सुप्रीम कोर्ट ने काफी हद तक सहारा समूह का पक्ष स्वीकार कर लिया है, जबकि उसके खिलाफ लड़ रहे पूंजी बाजार नियामक, सेबी और निवेशकों के समूह की शिकायत है कि अदालत ने उनका पक्ष सुना ही नहीं। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश अलतमस कबीर और जस्टिस एस एस निज्जर व जे चेलामेश्वर की बेंच ने फैसला सुनाया कि सहारा समूह की दो कंपनियों – सहारा इंडिया रीयल एस्टेट कॉरपोरेशन और सहारा हाउसिंग इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन,औरऔर भी

सेंसेक्स 19,000 के ऊपर और निफ्टी 5800 के पार। यही नहीं, बी ग्रुप के शेयर जिस तरह बढ़े हैं, उसे बाजार में रिटेल निवेशकों की वापसी का संकेत माना जा रहा है। ब्रोकर गदगद हैं। औरों को झांसा देकर अपनी जेब भरनेवाले धंधेबाज अब सड़क चलते लोगों को भी यकीन दिलाने में लग गए कि यही सही वक्त है शेयरों में पूंजी लगाने का। लेकिन आंख पर पट्टी बांधकर निवेश करनेवाला शेयर बाजार में हमेशा गच्चा खाताऔरऔर भी

हम आमतौर पर जिन कारों की सवारी करते हैं, उनमें लगनेवाले पेट्रोल या डीजल का महज 5% हमें ढोने में लगता है। 80% ईंधन तो खुद कार को ढोने में लग जाता है। बाकी 15% हिस्सा ईंधन को ऊर्जा में बदलने की प्रक्रिया के दौरान बरबाद चला जाता है। विकसित देशों में कार जरूरत की सवारी है, जबकि अपने यहां जरूरत से ज्यादा शान और दिखावे की। यह दिखावा हमारी ही नहीं, देश की जेब पर भीऔरऔर भी

।।विष्णु नागर।। जिसे आज हम ज्योतिष के रूप में जानते हैं उसका महत्व नहीं होता, अगर हर मनुष्य में अपना भविष्य जानने की एक दबी हुई इच्छा हमेशा से नहीं रही होती। हालांकि विज्ञान की सारी प्रगति के बावजूद आज भी किसी व्यक्ति का भविष्य जानना मुश्किल ही नहीं, असंभव है। यह इसलिए असंभव है कि व्यक्ति का भविष्य न तो पूरी तरह विज्ञान के नियम तय करते हैं, न पूरी तरह सामाजिक-राजनीतिक, आर्थिक स्थितियां और नऔरऔर भी