बाढ़ का पानी
जिस तरह बाढ़ का पानी उतरने के बाद धरती साफ दिखाई देने लगती है और धीरे-धीरे हरियाली फिर से उमगने लगती है, उसी तरह भ्रमों का पानी उतरने के बाद हम भी अंदर से निखरने लगते हैं।और भीऔर भी
सूरज निकलने के साथ नए विचार का एक कंकड़ ताकि हम वैचारिक जड़ता तोड़कर हर दिन नया कुछ सोच सकें और खुद जीवन में सफलता के नए सूत्र निकाल सकें…
जिस तरह बाढ़ का पानी उतरने के बाद धरती साफ दिखाई देने लगती है और धीरे-धीरे हरियाली फिर से उमगने लगती है, उसी तरह भ्रमों का पानी उतरने के बाद हम भी अंदर से निखरने लगते हैं।और भीऔर भी
सत्ता मिलते ही मरतक नेताओं तक के चेहरे चमकने लगते हैं, स्वास्थ्य दमकने लगता है, आयु बढ़ जाती है। सत्ता का यही प्रताप है। जनता को भी सत्ता दे दी जाए तो उसका भी सारा दुख-दारिद्र मिट सकता है।और भीऔर भी
विवेक बघार डाला स्वार्थों के तेल में। आदर्श खा गए! कीचड़ में धंस गए!! अब तक क्या किया, जीवन क्या जिया! बहुत-बहुत ज़्यादा लिया, दिया बहुत-बहुत कम। मर गया देश। अरे, जीवित रह गए तुम!!और भीऔर भी
ज़िदगी तो हम अकेले ही जीते हैं। परिवार इसे आसान व रागात्मक बना देता है। समाज इसे लय व ताल से भर देता है। देश इसे सुरक्षित व उदात्त बना देता है। आखिर कौन हैं वे जो देश को ऐसा बनने नहीं दे रहे?और भीऔर भी
अधूरी ख्वाहिशों की कचोट हमेशा सालती है तब तक, जब तक मंजिल नहीं मिलती। भावनाएं जोर मारती हैं। कुर्बान हो जाने को दिल करता है। इसलिए कि दोस्त! सरकार तो बन गई, मगर देश अभी बाकी है।और भीऔर भी
जो आनेवाले कल के सपने बुनते हुए जीते हैं, उनका आज अस्त-व्यस्त रहना स्वाभाविक है। जो गुजरे कल की नॉस्टैल्जिया में जीते हैं, उनका आज सीलन व घुटन भरा रहना भी उतना ही स्वाभाविक है।और भीऔर भी
छोटी-छोटी बातों में पैटर्न खोजना अच्छी बात नहीं है। पूरे संदर्भ के बिना पैटर्न हमेशा गलत निष्कर्षों या अंधविश्वास की तरफ ले जाते हैं। इसलिए पैटर्न बनता भी है तो उसे संयोग मानकर छोड़ देना चाहिए।और भीऔर भी
मेहनत के बिना कहीं आसमान से कुछ नहीं टपकता। हां, जानवर या मशीन जैसे काम के दाम कम हैं। पर पढ़-लिखकर इंसानी हुनर के माफिक काम करेंगे तो दाम भी ज्यादा मिलेंगे। सीधी-सी बात है।और भीऔर भी
© 2010-2025 Arthkaam ... {Disclaimer} ... क्योंकि जानकारी ही पैसा है! ... Spreading Financial Freedom