पूर्ण-अपूर्ण
अपने-आप में तो हर कोई पूर्ण है। जानवर भी पूर्ण, इंसान भी पूर्ण। ओस की बूंद तक एकदम गोल। प्रकृति ने संतुलन का नियम ही ऐसा चला रखा है। पर बाहर से देखो तो सब कुछ अपूर्ण। गुमान तोड़कर देखने पर ही यह अपूर्णता नज़र आती है।और भीऔर भी
अपने-आप में तो हर कोई पूर्ण है। जानवर भी पूर्ण, इंसान भी पूर्ण। ओस की बूंद तक एकदम गोल। प्रकृति ने संतुलन का नियम ही ऐसा चला रखा है। पर बाहर से देखो तो सब कुछ अपूर्ण। गुमान तोड़कर देखने पर ही यह अपूर्णता नज़र आती है।और भीऔर भी
सत्ता की विश्वसनीयता हमेशा संदिग्ध होती है। इसलिए वह हर विरोधी आवाज़ को अविश्सनीय बनाने में जुटी रहती है। उसकी कोशिश रहती है कि हर व्यक्ति, हर संस्था को अविश्वसनीय बना दो ताकि लोग इसे आम मानकर हताश हो जाएं।और भीऔर भी
चीजें जो कल थीं, आज नहीं हैं। आज जैसी हैं, वैसी कल नहीं रहेंगी। परिवर्तन का यही नियम है। यही जीवन है। इसलिए कल से चिपके रहने या आज को लेकर रोते रहने का कोई मतलब नहीं। सबक लो, बढ़ते चलो। यही सही है और उचित भी।और भीऔर भी
बुरा वक्त और तूफान कभी इस बात का इंतज़ार नहीं करते कि आपने बचने की तैयारी कर ली है या नहीं। उन्हें कतई परवाह नहीं होती कि आप कितने सतर्क या चैतन्य हैं। वे तो बस अपनी मौज में आते हैं और सब समेटकर साथ लिये जाते हैं।और भीऔर भी
अगर शिक्षा ने हमें समस्याओं के व्यूह को भेदने की कला नहीं सिखाई, बेहतर कल का ख्वाब और उसे पाने का हुनर नहीं सिखाया तो वह हमारे किस काम की! अगर वो हमें व्यवस्था का दास ही बनाती है तो ऐसी शिक्षा हमें मंजूर नहीं।और भीऔर भी
यहां सब कुछ बदलता है हर पल। घूमता है, चलता नहीं। एक चक्र है जिसमें चीजें जहां से चली थीं, घूम-फिरकर वहीं कहीं आसपास आ जाती हैं। हां, समय चलता है निरंतर! लेकिन समय तो एक टेक्नोलॉजी है जिसे प्रकृति ने नहीं, हमने ईजाद किया है।और भीऔर भी
हर साल के बजट में सरकार कृषि ऋण का लक्ष्य बढ़ाती जा रही है और पिछले कई सालों से वास्तव में बांटा गया कृषि ऋण घोषित लक्ष्य से ज्यादा रहा है। इस साल के बजट में भी वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने चालू वित्त वर्ष 2012-13 के लिए कृषि ऋण का लक्ष्य बढ़ाकर 5.75 लाख करोड़ रुपए कर दिया है। बीते वित्त वर्ष 2011-12 में यह लक्ष्य 4.75 लाख करोड़ रुपए का था जिसमें से दिसंबर 2011औरऔर भी
देश का निर्यात वित्त वर्ष 2011-12 में भले ही 20.94 फीसदी बढ़कर 303.72 अरब डॉलर पर पहुंच गया हो। लेकिन साल के आखिरी महीने मार्च 2012 में निर्यात में साल 2009 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद पहली बार कमी दर्ज की गई है। मार्च में हमारा निर्यात 5.71 फीसदी घटकर 28.68 अरब डॉलर पर आ गया है। दूसरी तरफ मार्च में हमारा आयात 24.28 फीसदी बढ़कर 42.59 अरब डॉलर रहा है। इस तरह मार्च में हुआऔरऔर भी
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