खुला हर रहस्य
प्रकृति हर पल नाना रूपों में अपने ऐसे तमाम रहस्य हमें बताती रहती है जो हमारे खुश रहने के लिए जरूरी हैं। लेकिन हम हैं कि अपने में ही डूबे रहते हैं। बाहर देखते नहीं तो अंदर के कपाट बंद पड़े रहते हैं।और भीऔर भी
सूरज निकलने के साथ नए विचार का एक कंकड़ ताकि हम वैचारिक जड़ता तोड़कर हर दिन नया कुछ सोच सकें और खुद जीवन में सफलता के नए सूत्र निकाल सकें…
प्रकृति हर पल नाना रूपों में अपने ऐसे तमाम रहस्य हमें बताती रहती है जो हमारे खुश रहने के लिए जरूरी हैं। लेकिन हम हैं कि अपने में ही डूबे रहते हैं। बाहर देखते नहीं तो अंदर के कपाट बंद पड़े रहते हैं।और भीऔर भी
जब आप खुद को कर्ता नहीं, निमित्त मानते हैं तो और कुछ हो या न हो, तमाम झंझट व तनाव से बच जाते हैं। आपके अंदर एक तरह की तटस्थता आ जाती है और आप अपना काम ज्यादा शिद्दत से कर पाते हैं।और भीऔर भी
कितने सारे भ्रम हम पाले रहते हैं! औरों के बारे में भ्रम, अपने बारे में भ्रम। नेताओं के बारे में भ्रम, पक्ष के बारे में भ्रम, विपक्ष के बारे में भ्रम। भ्रमों का जाल। संशयात्मा न बनें। पर अविश्वास करना तो सीखें। और भीऔर भी
आपके मानने या चाह लेने से कुछ नहीं होगा। हाय-तौबा मचाना निरर्थक है। पहले जो है, जैसा है, उसे वैसा ही स्वीकार कीजिए। अगली यात्रा वहीं से शुरू होगी। सीमाएं समझकर ही सीमाएं तोड़ी जाती हैं।और भीऔर भी
मां-बाप की उंगली, घर की छांह, कभी नौकरी का साया और फिर भगवान का आसरा। इन बैसाखियों से कभी तो तौबा कीजिए। कभी तो एकदम अनाथ होकर देखिए कि आपका अपना शक्ति-पुंज क्या है!और भीऔर भी
जान भर लेना अपने-आप में पर्याप्त नहीं। लेकिन जानना वह कड़ी है जिससे कर्म की पूरी श्रृंखला खुलती चली जाती है। सच का ज्ञान हमें इतना बेचैन कर देता है कि हम चाहकर भी शांत नहीं बैठ सकते।और भीऔर भी
किसी मूर्ख को आसानी से खुश किया जा सकता है। बुद्धिमान को खुश करना और भी आसान है। लेकिन अपने ‘ज्ञान’ पर मुग्ध लोगों को ब्रह्मा भी खुश नहीं कर सकते। इसलिए इनके मुंह नहीं लगना चाहिए।और भीऔर भी
यूं तो हम सभी अंदर से सूरज की तरह तेजस्वी व मेधावी होते हैं। लेकिन बचपन से लेकर बड़े होने तक जमाने से मिले काले मेघ उसे घेर लेते हैं। चाहें तो हम हर मेघ को मेहनत-मशक्कत से काट सकते हैं।और भीऔर भी
जीत का मतलब यही क्यों होता है कि हम कितनों को पीछे छोड़ आगे निकल गए? जीत का मतलब यह क्यों नहीं होता कि कितने लोगों के साथ हमारा दिल धड़कता है, कितनों का दुख हमें अपना लगता है?और भीऔर भी
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