घातक चुप्पी
बुरे का बोलबाला तभी तक है जब तक अच्छे लोग उदासीन या चुप बैठे रहते हैं। दुनिया में नया ज्ञान, माल व मूल्य तो अच्छे लोग ही लाते हैं। बुरे लोग तो बस उसे इधर-उधर कर लूटते-लपेटते रहते हैं।और भीऔर भी
सूरज निकलने के साथ नए विचार का एक कंकड़ ताकि हम वैचारिक जड़ता तोड़कर हर दिन नया कुछ सोच सकें और खुद जीवन में सफलता के नए सूत्र निकाल सकें…
बुरे का बोलबाला तभी तक है जब तक अच्छे लोग उदासीन या चुप बैठे रहते हैं। दुनिया में नया ज्ञान, माल व मूल्य तो अच्छे लोग ही लाते हैं। बुरे लोग तो बस उसे इधर-उधर कर लूटते-लपेटते रहते हैं।और भीऔर भी
आशा और विश्वास के बिना किसी मंजिल पर नहीं पहुंचा सकता। आशा और विश्वास पूरी यात्रा के दौरान न केवल संतुलन बनाए रखते हैं, बल्कि वे प्रेरणा देते हैं, शक्ति देते हैं और देते हैं – सहनशीलता।और भीऔर भी
जबरदस्ती के रिश्ते गुलामी व एकाधिकार में ही चलते हैं। स्वेच्छा के रिश्ते तभी चलते हैं जब दोनों का फायदा हो। ग्राहक का भी और कंपनी का भी। सिर्फ ग्राहक का फायदा हो तो कंपनी ही बंद हो जाएगी।और भीऔर भी
हम लाख जतन कर लें, भरपूर तैयारी कर लें, फिर भी अनिश्चितता व अनहोनी की गुंजाइश बनी रहती है। यह कमजोरी नहीं, हमारी सीमा है। इसलिए अनहोनी से निपटने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए।और भीऔर भी
दूर के ढोल ही नहीं, भगवान भी सुहाने लगते हैं। पास आकर भगवान पड़ोस में हमारी तरह रहने लगें तो हम उनकी भी बखिया उधेड़ डालें। इसीलिए सत्ता-लोलुप संत और नेता हम से दो गज दूर ही रहते हैं।और भीऔर भी
कोई कितना ही रोके, चलनेवाले तो अपनी मंजिल और मौका तलाश ही लेते हैं। पानी अपनी डगर बना ही लेता है। हमारा काम बस इतना है कि समाज में जंगल की निरंकुशता न पले, अराजकता न चले।और भीऔर भी
खुशी न खाने में है, न सोने में। पीने में थोड़ी-सी है क्योंकि इससे हम अपनी मूल प्रकृति के करीब आ जाते हैं। असली खुशी गुत्थियां सुलझाने में है क्योंकि इससे हम अपने परिवेश के साथ लयकार हो जाते हैं।और भीऔर भी
मैंने कुछ काम वर्ड को, कुछ एक्सेल को दे दिया। कुछ मोबाइल और लैपटॉप को बांट दिया। बाकी जो भी काम यंत्र कर सकते हैं, सभी को धीरे-धीरे बांट दूंगा। फिर मैं फुरसत से घूम-घूमकर दोस्त बनाऊंगा।और भीऔर भी
खिड़की-दरवाजे सारे बंद। फिर भी छिपे से छिपे कोने तक में धूल आ ही जाती है। धूल न भी दिखे तो लाखों जीवाणु घर किए रहते हैं। इसलिए हर दिन सफाई जरूरी है। हर दिन मनन जरूरी है, अध्ययन जरूरी है।और भीऔर भी
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