सकती। लेकिन जिस चीज़ की जबरदस्त मांग हो और कोई कंपनी बहुत सलीके से उसे बराबर बना रही हो, उसको जमने से कोई रोक नहीं सकता। आज तथास्तु में लंबे निवेश के लिए पेश है ऐसी ही एक कंपनी। इस कंपनी का बिजनेस मॉडल बड़ा मजबूत है। लेकिन है यह एक लार्ज-कैप कंपनी…औरऔर भी

शेयर बाज़ार भले ही पिछले हफ्ते मंगल को छोड़कर हर दिन बढ़ा हो। पर सच यही है कि हमारी अर्थव्यवस्था की हालत अच्छी नहीं है। फिर, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बांड खरीद घटने या रुकने से भारत समेत दुनिया भर के बाज़ार गिर सकते हैं। ऐसी सूरत में हमें उन्हीं कंपनियों में निवेश करना चाहिए जो मूलभूत रूप से काफी मजबूत हैं और बदतर हालात में भी अच्छी कमाई करती हैं। तथास्तु में ऐसी ही एक कंपनी…औरऔर भी

ठीक आज की तारीख को साल भर पहले इसी कॉलम में हमने नैटको फार्मा में निवेश की सलाह दी थी। तब उसका शेयर 340 रुपए चल रहा था। इसके बाद 20 दिसंबर 2012 को वो 505 रुपए तक चला गया और अभी 430 रुपए चल रहा है। इतना नीचे आने के बाद भी 26.47 फीसदी का रिटर्न। यह है शेयर बाज़ार में अच्छी कंपनियों में निवेश का फायदा। इसे कहते हैं कंपनी के बढ़ने के साथ निवेशऔरऔर भी

कैस्ट्रॉल इंडिया का शेयर इस साल जनवरी से लेकर कल तक 26.76 फीसदी बढ़ चुका है। इसी दौरान सेंसेक्स 12.08 फीसदी बढ़ा है। लेकिन कैस्ट्रॉल शायद बाजार से आगे रहने का यह क्रम आगे जारी न रख सके। कारण, तीन दिन पहले सोमवार को घोषित मार्च तिमाही के उसके नतीजे अच्छे नहीं रहे हैं। इस दौरान जहां उसकी बिक्री 4.13 फीसदी बढ़कर 781.7 करोड़ रुपए पर पहुंची है, वहीं शुद्ध लाभ 10.03 फीसदी घटकर 122.9 करोड़ रुपएऔरऔर भी