बाज़ार और गिरता तो अच्छा होता
इस साल 29 फरवरी को निफ्टी 6826 पर था। बढ़कर 7 जून को 8295 तक जा पहुंचा। 1469 अंक ऊपर। बीते हफ्ते दो बड़ी घटनाओं में यह इसका आधा, 735 अंक गिरकर 7560 पर आ गया होता तो अच्छी बात होती। लेकिन राजन के मामले पर वो गिरा ही नहीं; ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से निकलने पर 181.85 अंक ही गिरा। और गिरता तो अच्छे शेयर सस्ते हो गए होते! अब तथास्तु में आज की संभावनामय कंपनी…औरऔर भी
खबरें करें धमाल, पर ट्रेडिंग कभी नहीं
खबरों पर शेयर बाज़ार में उथल-पुथल मचती है और ज्यादा बड़ी खबरों पर ज्यादा ही बवाल मचता है। मसलन, 17 मई 2004 को वाजपेयी सरकार की हार पर बाज़ार एक दिन में 11.1% टूट गया था, जबकि 17 मई 2009 को यूपीए सरकार की जीत पर 17.3% चढ़ गया था। इस हफ्ते सोमवार को राजन के झटके पर कुछ ऐसा ही अंदेशा था। अचंभा! कुछ हुआ नहीं। झटका ब्रिटेन की संघ-निकासी पर! करते हैं शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी
ब्रिटेन की हां तो सही, नहीं तो हंगामा
जिस जनमत-संग्रह पर दुनिया भर का ध्यान लगा है, वो आज लंदन के समय से सुबह 7 बजे (भारतीय समय 11.30 बजे) से शुरू होकर रात 10 बजे तक चलेगा। लेकिन कल शुक्रवार को अपना बाज़ार खुलने के लगभग ढाई घंटे बाद ही पता चलेगा कि ब्रिटेन की जनता ने यूरोपीय संघ के साथ 43 साल से चला आ रहा रिश्ता निभाने का फैसला किया है या तोड़ने का। कयासबाज़ी का फायदा नहीं। देखें गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी
सरकार ने मैनेज कर लिया बाज़ार को
बाज़ार में डर और लालच की दो अतियां चलती हैं और ये एक-दूसरे को बेअसर भी करती हैं। राजन के जाने से लगा झटका सरकार ने इन्हीं दो भावनाओं के दम पर संभाला है। सोमवार को घरेलू संस्थाओं, ब्रोकरेज हाउसों व कंपनी मालिकों ने मोर्चा संभाला तो मंगलवार को विदेशी संस्थाओं ने एफडीआई के नियमों में ढील से खरीद बढ़ा दी। पूंजी की कोई नैतिकता नहीं होती, मुनाफा ही उसकी एकमात्र प्रेरणा है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी






