अर्थव्यवस्था की लटें शिव की जटाओं की तरह उलझी हुई हैं। एक लट खुलते ही गंगा बह निकलती है। अर्थव्यवस्था की लटें भी जितनी अच्छी तरह खोली जाएं, देश में विकास की गंगा उतनी ही बेधड़क बहने लगती है। हर साल बजट इन्हीं लटों को खोलने का काम करता है। देखना यह है कि पांच साल के कदमताल के बाद मोदी सरकार नए कार्यकाल के पहले बजट में क्या करती है। तथास्तु में एक और संभावनामय कंपनी…औरऔर भी

बड़ी व ब्लूचिप कंपनियों के शेयर चढ़ते जा रहे हैं, जबकि स्मॉल व मिडकैप कंपनियों के शेयर ज़मीन से उठ नहीं पा रहे। यह सिलसिला जनवरी 2018 के बाद से बदस्तूर जारी है। खास वजह यह है कि अर्थव्यवस्था के मुश्किल वक्त में निवेशकों को ब्लूचिप कंपनियों में सुरक्षा दिखती है, जबकि छोटी व मझोली कंपनियों में खतरा। लेकिन वक्त सुधरते ही शीर्ष सूचकांकों से बाहर पड़ी कंपनियां भी चमक सकती हैं। तथास्तु में एक संभावनामय कंपनी…औरऔर भी

कंपनियां छोटी से बड़ी बनती हैं। कुछ राज्यों तक सीमित ब्रांड बढ़ते-बढ़ते बड़े ब्रांडों तक का अधिग्रहण कर लेते हैं और कंपनी अचानक क्षेत्रीय से राष्ट्रीय बन जाती है। उद्योग में एक तरीका अंदर से धीरे-धीरे बढ़ने का है जिसे ऑर्गेनिक या कार्बनिक विकास कहते हैं। दूसरा तरीका इन-ऑर्गेनिक विकास या अधिग्रहण का है। आज हम तथास्तु में ऐसी कंपनी पेश कर रहे हैं जो अधिग्रहण के जरिए बढ़ी है और उसकी भावी रणनीति भी यही है।औरऔर भी

अर्थव्यवस्था की विकास दर वित्त वर्ष 2018-19 में पांच सालों में सबसे कम रही है। कृषि की विकास दर मात्र 2.9% है, जबकि पिछले साल 5.9% रही थी। मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र सुस्ती का शिकार है। शेयर बाज़ार में लिस्टेड 1619 कंपनियों का समग्र शुद्ध लाभ मार्च 2019 की तिमाही में साल भर पहले से कम रहा है। लेकिन शायद दबने के बाद अब उठने का दौर शुरू हो रहा है। तथास्तु में आज उठने को तैयार एक कंपनी…औरऔर भी

मोदी सरकार के दोबारा सत्ता में आने के बाद शेयर बाज़ार में नई तेज़ी आ गई है। निफ्टी 12,000 और सेंसेक्स 40,000 के पार जा चुका है। यह तेज़ी जारी रह सकती है, बशर्ते कंपनियों का ईपीएस (प्रति शेयर लाभ) बढ़ने लगे। अभी तक पी/ई अनुपात का जलवा छाया रहा है। कंपनियों का मुनाफा नहीं बढ़ा तो बाज़ार कभी भी भरभराकर गिर सकता है। तथास्तु में आज अपने उद्योग में औरों से बेहतर काम कर रही कंपनी…औरऔर भी

राजनेता अपनी ताकत चुनावों में जनता के वोट पाकर हासिल करते हैं। जनता के बम्पर वोट मिलने से ही उनकी ताकत कई गुना बढ़ जाती है। लिस्टेड कंपनियां भी शेयर बाजार के ज़रिए निवेशकों से पूंजी, साख व ताकत हासिल करती हैं। साख व ताकत बढ़ने से उनके शेयर का मूल्य बढ़ता है। इससे कंपनी के साथ उसके शेयरधारकों को भी लाभ मिलता है और दोनों साथ-साथ जीतते चले जाते हैं। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

शेयर बाज़ार से आप ज्यादा रिटर्न महज इसलिए नहीं कमाते कि आपने बहुत जटिल बिजनेस मॉडल वाली कंपनी में निवेश किया है। कंपनी ऐसी होनी चाहिए जिसका बिजनेस मॉडल आपको अच्छी तरह समझ में आ जाए। साथ ही उसके धंधे में एंट्री बैरियर इतना तगड़ा होना चाहिए कि दूसरा आसानी से घुस न पाए। वह एक-एक कदम भी बढ़ती रही तो काफी है, दस कदम की छलांग लगाने की ज़रूरत नहीं। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में छाए मौजूदा उन्माद व सन्निपात के बीच तमाम मजबूत व अच्छी कंपनियां सबकी नज़रों से ओझल पड़ी हैं। अगर ऐसी कंपनियों की सही शिनाख्त कर ली जाए तो वे निवेशकों के लिए दौलत बनाने व बढ़ाने का काम कर सकती हैं। सामान्य निवेशकों के लिए ऐसे मौके शानदार तोहफा लेकर आते हैं। इन्हें पकड़ने के लिए ज़रूरी है कि हम शोर के बीच सच का सूत्र पकड़ लें। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

चुनावों ही नहीं, शेयर बाज़ार तक में छवि का बड़ा महत्व है। नहीं तो दो रुपए का पानी बिसलेरी बनकर बीस रुपए में नहीं बिकता। सामान्य माल जब ब्रांडेड उत्पाद बनता है तो उसके विज्ञापन पर होनेवाले खर्च से कहीं ज्यादा मुनाफा कंपनी को मिलने लगता है। कोकाकोला या पेप्सी इसके नायाब उदाहरण हैं। निवेश लायक कंपनियां चुनते वक्त हमें उनके ब्रांडों की ताकत का भी ध्यान रखना चाहिए। आज तथास्तु में ऐसे ही दमखम वाली कंपनी…औरऔर भी

शेयर बाज़ार लंबे समय में झांकियों पर नहीं, ठोस तथ्यों पर चलता है। लगने और होने भी फर्क है। हमें लगता है कि मोदीराज में शेयर बाज़ार जमकर बढ़ा है। लेकिन हकीकत यह है कि मई 2014 से अप्रैल 2019 तक बीएसई सेंसेक्स की सालाना चक्रवृद्धि दर 10.1% रही है, जबकि जून 2004 से मई 2009 तक यह दर 27.1% और जून 2009 से मई 2009 के बीच 12.3% रही थी। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी