सरकारें आती रहीं, जाती रहीं। हमारी अर्थव्यवस्था जिस रफ्तार से बढ़ी, उससे ज्यादा रफ्तार से शेयर बाज़ार बढ़ा। बीते 39 सालों में बीएसई सेंसेक्स 305 गुना से ज्यादा बढ़ा है। इसने उन सभी लोगों को दौलत बनाने का मौका दिया, जिन्होंने समझदारी से अच्छी कंपनियों में लंबे समय के लिए निवेश किया। हमें भी यही रास्ता अपनाना चाहिए और चुनावी तमाशे व टीवी चैनलों पर मचे शोर से दूर रहना चाहिए। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

सारा देश चुनावों के राग में डूबा हुआ है। हर तरफ राजनीति का शोर। लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि अभी तक हमारी अर्थव्यवस्था राजनीति की परवाह किए बिना बढ़ती रही है और उसी से जुड़ा है हमारा शेयर बाज़ार। हालांकि इधर चुनाव नतीजों की अनिश्चितता के बीच बाज़ार में छोटी कंपनियों के शेयर ज्यादा ही गिर गए हैं। लेकिन अनिश्चितता के हटते ही उनके उठने की भरपूर संभावना है। तथास्तु में आज ऐसी ही एक कंपनी…औरऔर भी

भारत में उद्यमशीलता की कोई कमी नहीं। हमारे नगरों-महानगरों की छोटी-छोटी गलियों में आपको इसकी झलक मिल जाती है। न जाने कितने चरणों में अपना माल बनवाकर छोटी कंपनियां बडे ग्राहकों तक पहुंचाती हैं। यही छोटी कंपनियां एक दिन बड़ी बन जाती हैं तो उनके मूल्य का कोई ठिकाना नहीं रहता। हम आज तथास्तु में ऐसी ही एक छोटी से बड़ी बनी कंपनी लेकर आए हैं जिसने आठ साल में आठ गुना से ज्यादा रिटर्न दिया है…औरऔर भी

सेवा के लिए बनी राजनीति आज देश में जबरदस्त मुनाफा कमानेवाला धंधा बन गई है। लेकिन क्या इस क्षेत्र में कंपनियां बनाकर लिस्ट करवा दी जाए तो उनका मूल्यांकन बहुत ज्यादा होगा? नहीं, क्योंकि राजनीति के धंधे में पारदर्शिता नहीं है और जहां पारदर्शिता नहीं है, वहां मूल्यांकन नहीं हो सकता। हालांकि इससे इतर तमाम धंधे हैं जहां पारदर्शिता और अच्छी कमाई दोनों ही हैं। उनमें निवेश लाभ का सौदा है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

अगर आप शेयर बाज़ार में यह सोचकर निवेश कर रहे हैं कि बराबर हर साल मुनाफा कमाते रहेंगे तो यह भ्रम फौरन मन से निकाल दीजिए। हकीकत यह है कि यहां बड़े से बड़े दिग्गज़ निवेशकों को भी घाटा खाना पड़ता है। बीते साल 2018 में अपने यहां जिस तरह मिडकैप व स्मॉल-कैप शेयरों की अंधाधुंध धुनाई हुई है, उसमें अधिकांश धुरंधर निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो पर घाटा सहना पड़ा है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में निवेश करना बहुत रिस्की है। फिर भी देश में लगभग 4.14 करोड़ लोग फिलहाल यह रिस्क उठा रहे हैं। साथ ही म्यूचुअल फंड में निवेश करनेवालों के खातों की संख्या 8.91 करोड़ पर पहुंच चुकी है। ज़रूरी नहीं कि इन सबके पास ज़रूरत से ऊपर इफरात धन हो। हालांकि शेयर बाज़ार मूलतः उन्हीं लोगों के लिए है जिनका धन इसमें डूब भी जाए तो खास फर्क नहीं पड़ता। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

इधर कुछ दिनों से स्मॉल और मिडकैप कंपनियों के शेयरों में जान आ गई लगती है। लेकिन पिछले 13 महीनों में बीएसई स्मॉल-कैप सूचकांक लगभग 35% और मिडकैप सूचकांक 25% लुढ़क चुका है। इस दौरान अच्छी-खासी कंपनियों के शेयरों ने आम निवेशकों को रुला डाला। लेकिन कंपनी अगर अच्छी है तो पछताने के बजाय उसमें खरीद बढ़ा देने में कोई हर्ज नहीं है। समझिए कि यह आपके धैर्य की परीक्षा है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

लंबे निवेश के लिए कभी-कभी लंबा इंतज़ार करना पड़ता है क्योंकि कंपनी लाख अच्छी व संभावनामय हो, लेकिन उसमें सुरक्षित मार्जिन का ध्यान न रखा और महंगे भाव पर निवेश कर दिया तो अच्छा रिटर्न मिलना बहुत मुश्किल हो जाता है। इसलिए हमें कंपनी के शेयर के गिरकर सुरक्षित दायरे में आने का इंतज़ार करना पड़ता है। यह इंतज़ार कुछ महीने से लेकर कुछ साल तक का हो सकता है। आज तथास्तु में ऐसी ही एक कंपनी…औरऔर भी

कुछ कंपनियां निवेशकों की दुश्मन होती हैं। ताम-झाम दिखाकर या ऑपरेटरों का जाल फैलाकर निवेशकों से धन झटकती हैं। फिर प्रवर्तक तो मौज करते हैं, जबकि कंपनियां सारा मूल्य चट कर जाती हैं। हमारे पुराने पाठक सीएनआई रिसर्च की सुझाई सूर्यचक्र पावर को लेकर ज़रूर ऐसे सदमे में होंगे। लेकिन कुछ कंपनियां अपने शेयरधारकों का मूल्य हमेशा बढ़ाती रहती हैं। उनका प्रबंधन कभी निवेशकों को गच्चा नहीं देता। आज तथास्तु में कुशल प्रबंधनवाली ऐसी ही एक कंपनी…औरऔर भी

इस समय 400 से ज्यादा स्मॉल-कैप कंपनियों के शेयर 52 हफ्तों की तलहटी पकड़ चुके हैं। इसमें बहुत-सी अच्छी व मजबूत कंपनियां हैं। आठ साल पहले 2011 में भी ऐसी ही स्थिति आई थी। लेकिन उनके शेयर तेज़ी से उठे थे। इस बार भी देर-सबेर ऐसा होना है क्योंकि लंबे समय में शेयरों के भाव कंपनियों के धंधे के अनुरूप चलते हैं। यह विज्ञान है, जबकि उन्हें चुनना एक कला है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी