मान्यता है कि शेयर बाजार लंबे समय में फायदा ही देता है। लेकिन यह कोई निरपेक्ष सच नहीं है। इसकी सच्चाई का फैसला ‘कहां और कैसे’ से तय होता है। मसलन, जापान का निक्केई सूचकांक बीस साल पहले अक्टूबर 1992 में 16767 अंक पर था। अगस्त 1993 में 21,027 और जून 2006 में 22,757 तक चला गया। लेकिन फिर गिरने का सिलसिला शुरू हुआ तो अभी अक्टूबर 2012 में 8596 अंक पर आ चुका है। बीस सालऔरऔर भी

इस महीने की शुरुआत से इंडिया बुल्स समूह की लिस्टेड कंपनियों के शेयरों में बढ़त का रुख अब डीएलएफ की राह पकड़ सकता है क्योंकि भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के नेता अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को हुई प्रेस क्रांफेंस में सोनिया गांधी परिवार के भ्रष्टाचार के सिलसिले में इंडिया बुल्स का भी नाम ले लिया। उन्होंने तमाम टीवी चैनलों से यह बात जरूर टिकर के रूप में चलाने का आग्रह किया और कहा कि वे इस बारे मेंऔरऔर भी

लगता है कि सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वड्रा पूरी सरकार व कांग्रेस पार्टी के दामाद बन गए हैं। वड्रा और रीयल्टी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी डीएलएफ के बीच लेनदेन की जांच से इनकार करते हुए वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि जब तक साफ तौर पर भ्रष्टाचार के कोई आरोप सामने नहीं आते, तब तक सरकार निजी सौदों की जांच नहीं कर सकती। सोमवार को राजधानी दिल्ली में आर्थिक संपादकों के सम्मेलन का उद्घाटनऔरऔर भी

आम निवेशक ज़रा-सा मौका मिलते ही म्यूचुअल फंडों की इक्विटी स्कीमों से तौबा कर ले रहे हैं। अभी बीते सितंबर महीने में उन्होंने इन इक्विटी स्कीमों से 3306 करोड़ रुपए निकाले हैं। यह जानकारी म्यूचुअल फंडों के साझा मंच, एम्फी की तरफ से जारी ताजा आंकड़ों में दी गई। ये आंकड़े तैयार तो शुक्रवार, 5 अक्टूबर को ही कर लिए गए थे। लेकिन जारी इन्हें सोमवार को किया गया। किसी भी एक महीने में म्यूचुअल फंडों कीऔरऔर भी

शेयर बाजार में इस वक्त निवेशकों का नहीं, ट्रेडरों का बोलबाला है। 3 अक्टूबर को बाजार खुलने से पहले हमने ज्यादा कुछ न बताकर इतना कहा था कि नेस्को बहुत ही मजबूत और संभावनामय कंपनी है। इसमें बढ़त का रुझान भी है। बस क्या था? संकेत मिला नहीं कि ट्रेडरों की मौज हो गई। रण बीच चौकड़ी भरने लगे। एकदम चेतक की तरह, जिसके बारे में कविता है कि राणा की पुतली फिरी नहीं, तब तक चेतकऔरऔर भी