तनाव से मुक्ति ट्रेडिंग के लिए ज़रूरी
न तो दूसरे पर आंख मूंदकर भरोसा, न अपने पर अतिविश्वास। इन दोनों में संतुलन बनाकर ही हम बाज़ार की वास्तविक स्थिति को अभीष्टतम स्तर तक समझ सकते हैं। इस समझ तक पहुंचने की आवश्यक शर्त यह है कि हम खुद तनावमुक्त रहे क्योंकि क्योंकि तनाव में रहने पर हम छोटे से आवेग पर भी अपना संतुलन खो सकते हैं और गलत फैसले ले सकते हैं जिसके गलत होने की आशंका ज्यादा है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी
कंपनी जम जाए तभी कोई बात है
खेती-किसानी का ज़माना लद गया। अब उद्योग-धंधे का ज़माना है। कृषि में भी बढ़ना है तो उसे घर की नहीं, उद्योग व समाज की खपत से जोड़ना पड़ेगा। खेती में परिवार की जायदाद अमूमन परिवार को ही मिलती थी। वहीं उद्योग में, खासकर लिस्टेड कंपनियों का स्वामित्व खुला है। कंपनी जम जाए तो कोई भी उसके मालिकाने में ‘शेयर’ खरीद सकता है। तथास्तु में हम ऐसी ही कंपनियां छांटने में मदद करते हैं। अब आज की कंपनी…औरऔर भी
ट्रेडिंग में चले अपने सिस्टम का ज़ोर
दरअसल टिप्स का रगड़ा है ही ऐसा। जो लोग केवल टिप्स के दम पर ट्रेडिंग करना और कमाना चाहते हैं, उन्हें ट्रेडिंग का इरादा छोड़ ही देना चाहिए। हर टिप्स देनेवाला आपकी लालच पर धंधा करता है। आपका धन खींचना उसकी प्राथमिकता है, न कि आपको धन दिलाना। ट्रेडिंग में सफलता के लिए आपको अपना सिस्टम विकसित करना होगा। उसमें दूसरा मदद भर कर सकता है, नया इनपुट दे सकता है। अब करते हैं शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी
मुफ्त टिप्स की मार होती बड़ी तगड़ी
बहुतेरे लोग ब्रोकरों या बिजनेस चैनलों की ‘मुफ्त’ टिप्स पर भरोसा करते हैं। भूल जाते हैं कि आज के ज़माने में जो चीज़ मुफ्त होती है, उसमें असली माल या उत्पाद आप होते हैं जिसकी संख्या-शक्ति को बेचा जाता है। कुछ लोग तथाकथित विशेषज्ञों की टिप्स के लिए 20-25 हज़ार तक फीस देते हैं। थोड़ा सही, ज्यादा गलत के चक्कर में वहां भी आखिरकार पूंजी डूब जाती है। फिर जाएं तो कहां जाएं? अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी






