इस दुनिया में आए हैं तो बिना रुके बराबर चलना ही पड़ेगा क्योंकि यहां कुछ भी ठहरा नहीं, सब कुछ चल रहा है। सही राह चुन ली, तब भी चलते रहना जरूरी है क्योंकि बीच में ठहर गए तो कुचल दिए जाएंगे।और भीऔर भी

महज रस्से के सहारे तीखे पहाड़ को पार करने की हिम्मत बिरले लोग ही जुटा पाते हैं। उनके जैसा बनने का मंसूबा तो हम नहीं पाल सकते। लेकिन उनके जैसा आत्मविश्वास हम जरूर पाल सकते हैं।और भीऔर भी

सत्ता के सच को कभी सच मानने की गलती नहीं करनी चाहिए। वो अपने काम का ही सच पेश करती है। जब श्रीकृष्ण तक शंख के शोर में अधूरे सच को पूरा सच बना देते हैं तो औरों का क्या भरोसा?और भीऔर भी

अजब तमाशा है ये ज्ञान की दुनिया। बाहर जाओ तो अंदर पहुंचते हो और अंदर पैठो तो बाहर का धुंधलका छंटने लगता है। शायद वही-वही संरचनाएं अंदर से बाहर तक थोड़े-बहुत अंतर के साथ फैली पड़ी हैं।और भीऔर भी

ख्वाब देखें बड़ा। लेकिन बोलें छोटा। होता यह है कि ज्यादातर लोग सपने तो छोटे देखते हैं, पर बोलते हैं बढ़ा-चढ़ाकर। झूठे गुरूर में डूबे ऐसे लोगों को पता ही नहीं चलता कि वे कब जगहंसाई के पात्र बन गए।और भीऔर भी

आप खुद को कितना भी बडा़ तोप-तमंचा समझते रहें, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। फर्क इस बात से पड़ता है कि दूसरे लोग आपके बारे में क्या सोचते हैं और यह सोच खुद नहीं बनती, सायास बनानी पड़ती है।और भीऔर भी

ज़िंदगी हमारी अपनी है। पर धरती हम साझा करते हैं। हवा-धूप साझा करते हैं। दुनिया साझा करते हैं। देश साझा करते हैं। प्रशासन व राजनीतिक तंत्र साझा करते हैं। जो साझा है, उसकी भी तो फिक्र जरूरी है।  और भीऔर भी

पीपल की पत्तियां जरा-सी हवा पर उछलने-कूदने लगती हैं। वहीं बरगद और उसकी पत्तियां बड़े से बड़ा तूफान भी शांति से झेल जाती हैं। लेकिन जीवन में दोनों की अपनी जगह है, अपनी अहमियत है।और भीऔर भी

हम अगर ताज़िंदगी एक ही जगह कदमताल करते रह जाते हैं तो इसके लिए हालात कम, हम ज्यादा दोषी हैं क्योंकि हालात किसी भगवान से नहीं, हमारे जैसे इंसानों से ही बनाए हैं जिनसे हम लोहा ले सकते हैं।और भीऔर भी

समय के साथ होड़ लेने का दावा करना शुद्ध दंभ के सिवा कुछ नहीं। समय के साथ हम संगत बैठा लें, यही काफी है। यह भी हर किसी के बूते में नहीं। बिरले ही इसे हासिल कर पाते हैं, भारी साधना के बाद।और भीऔर भी