हमें वही रिस्क उठाना चाहिए जिसे पहले से नापा जा सके, बजाय इसके कि रिस्क उठाने के बाद नापा जाए कि उससे कितनी चपत लग सकती है। किसी सौदे में कितना नफा-नुकसान हो सकता है, इससे बेहतर है यह समझना कि कितना घाटा उठाकर हम कितना फायदा कमा सकते हैं। इसी तरह सफलता का रहस्य मुनाफा कमाने की जुगत में लगे रहने के बजाय घाटे से बचने में है। इन सूत्रों पर कीजिए मनन। बढ़ते हैं आगे…औरऔर भी

यह बात कतई समझ में नहीं आती कि हमारे यहां केवल रिटेल निवेशकों को ही इंट्रा-डे ट्रेडिंग की इजाज़त है जबकि संस्थागत निवेशकों को इसकी मनाही है। आखिर क्यों आम निवेशकों के हितों की हिफाज़त के लिए बनी सेबी ने शेयर बाज़ार की सबसे जोखिम भरी गुफा को मासूम निवेशकों के लिए खोल रखा है और शातिर संस्थाओं को बचा रखा है? यह निवेशकों की कैसी अग्निपरीक्षा है आखिर? इस आग से बचते हुए बढ़ते हैं आगे…औरऔर भी

हम सभी मूलतः रिटेल ट्रेडर ही तो हैं। लेकिन जब तक हम इस स्थिति से निकल प्रोफेशनल ट्रेडर का अंदाज़ नहीं अपनाते, तब तक पिटने को अभिशप्त हैं। लगातार घाटे से बचने के लिए हमें अपनी सोच को बदलना होगा। होता यह है कि जब प्रोफेशनल ट्रेडर या संस्थागत निवेशक खरीदते हैं, तब रिटेल निवेशक बेचते हैं। वहीं प्रोफेशनल ट्रेडर जब बेचते हैं, तब रिटेल निवेशक खरीदते हैं। इन मानसिकता को तोड़ने के लिए करते हैं अभ्यास…औरऔर भी

हर दिन राजनीति में नया बवाल। कतई साफ नहीं कि 2014 में देश में किसकी सरकार बनेगी। बहुतेरे निवेशक भविष्य की इस अनिश्चितता को लेकर परेशान हैं। पर सच यह है कि आखिरकार काम-धंधा और व्यापार ही राजनीति पर हावी पड़ते हैं। अगर भरोसा हो कि भारतीय अर्थव्यवस्था को अभी बहुत आगे जाना है तो निवेश के आकर्षक मौके मौजूद हैं। आज एक ऐसा ही मिड कैप स्टॉक पेश है जो आपका धन दोगुना कर सकता है…औरऔर भी