बाज़ार में गिरावट का आलम हो तो अच्छी कंपनियों के शेयर भी गिर जाते हैं, लेकिन उनका अंतर्निहित मूल्य नहीं गिरता। सो, बुद्धिमान निवेशक गिरावट के ऐसे मौकों की बेसब्री से बाट जोहते हैं क्योंकि तब उन्हें अच्छी कंपनियों के शेयर सस्ते में खरीदने का मौका मिल जाता है। वैसे भी समय के साथ अपने उत्पाद व सेवाओं को अपग्रेड करती कंपनियां निवेश के लिए हमेशा माकूल रहती हैं। तथास्तु में आज एक ऐसी ही मजबूत कंपनी…औरऔर भी

निफ्टी कल गिरता-गिरता शाम तीन बजे के ठीक बाद 2.41% नीचे में 8325.35 तक चला गया और अंत में वहां से ज़रा-सा उठकर 2.21% की गिरावट के साथ 8342.15 पर बंद हुआ। वैसे, निफ्टी के पिछले पैटर्न को देखकर हमने सोमवार को सुबह ही कह दिया था: निफ्टी को थोड़ा समर्थन 8550 के आसपास मिल सकता है, लेकिन वहां से गिरने पर निफ्टी 8300 के आसपास जाकर ही ठहर सकता है। अब करते हैं शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

ज्यादा रिटर्न का लालच किसे नहीं खींचता! लेकिन हमें याद नहीं रहता कि रिटर्न के साथ रिस्क का आनुपातिक रिश्ता होता है। रिटर्न ज्यादा तो रिस्क ज्यादा। रिस्क कम तो रिटर्न कम। इसे बावजूद हर कोई न्यूनतम रिस्क में अधिकतम रिटर्न कमाना चाहता है। हम इसी काम में आपकी मदद करने की कोशिश करते हैं। फिर भी हर सौदे से पहले आपको सोच लेना चाहिए कि उसमें आप कितना गंवाने को तैयार हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

हमारी औकात नहीं कि किसी शेयर का भाव उठा-गिरा सकें। हमारे 10-20 हज़ार या दो-चार लाख डालने से कोई फर्क नहीं पड़ता। दरअसल, बाजार में भाव वे दिग्गज तय करते हैं जो एक सौदे में आराम से पांच-दस करोड़ डाल देते हैं। उनका सौदा चार्ट पर बड़ी कैंडल के रूप में दिख जाता है। निश्चित बिंदु पर उनकी दिशा पकड़कर हम भी बाज़ार से कमा सकते हैं। यही मोटा-सा नियम है। अब आजमाते हैं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

ट्रेडिंग प्रायिकता या संभावना का खेल है। कंपनी का प्रवर्तक तक डंके की चोट पर नहीं कह सकता कि उसका शेयर कहां से कहां तक जाएगा। कुछ दिन पहले किसी सज्जन का ई-मेल आया कि आपकी सलाह अगर 70% भी निशाने पर लगती है तो वे यह सेवा सब्सक्राइब कर लेंगे। मेरा विनम्र निवेदन है कि सर्वश्रेष्ठ सेवा का भी स्ट्राइक रेट 60-65% से ज्यादा नहीं होता। हमें यह सच स्वीकार करना पड़ेगा। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी