देश के अधिकांश निवेशक भले ही गुजरात, महाराष्ट्र व राजस्थान में हों, लेकिन सरकार की 400 करोड़ रुपए की निवेशक शिक्षा एवं सुरक्षा निधि (आईईपीएफ) में पंजीकृत 100 एनजीओ में से सबसे ज्यादा 19-19 एनजीओ तमिलनाडु व उत्तर प्रदेश के हैं। उ.प्र. में कानपुर में वीरेंद्र जैन द्वारा संचालित मिदास टच इन्वेस्टर्स एसोसिएशन ही काम का है। बाकी कुछ छंटे हुए नाम। अवध समाज सेवा संस्थान (अंबेडकरनगर), आदर्श सेवा संस्थान (बाराबंकी), चित्रकूट सेवा आश्रम (चित्रकूट), कृष्ण जनकल्याणऔरऔर भी

सरकारी कंपनी पावर ग्रिड कॉरपोरेशन के एफपीओ (फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर) को आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति की मंजूरी मिल गई है। यह एफपीओ कंपनी चालू वित्त वर्ष 2010-11 में ही लाएगी। इसके तहत वह 10 फीसदी नए शेयर जारी करेगी, जबकि सरकारी हिस्सेदारी से 10 फीसदी पुराने शेयर बेचे जाएंगे। कंपनी का आईपीओ (शुरुआती पब्लिक ऑफर) सितंबर-अक्टूबर 2007 में 52 रुपए प्रति शेयर के मूल्य पर आया था। इस समय उसका शेयर 101.45 रुपए चल रहा हैऔरऔर भी

सी अच्युतन कमिटी की तरफ से पेश किए गए नए टेकओवर कोड को अपनाने में अभी वक्त लगेगा। यह भी संभव है कि पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी 31 अगस्त तक प्रतिक्रियाएं मिलने के बाद इसमें फेरबदल कर दे। लेकिन अगर इसकी मूल सिफारिशों को अपना लिया गया तो इससे देश की कम से कम 76 बड़ी सूचीबद्ध कंपनियों के विदेशी अधिग्रहण का खतरा बढ़ जाएगा। ब्रोकर फर्म एसएमसी कैपिटल्स के एक अध्ययन के अनुसार बीएसई-500 मेंऔरऔर भी

पिछले साल अक्टूबर में भारतीय रिजर्व बैंक ने अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) से जो 200 टन सोना खरीदा था, वह उसके लिए बहुत फायदे का सौदा साबित हुआ है। आईएमएफ से खरीदते वक्त सोने का भाव 1045 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस (31.1034768 ग्राम) था, जबकि इस 9 जुलाई को यह 1212 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस रहा है। इसलिए केवल सोने की बदौलत 9 जुलाई तक के सबसे ताजा आंकड़ों के मुताबिक रिजर्व बैंक के विदेशी मुद्रा भंडार मेंऔरऔर भी

भारत सरकार के कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय ने निवेशकों को खींचने के लिए देश में व्यापक अभियान चला रखा है। इसके तहत उसने 12-17 जुलाई तक एक निवेशक सप्ताह भी मनाया। इसी दौरान उसने छोटी-सी पुस्तिका छपवाई है जिसका शीर्षक है – ए बिगिनर्स गाइड टू द कैपिटल मार्केट। इसमें बहुत सारी बातों के अलावा निवेश के बीस मंत्र सुझाए गए हैं, जिसमें से चौथा मंत्र आईपीओ (शुरुआती पब्लिक ऑफर) में निवेश को लेकर है, जिसे जानकर किसीऔरऔर भी

बीमा नियामक संस्था, आईआरडीए (इरडा) ने प्रस्ताव रखा है कि लोगों को झांसा देकर बीमा पॉलिसी बेचनेवाले एजेंट का लाइसेंस रद्द किया जा सकता है। तमाम बीमा कंपनियों की बहुत-सी पॉलिसियों का नवीनीकरण न होने की बढती समस्या के कारण इरडा ने यह प्रस्ताव किया है। बीमा नियामक का प्रस्ताव है कि अगर किसी एजेंट द्वारा बेची गई 50 फीसदी पॉलिसियों का सालाना नवीकरण नहीं होता है तो उस एजेंट का लाइसेंस रद्द कर दिया जाए। इरडाऔरऔर भी

विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई), एलआईसी और म्यूचुअल फंड हमारे बाजार के बड़े खिलाड़ी हैं। रिलायंस समूह का ऑपरेटिंग तंत्र धीरूभाई के जमाने से ही सक्रिय है। लेकिन सात अन्य बड़े ऑपरेटर हैं जिनके हाथ बड़े लंबे हैं, जिन पर सेबी हाथ नहीं रख पाती। ये हैं – आरजे (राकेश झुनझुनवाला), केपी (केतन पारेख उर्फ पिंक पैंथर उर्फ वन मैन आर्मी), आरके/जीएस (राधाकृष्ण दामाणी उर्फ ओल्ड फॉक्स), आरडी (रमेश दामाणी),  एके (अजय कयान), एमएम (मनीष मारवाह) और एडीऔरऔर भी

यह सच है कि हाथी के दांत दिखाने के और, खाने के और होते हैं। लेकिन यह बात मुझे अभी-अभी पता चली है कि हमारे पूंजी बाजार में भी ऊपर-ऊपर जो दिखाया जाता है, हकीकत उससे काफी जुदा होती है। जैसे, यह कि बहुत सारी कंपनियों के आईपीओ फंडेड होते हैं। इस अर्थ में ही नहीं कि उनमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशन खरीदार (क्यूआईबी), एंकर इनवेस्टर और एचएनआई पहले से ही इश्यू के मर्चेंट बैंकर से बातचीत के बादऔरऔर भी

बीमा नियामक संस्था, आईआरडीए (इरडा) पॉलिसीधारकों के हितों से जुड़े नियमों में बदलाव की तैयारी में जुट गया है। इस सिलसिले में उसने नए संशोधित नियमों का प्रारूप पिछले महीने की 18 तारीख को जारी किया था, जिस पर सभी संबंधित पक्षों से 5 जुलाई तक प्रतिक्रिया व सुझाव मांगे गए थे। अब सारे सुझावों के मिल जाने के बाद इरडा की कोशिश है कि नए नियमों को जल्दी से जल्दी कानूनी स्वरूप दे दिया जाए। हालांकिऔरऔर भी