यूं तो ममता बनर्जी का रेल बजट सिर्फ राजनीति का झुनझुना भर है। 85 पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) परियोजनाओं की घोषणा भी बहुत बढ़ी-चढ़ी लगती है। लेकिन इससे यह संकेत जरूर मिलता है कि भारतीय रेल निजीकरण की दिशा में बढ़ रही है। आज ही आई आर्थिक समीक्षा ने आम बजट को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। राजकोषीय घाटे को जीपीजी के 4.8 फीसदी पर लाना दिखाता है कि सरकार अपने खजाने को चाक-चौबंद करने के प्रतिऔरऔर भी

उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। बजट से पहले केवल एक कारोबारी दिन बचा है। लेकिन बाजार में छाई निराशा सुरसा के मुंह की तरह विकराल होती जा रही है। निफ्टी आज साढ़े तीन फीसदी से ज्यादा गिरकर 5242 तक चला गया। सेंसेक्स भी 600 अंक से ज्यादा गिरकर 17,560 तक पहुंच गया। हालांकि बंद होते-होते बाजार थोड़ा संभला है। इस गिरावट के पीछे खिलाड़ियों के खेल अपनी जगह होंगे। लेकिन ट्रेडर और निवेशक अब नए फेरऔरऔर भी

बाजार तलहटी पकड़ चुका है। निराशा अपने चरम पर पहुंच चुकी है। निवेशक फिलहाल स्टॉक्स से कन्नी काट रहे हैं। इनमें भी जो छोटे निवेशक हैं वे डेरिवेटिव सेगमेंट में मार्क टू मार्केट की अदायगी के लिए जो कुछ भी पास में है, उसे बेचे जा रहे हैं। मैं कल आम निवेशकों के मूड का पता लगाने के लिए गुजरात में तीन छोटी जगहों पर गया था। मैंने पाया कि यह बात उनके मन में कहीं गहरेऔरऔर भी

रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) और बीपी के बीच हुआ करार बाजार का रुख मोड़ देनेवाला विकासक्रम है। लेकिन ट्रेडर और निवेशक अब भी रिलायंस के कंसेट ऑर्डर पर सेबी के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। यह मसला अगर सुलझ गया तो कम से कम रिलायंस में कॉरपोरेट गवर्नेंस को लेकर तमाम एफआईआई की धारणा पटरी पर आ सकती है। अब जाकर आखिरकार मैं वित्त मंत्रालय की तरफ से शेयर बाजार को कुछ घरेलू सहयोग या सहारा देनेऔरऔर भी

बाजार इस समय एकदम दुरुस्त चल रहा है और जो भी छोटी-मोटी समस्या है, वह किसी और चीज की वजह से नहीं, बल्कि रोलओवर के चलते पैदा हुई है। बाजार के यह हफ्ता काफी अहम है। रेल बजट और आर्थिक समीक्षा पर इसी हफ्ते आनी है। हमें इन पर कायदे से गौर करने की जरूरत है। 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच जेपीसी से कराने का मसला तो सुलझ ही चुका है। इसलिए संसद का गतिरोध खत्म हुआऔरऔर भी

बजट सत्र शुरू हो रहा है। इसमें ऐसे सूत्र आने जा रहे हैं जो कई महीनों से शेयर बाजार को परेशान करनेवाली चिंताओं और समस्याओं का समाधान निकालने का सबब बनेंगे। बाकी क्या कहें? एफआईआई और उनके एजेंटों ने हमेशा की तरह इस बार भी आम निवेशकों को गच्चा दिया। बाजार (निफ्टी) जब 5200 पर पहुंच गया तो उन्होंने हल्ला मचवा दिया कि अभी इसमें 10-15 फीसदी और गिरावट आनी है। निवेशक घबराकर बेचकर निकलने लगे इसऔरऔर भी

बाजार 5200 से उठकर 5585 पर चला गया। यह बड़े राहत की बात है, तेजी का आगाज है। उम्मीद थी कि बाजार सांस लेने के लिए थोड़ा थमेगा क्योंकि यह 200 दिनों के मूविंग एवरेज (डीएमए) के काफी करीब पहुंच चुका है। लेकिन अगर यह जोश और वोल्यूम के साथ 200 डीएमए को पार कर जाता है तो 60 दिनों के भीतर 6500 की मंजिल पकड़ लेगा। इसलिए ऐसा हो, इससे पहले कुछ मुनाफावसूली लाजिमी हो गईऔरऔर भी

बजट में नए आर्थिक सुधारों के बारे में प्रधानमंत्री के दावे ने बाजार पर अपना असर दिखा दिया। यह वो मूलाधार है जिस पर सारे देश और निवेशक समुदाय को पूरा यकीन होना चाहिए। इस हकीकत के मद्देनजर बाजार को पहले तो गिरकर 5200 तक जाना ही नहीं चाहिए था। लेकिन ऐसा हुआ तो उसकी वजह चालबाजी या जोड़तोड़ है और, बाजार में जोड़-तोड़ की कोई काट तो है नहीं। मंदड़ियों का कार्टेल अकेले दम पर बाजारऔरऔर भी

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आज बुधवार को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के संपादकों के साथ हुई प्रेसवार्ता में हाल में उठी हर चिंता और मुद्दों पर बेबाक राय दी है। उनकी बातों से संकेत मिलता है कि आनेवाला बजट कठोर होगा, पर लोक-लुभावन उपायों के साथ। बजट कठोर होगा प्रशासन की कमियों, कालेधन और मुद्रास्फीति जैसी समस्याओं पर, जबकि वह नरम होगा टैक्स के मोर्चे पर ताकि आम आदमी के पास मुद्रास्फीति से लड़ने के लिए ज्यादा आमदनी बचऔरऔर भी

बाजार में 800 अंकों के सुधार का मतलब यह नही है कि अंधेरा खत्म, मुसीबत टल गई। हम जैसे ही यह सोचते हैं कि सब कुछ पटरी पर आ गया है, उससे पहले ही बिकवाली का नया झोंका सब कुछ फिर से पटरा कर देता है। कल मैं एक बिनजेस चैनल पर कार्यक्रम देख रहा था जहां कुछ ज्ञानी लोग एक सर्वेक्षण पर बहस कर रहे थे जिसका निष्कर्ष यह था कि देश के 97 फीसदी लोगऔरऔर भी