कुल पूंजी दस लाख रुपए है तो 50,000 रुपए ही ट्रेडिंग में लगाएं। अगर जोखिम उठाने की क्षमता ज्यादा हो तो पूंजी का 5% से ज्यादा हिस्सा भी लगा सकते हैं। रिस्क संभालने का दूसरा चरण है: किसी भी ट्रेड में ट्रेडिंग पूंजी का 1% से ज्यादा हिस्सा दांव पर कतई न लगाएं। सीखने की शुरुआत में इसे 0.5% तक रखना ज्यादा मुनासिब होगा। मसलन, 50,000 रुपए में से 500 या 250 रुपए। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

ट्रेडिंग में कामयाबी के लिए स्टॉक का चयन महत्वपूर्ण है। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण है रिस्क का प्रबंधन। इसके दो मौलिक सिद्धांत हैं। पहला, किसी भी ट्रेड में अपनी पूंजी के एक निश्चित हिस्से से ज्यादा न लगाएं। दूसरा, किसी ट्रेड में उठाया जानेवाला रिस्क सारी पूंजी की तुलना में बहुत कम हो। इसको अपनाने के चार चरण हैं। पहला चरण है शेयरों में निर्धारित निवेश का 5% से ज्यादा ट्रेडिंग में न लगाएं। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

ट्रेडिंग में जो भी ब्रोकर या संस्थाएं असल में कमाते हैं, वे कभी टिप्स का सहारा नहीं लेते; बल्कि उनकी कमाई को कामयाब बनाने के लिए हमारे-आप के बीच टिप्स का जाल फेंका जाता है क्योंकि उनके सौदों को पूरा करने के लिए सामने आ जाएं। यकीनन, वे भी भविष्य की अनिश्चितता झेलते हैं और उसके जोखिम को संभालकर ही कमा पाते हैं। इस हफ्ते हम जोखिम संभालने की रणनीतियां समझेंगे। अब देखते हैं सोम का व्योम…औरऔर भी

पैसे से पैसा वही बनाते हैं जो दूसरों के इस लालच का फायदा उठाते हैं। वरना, पैसे से पैसा कभी नहीं बनता। शेयर बाज़ार में निवेश उन्हीं के लिए हैं जो इतना कमाते हैं कि ज़रूरी बचत के बाद भी इतना धन बच जाता है जिसकी उन्हें तत्काल ज़रूरत नहीं होती। वो धन वे मजबूत कंपनियों में लगाते हैं जिनका धंधा बढ़ने पर उनका निवेश फलता-फूलता है। यही मूल सिद्धांत है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी