मन को संभालें, संभल जाएगी ट्रेडिंग
ट्रेडिंग कोई टेक्नीक नहीं, संस्कार है। यह एक दिन का कोई चमत्कार नहीं। इसके लिए मन को रत्ती-रत्ती मांजकर तैयार करना होता है, संस्कारित करना पड़ता है। कारण, अभी हमारी जो मानसिकता है, जो भी बुनावट हमें अपने संस्कारों से मिली है, वहां अहंकार है। अपने को तुर्रमखां समझने का गुरूर है। हम गलत हो ही नहीं सकते, ऐसी सोच है। और, यह सोच बाज़ार में हमें डुबाने के लिए पर्याप्त है। जो भी लोग हांकते हैंऔरऔर भी
ऑपरटरों को दूर से ही कीजिए सलाम
तीसरी कसम फिल्म आपने देखी होगी या रेणु की यह कहानी शायद पढ़ी हो। इसमें सीधा-साधा नायक दुनिया के जंजाल से बचने के लिए तीन बार कसम खाता है। एक ऐसी ही कसम हम सभी को खानी होगी कि शेयर बाज़ार के ऑपरेटरों की बात पर कभी भी यकीन नहीं करेंगे। वे हमेशा अपने फायदे की सोचते हैं। शातिर ठग होते हैं। इसलिए उन्हें दूर से ही सलाम। खुले दिमाग से अब रुख करते हैं बाज़ार का…औरऔर भी
खेल है नंबरों का, न साइंस, न आर्ट
कुछ नहीं, बहुत-से लोग कहते हैं कि शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग साइंस के साथ-साथ आर्ट भी है। कला जो अंदर से आती है। लेकिन हकीकत में ऐसा कुछ भी नहीं। ट्रेडिंग शुद्ध रूप से नंबरों का खेल है। किसी भाव पर लेनेवाले कितने हैं और बेचनेवाले कितने, इसी से तय होगा कि भाव आगे कहां जाएगा। चार्ट पर हमें चित्र-विचित्र आकृतियां नहीं, बल्कि खरीदने और बेचनेवालों का सही संतुलन दिखना चाहिए। शुरू करते हैं आज का अभ्यास…औरऔर भी
जादू की छड़ी कोई नहीं, मंत्र अनेक
किसी भी आम ट्रेडर से पूछ लीजिए। वो आपको आराम से पंद्रह संकेतक गिना देगा जो बताते हैं कि किसी स्टॉक का भावी रुझान क्या है और उसे किस भाव पर कितने स्टॉप लॉस के साथ खरीदना/बेचना चाहिए? लेकिन यकीन मानिए, इनमें से कोई जादुई संकेतक नहीं है जो एकदम सटीक भविष्यवाणी कर सके। अपने-आप में हर संकेतक अधूरा है। उसे दो-तीन के साथ मिलाने पर ही तस्वीर थोड़ी साफ होती है। देखते हैं आज की तस्वीर…औरऔर भी
बाज़ार से जिद का मतलब है पिटना
आगे क्या होगा, कोई नहीं जानता। अनिश्चितता पक्की है। इंसान अपने पूरे इतिहास में इसे ही मिटाने की कोशिश करता रहा है। ट्रेडिंग भी अनिश्चितता में संभावनाओं को पकड़ने की कोशिश है। कभी-कभी बड़े संकेतक भी धोखा दे जाते हैं। इसका मतलब कि सतह के नीचे कोई बड़ी चीज चल रही है। ऐसी सूरत में ट्रेडर को रुककर खटाक से पलट जाना चाहिए। बाज़ार से जिद करने का मतलब पिटना है। अब आज की अनिश्चितता में छलांग…औरऔर भी





