धारणा, फॉर्मूले के साथ-साथ अभ्यास

बाहरी कृपा से कभी किसी का कल्याण नहीं होता। हमें अपना कल्याण खुद अपनी मेहनत, काम और दूसरों के सहयोग से करना होता है। दूसरा केवल राह दिखा सकता है। चलने का अभ्यास हमें खुद करना पड़ता है। यह बात आम जीवन के साथ ही ऑप्शन ट्रेडिंग के गुर सीखने पर भी लागू होती है। इसके अलावा यह गुर सीखने की एक और बुनियादी शर्त है कि जोड़-घटाने, हिसाब-किताब में आपकी रुचि होनी चाहिए। अगर सामान्य गणित में आपकी दिलचस्पी नहीं है तो आपको शेयर बाज़ार में ऑप्शंस ट्रेडिंग के चक्कर में पड़ना ही नहीं चाहिए और खुद को केवल लंबे समय के निवेश तक सीमित रखना चाहिए।

आज हम ब्लैक-शोल्स मॉडल का फॉर्मूला इस्तेमाल करते हुए निफ्टी ऑप्शंस की इम्प्लायड वोलैटिलिटी की गणना करेंगे। यह गणना हम पहले डाउनलोड की गई एक्सेल शीट पर करेंगे। उदाहरण, निफ्टी में 9500 स्ट्राइक प्राइस वाले कॉल व पुट ऑप्शन। निफ्टी शुक्रवार को 9370.65 पर बंद हुआ था। एनएसई के आंकड़ों के मुताबिक 14 मई 2020 के एक्सपायरी वाले 9500 स्ट्राइक मूल्य के कॉल ऑप्शन का अंतिम भाव 51.35, निफ्टी की दैनिक वोलैटिलिटी 3.30%, सालाना वोलैटिलिटी 62.98% और इम्प्लायड वोलैटिलिटी 34.54%। वहीं, इसी स्ट्राइक मूल्य और एक्सपायरी वाले पुट ऑप्शन का भाव शुक्रवार को 322.40 रुपए रहा है, जबकि दैनिक व सालाना वोलैटिलिटी समान हैं और इम्पलायड वोलैटिलिटी 38.25% है। हम रिस्क-फ्री ब्याज की दर 6% लेकर चलेंगे।

अगर हम एक्सेल शीट पर डाउनलोड किए गए ब्लैक-शोल्स फॉर्मूल से गिनती करें और उसमें सालाना वोलैटिलिटी का एनएसई का आंकड़ा डालें तो कॉल ऑप्शन का भाव 247.48 रुपए और पुट ऑप्शन का भाव 367.47 रुपए निकलता है। वास्तव में ये भाव क्रमशः 51.35 रुपए और 322.40 रुपए रहे हैं। अब हम देखते हैं कि कितनी इम्प्लायड वोलैटिलिटी पर उक्त ऑप्शन के ये भाव निकलते हैं। वोलैटिलिटी के खाने में जब हम घटाते-घटाते 20.76% का आंकड़ा डालते हैं तो कॉल ऑप्शन का भाव 51.37 रुपए निकलता है, जबकि पुट ऑप्शन का भाव 171.36 रुपए रहा है। कॉल ऑप्शन का भाव बाज़ार के बराबर है। लेकिन हकीकत में इस पुट ऑप्शन का भाव 322.40 रुपए रहा है।

ब्लैक-शोल्स फॉर्मूले में पुट ऑप्शन का यह भाव वोलैटिलिटी का आंकड़ा 53.49 रखने पर निकल आता है। दूसरे शब्दों में इस फॉर्मूले से पुट ऑप्शन की इम्प्लायड वोलैटिलिटी 53.49% और कॉल ऑप्शन की इम्प्लायड वोलैटिलिटी 20.76% होनी चाहिए। लेकिन एनएसई ने इनकी इम्प्लायड वोलैटिलिटी के जो आंकड़े दिए हैं, वे इनसे मेल नहीं खाते। ऐसा क्यों है? इसकी तहकीकत हम आगे करेंगे। अभी तो बस वास्तविकता से ब्लैक-शोल्स फॉर्मूले की विसंगति को दिखाने के लिए हमने यह गणना की है।

अब हम आज की दूसरी गणना पर आते हैं। इसका ताल्लुक इससे है कि हमें कौन-से स्ट्राइक मूल्य का ऑप्शन खरीदना चाहिए। इसके लिए हम निफ्टी की दैनिक वोलैटिलिटी और नॉर्मल डिस्ट्रीब्यूशन का सहारा लेते हैं। चलिए, हम निकालते हैं कि 28 मई 2020 की एक्सपायरी वाले सौदे के लिए कौन-से स्ट्राइक मूल्य वाले कॉल व पुट ऑप्शन खरीदने या बेचने चाहिए।

निफ्टी की दैनिक वोलैटिलिटी = 3.30%

शुक्रवार, 8 मई 2020 को निफ्टी का बंद भाव = 9370.65

28 मई 2020 की एक्पायरी में बचे ट्रेडिंग दिन = 14

पिछले दो महीने में निफ्टी का औसत दैनिक रिटर्न = – 0.33%

अब हम देखते हैं कि निफ्टी एक्सपायरी में बचे 14 दिनों के दौरान किस रेंज में ट्रेड हो सकता है?

14 दिनों की वोलैटिलिटी या स्टैंडर्ड डेविएशन =  3.30% x 14 का वर्गमूल = 12.35%

14 दिनों का औसत रिटर्न = – 0.33% x 14 = -4.62%

इनके आंकड़ों के आधार पर निकालते हैं कि इन 14 दिनों में निफ्टी की ऊपरी व निचली रेंज क्या हो सकती है या दूसरे शब्दों में वह ऊपर में कहां तक और नीचे में कहां तक जा सकता है?

ऊपरी रेंज = 14 दिनों का औसत रिटर्न + 14 दिनों की वोलैटिलिटी या स्टैंडर्ड डेविएशन

= – 4.62 + 12.35 = 7.73%, यानी निफ्टी ऊपर में 10,095 तक जा सकता है।

निचली रेंज = 14 दिनों की वोलैटिलिटी या स्टैंडर्ड डेविएशन – 14 दिनों का औसत रिटर्न

= 12.35 – (-4.62) = 16.97%, यानी निफ्टी नीचे में 7780 तक गिर सकता है।

इस तरह हमारी गणना दिखाती है कि एक्सपायरी तक बचे 14 दिनों में निफ्टी 7780 से लेकर 10,095 तक की रेंज में ट्रेड हो सकता है। हम इसके बारे में कितना पक्का हो सकते हैं? नॉर्मल डिस्ट्रीब्यूशन का नियम कहता है कि निफ्टी के इस रेंज या एक स्टैंडर्ड डेविएशन में ट्रेड होने की प्रायिकता 68 प्रतिशत है, जबकि 32 प्रतिशत प्रायिकता इस बात की है कि निफ्टी ऊपर और नीचे में इस रेंज से बाहर चला जाए। यानी, निफ्टी में 7780 से 10,095 तक की रेंज के बाहर के स्ट्राइक प्राइस वाले ऑप्शन आउट ऑफ द मनी (ओटीएम) या बेकार जा सकते हैं।

इसलिए ऑप्शन बेचनेवाला या ऑप्शन राइटर 10,095 से ज्यादा स्ट्राइक प्राइस वाले कॉल ऑप्शन और 7780 से कम स्ट्राइक प्राइस वाले पुट ऑप्शन बेच सकता है। इन सौदों में ज्यादा उम्मीद इस बात है कि सारा का सारा प्रीमियम उसे मिल जाएगा।

दूसरी तरफ जिनकों ऑप्शन खरीदना है, उन्हें 10,095 से ज्यादा स्ट्राइक प्राइस वाले कॉल ऑप्शन और 7780 से कम स्ट्राइक प्राइस वाले पुट ऑप्शन खरीदने से बचना चाहिए। नहीं तो ज्यादा आशंका इस बात की है कि उनका प्रीमियम डूब जाएगा। व्यवहार में निफ्टी की उक्त रेंज 7800 से 10,100 की निकलती है क्योंकि स्ट्राइक प्राइस वास्तव में 50-50 के अंतर पर पेश किया जाता है।

ध्यान रखें कि ऊपर की गई सारी गणना सांकेतिक है और इनमें जो चल राशि डाली गई है, वह सटीक नहीं है। यह सारा हिसाब-किताब स्टैंडर्ड डेविएशन/वोलैटिलिटी और नॉर्मल डिस्ट्रीब्यूशन के व्यावहारिक रिश्ते को समझने के लिए किया गया है। इसलिए इस गणना के आधार पर बाज़ार में कोई ऑप्शन खरीदने या बेचने का फैसला लेना सही नहीं होगा।

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