जो लोग जीवन को रंगमंच कहते हैं वे या तो खुद भ्रम में हैं या झूठ बोलते हैं। जीवन तो युद्ध क्षेत्र है और हम सभी योद्धा। यहां सिर्फ प्रतिभा ही काफी नहीं। युद्ध कौशल के लिए निरंतर अभ्यास व अनुशासन जरूरी है।और भीऔर भी

हम भिन्न हैं तभी तो हम हैं। नहीं तो सांचे से निकली ईंट और हम में फर्क ही क्या रहता। जो इस भिन्नता को समझता है और इससे होनेवाली तकरार को प्रोत्साहित करता है, वही अच्छी व कारगर टीम बना सकता है।और भीऔर भी

आज के जरूरी खर्च हम कल पर नहीं टाल सकते और कल का निवेश आज रोक नहीं सकते क्योंकि उपभोग तो आज की जरूरत पूरा करने के लिए ही है जबकि निवेश आज की नहीं, कल की सोचकर आज किया जाना है।और भीऔर भी

हर काम को अपना ही समझ कर करना चाहिए। पराया समझ कर करते हैं तो बोझ लगता है, किसी पर किया गया एहसान लगता है। वैसे भी सच तो यही है कि हम अपने अलावा और किसी पर एहसान नहीं करते।और भीऔर भी

चीजें छोटी-छोटी करके ही बड़ी बनती हैं, तिल-तिल कर बढ़ती हैं। गर्भ में भ्रूण धीरे-धीरे आकार लेता है। औरों को कई महीने बाद पेट का आकार देखकर पता चलता है, लेकिन मां तो हर पल उसे पलता-बढ़ता देखती है।और भीऔर भी

प्रकृति ने हर जीव को बचाव का कोई न कोई साधन अलग से दे रखा है। शेर को दांत व पंजे, बैल को सींग व खुर तो कीड़े-मकोड़ों को रंग बदलने की क्षमता। इसी तरह इंसान को उसने सोचने की ताकत दे रखी है।और भीऔर भी

डरपोक और कायर होना जीवन का सबसे बड़ा अभिशाप है। ये फितरत हमसे बहुत सारी खुशियां छीन लेती है। बाप-दादा से मिली दौलत तक सीमित रह जाते हैं हम। शास्त्रों तक में कहा गया है वीर भोग्या वसुंधरा।और भीऔर भी

जिंदगी में हताश होकर गिरना बहुत आसान है। लेकिन यह निर्जीव पत्थर का स्वभाव है, जिंदा इंसान का नहीं। हम किसी लिखी-लिखाई स्क्रिप्ट के पात्र भी नहीं हैं। निमित्त या कठपुतली नहीं है हम। सजीव हैं हम।और भीऔर भी

हम भावनाओं के भूखे हैं। सिर्फ लेना चाहते हैं, देना नहीं। ज्ञान में ठीक इससे उलट हैं। सिर्फ देना चाहते हैं लेना नहीं। काश! ज्ञान के मामले में हम शाश्वत भिक्षु बन जाते और भावनाओं के मामले में दानवीर कर्ण। आमीन!और भीऔर भी

सेल्समैन होने में कोई बुराई नहीं। हम सभी सेल्समैन ही तो हैं। बचपन से लेकर बड़े होने तक अपनी बातें, अपनी जिद ही तो बेचते रहते हैं। हां, बस इतना है कि हमको वही बेचना चाहिए जिस पर खुद हमें पूरा यकीन हो।और भीऔर भी