टेक्निकल एनालिसिस या चार्टिंग का मूल मकसद है किसी खास समय तक खरीदने और बेचने वालों के बीच का संतुलन देखकर बाज़ार पर हावी भावना को समझना। लेकिन यह थोड़े वक्त, बहुत हुआ तो महीने या दो महीने के लिए फिट बैठता है। लंबे समय में कंपनी व अर्थव्यवस्था के फंडामेंटल्स ही शेयरों के भाव तय करते हैं। इसलिए साल दो साल के निवेश पर टेक्निकल का फंदा नही कसना चाहिए। अब देखते हैं गुरु का बाज़ार…औरऔर भी

आम लोग शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग तो छोड़िए, निवेश तक को नमस्कार बोल चुके हैं। गुजरे छह सालों में उनकी संख्या लगातार घटी है। बाकी जो लोग किसी-न-किसी ब्रोकर-हाउस से जुड़कर ट्रेड करते हैं, वे बराबर किसी अचूक मंत्र की तलाश में भटकते हैं क्योंकि अपना मंत्र उन्हें ऐसा एक कदम आगे, दो कदम पीछे चलाता है कि केवल दूसरों को सलाह देने लायक बच जाते हैं। धन-प्रबंधन का मंत्र उनसे सधता नहीं। अब दृष्टि बुधवार की…औरऔर भी

न तो दुनिया और न ही शेयर बाज़ार हमारी सदिच्छा से चलता है। लेकिन हम अपनी इच्छाएं थोपने से बाज नहीं आते। सोच लिया कि फलानां शेयर बढेगा तो दूसरों से इसकी पुष्टि चाहते हैं। वही टेक्निकल इंडीकेटर पकड़ते हैं जो हमारी धारणा को सही ठहराते हों। कोई इंडीकेटर उल्टा संकेत देता है तो हम उसे नज़रअंदाज़ कर देते हैं। ध्यान दें, भाव इंडीकेटर के पीछे नहीं, इंडीकेटर भाव के पीछे चलते हैं। अब वार मंगलवार का…औरऔर भी

नतीजों का दौर अपने उफान पर है। जैसे ही दिसंबर तिमाही का नतीजा आता है, कंपनी के शेयरो में हलचल मच जाती है। उम्मीद के मुताबिक रहे तो बिकवाली चलती है और खराब रहे तो ज्यादा ही निराशा छा जाती है। टीसीएस की बिक्री 33% बढ गई। लेकिन विश्लेषकों की अपेक्षा से कम थी तो उसके शेयर खटाक से 5.6% गिर गए। बीस महीनों में टीसीएस की सबसे तीखी गिरावट। ऐसी गहमागहनी के बीच बढ़ते हैं आगे…औरऔर भी

अच्छी चीज़ों के पीछे दुनिया भागती है। बस, पता नहीं होता कि अच्छी चीजें हैं कौन-सी। पता भी होता है तो भरोसा नहीं होता कि क्या वो चीज़ वाकई अच्छी है। एक छोटी-सी आईटी कंपनी है। टेलिकॉम व हेल्थकेयर उद्योग को सॉफ्टवेयर बेचती है। आपको यकीन नहीं आएगा कि बुधवार को उसके बारे में सुगबुगाहट शुरू हुई और अगले दो दिनों में ही उसका शेयर 22.82% बढ़ चुका है। तथास्तु में इसी कंपनी को पकड़ने की सलाह…औरऔर भी