देश में डायबिटीज के मरीजों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है। अंतरराष्ट्रीय डायबिटीज फेडरेशन के मुताबिक भारत में 1995 में डायबिटीज के 1.90 करोड़ मरीज थे। 2007 में यह संख्या 4.09 करोड़ हुई और इस साल 2010 में 5.08 करोड़ हो जाने का अनुमान है। चेन्नई के एमवी हॉस्टिपल के ताजा अध्ययन के अनुसार डायबिटीज का हर मरीज साल भर में इसके इलाज पर 25,931 रुपए खर्च करता है यानी सभी मरीजों का सालाना खर्चऔरऔर भी

वित्त राज्यमंत्री एसएस पलनमणिक्कम द्वारा राज्यसभा में दिए गए लिखित उत्तर के मुताबिक दुनिया के तमाम देशों ने अनिवासी भारतीयों के काले धन के बारे में भारत सरकार को जानकारी दे दी है। जर्मनी ने लीस्टेंस्टाइन के एलजीटी बैंक में भारतीय नागरिकों के गुप्त खातों की जानकारी भी दे दी है। इस तरह मिली सारी सूचनाओं के आधार पर चेन्नई, दिल्ली मुंबई और कोलकाता में अभी तक 18 मामलों का एसेसमेंट किया गया है। इनसे जुड़ी कुलऔरऔर भी

पोस्ट ऑफिस के मंथली इनकम स्कीम (एमआईएस) खातों में 8 सालाना ब्याज मिलता है। इसमें किए गए डिपॉजिट के परिपक्व होने पर कुल जमा राशि का 5 फीसदी हिस्सा बतौर बोनस दिया जाता है। पांच साल के टाइम डिपॉजिट खातों में किए गए निवेश पर आयकर की धारा 80-सी के तहत टैक्स छूट मिलती है। पहले इस स्कीम में अधिकतम डिपॉजिट की सीमा एकल खाते में 3 लाख और संयुक्त खाते में 6 लाख रुपए थी। लेकिनऔरऔर भी

भारतीय रेल के पास 10.65 लाख एकड़ जमीन है। इसका 90 फीसदी हिस्सा रेल महकमा खुद के कामकाज में इस्तेमाल करता है। उसकी बाकी 1.13 लाख एकड़ जमीन खाली पड़ी है। रेलवे का कहना है कि इस जमीन का प्राथमिक इस्तेमाल गेज बदलने, फ्रेट कॉरिडोर बनाने व ट्रैक की सर्विसिंग जैसे कामों में किया जाएगा। इससे बची इफरात जमीन का व्यावसायिक उपयोग होगा। इसके लिए बाकायदा साल 2005 में रेल भूमि विकास प्राधिकरण बनाया गया है। वहऔरऔर भी

केंद्र ने बीते वित्त वर्ष 2009-10 में विभिन्न पेट्रोलियम उत्पादों पर कुल 28,789 करोड़ रुपए की सब्सिडी दी, जबकि उसे इन पर विभिन्न टैक्सों से कुल 71,768 करोड़ रुपए मिले। 7755 करोड़ रुपए कस्टम ड्यूटी और 64,013 करोड़ रुपए सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी से। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के मुताबिक राज्यों के कुल राजस्व का 34 फीसदी हिस्सा पेट्रोलियम उत्पादों पर लगे टैक्स से आता है। सब्सिडी के बावजूद 2009-10 में सरकारी तेल कंपनियों की अंडर-रिकवरी 46,051 करोड़औरऔर भी

पिछले आठ सालों में देश की कुल आबादी में निम्न आय वाले परिवारों का हिस्सा घटा है और उच्च आय वाले परिवारों का हिस्सा बढ़ा है। एनसीएईआर के एक ताजा अध्ययन के अनुसार 2001-02 में निम्न आय वाले परिवारों का हिस्सा 34.6 फीसदी था, जो 2009-10 में घटकर 17.9 फीसदी रह गया। इसी दौरान मध्यम आय वाले परिवारों की संख्या 58 फीसदी (14.07 करोड़) से बढ़कर 61.6 फीसदी (22.84 करोड़) हो गई। साथ ही उच्च आय वर्गऔरऔर भी

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स जून 1990 में 850 अंक पर था। जून 2000 में यह 4850 अंक पर पहुंचा और अब जून 2010 में 17,700 अंक पर। इस तरह 20 साल में इसने मूलधन को 20 गुना बढ़ा दिया है। सालाना चक्रवृद्धि दर से देखें तो इसने 1990-2000 के दौरान 18.8 फीसदी और 2000-2010 के बीच 14.1 फीसदी सालाना रिटर्न दिया है। पूरे दो दशकों का औसत सालाना चक्रवृद्धि रिटर्न 16.4 फीसदी का है।औरऔर भी

केंद्र सरकार के पास 30 जून 2010 तक नई खोजों से ताल्लुक रखनेवाले 78,792 पेटेंट के आवेदन लंबित पड़े हैं, जिनमें से करीब एक तिहाई आवेदन मेकैनिकल इंजीनियरिंग व रसायनों से संबंधित हैं। भारतीय पेटेंट कार्यालय के पास इन आवेदनों की परख के लिए उपयुक्त लोग नहीं हैं। अब जाकर 200 नए पद बनाए गए हैं। देश में 2003-04 के बाद पेटेंट आवेदनों की संख्या अचानक बढ़ गई है। साफ है कि सरकार के सहयोग के बिनाऔरऔर भी

हमारी लगभग एक लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था का 40 फीसदी हिस्सा खुदरा बिक्री से आता है। दूसरे शब्दों में जीडीपी में 40,000 करोड़ रुपए का योगदान हमारी रोजमर्रा की खरीद का है। इसका लगभग 94 फीसदी हिस्सा गली-मोहल्लों में फैली किराना दुकानों से आता है और केवल 6 फीसदी हिस्सा ही पैंटालून (बिग बाजार), रिलायंस रिटेल, स्पेंसर, आदित्य बिड़ला रिटेल और भारती के बड़े-बड़े स्टोरों से आता है। मतलब, आसपास की जिन दुकानों को हम दोऔरऔर भी

ऑनलाइन समुदाय देश और राज्य की पारंपरिक सीमाएं तोड़ते जा रहे हैं। गूगल ‘गणराज्य’ के बाद अब सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक बहुत तेजी उभर रही है। इसे इस्तेमाल करनेवालों की संख्या 50 करोड़ तक पहुंच चुकी है। यह संख्या ब्राजील (19.5 करोड़), इंडोनेशिया (23.2 करोड़) और अमेरिका (31 करोड़) की आबादी से ज्यादा है। अगर फेसबुक को आभासी देश मान लें तो यह दुनिया में चीन व भारत के बाद तीसरी सबसे बड़ी आबादी वाला देश बनऔरऔर भी