ट्रेडिंग में फैसले का ज़िम्मा है अपना
अगर आप ट्रेडिंग के लिए स्टॉक चुनने और उसमें ट्रेडिंग क्यों करनी है, इसका फैसला खुद करने का ज़िम्मा उठाने को तैयार नहीं हैं तो आप हज़ार से लेकर लाख रुपए तक की कोई सेवा ले लें, आप बाज़ार से नियमित कमाई नहीं कर सकते। शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से कमाई करना शेर के जबड़े से शिकार निकालने जैसा मुश्किल काम है। इसे आसान समझना अपने पैर में कुल्हाड़ी मारने जैसा काम होगा। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी
सेंसेक्स से ज्यादा रिटर्न बाज़ार में
बीते वित्त वर्ष 2017-18 में बीएसई में लिस्ट कंपनियों का बाज़ार पूंजीकरण 20.7 लाख करोड़ रुपए बढ़ गया। इस तरह निवेशकों की दौलत 17.03% बढ़ी है। वो भी तब, जब बाज़ार दो महीने पहले हासिल शीर्ष शिखर से नीचे आ चुका है। वहीं, सेंसेक्स पूरे वित्त वर्ष में 11.3% बढ़ा है, जबकि 29 जनवरी के शिखर तक इसकी बढ़त 22.5% थी। उसके बाद वह 9.5% नीचे आया है। अब तथास्तु में नए वित्त वर्ष की पहली कंपनी…औरऔर भी
खूब खरीदेंगे बड़े तभी तो बढ़ेगा भाव
कोई गिरा हुआ शेयर हमारे जैसे हज़ारों लोग भी खरीद लें तो वह गीली फुलझड़ी की तरह ज़रा-सा जलकर फिर बुझ जाएगा क्योंकि निकलने की ताक में लगे पिछले खरीदार भाव बढ़ने पर बेचने लग जाएंगे। शेयर तभी बराबर बढ़ता है जब उसमें बैंकों, म्यूचुअल फंडों व बीमा कंपनियों जैसी संस्थाओं और प्रोफेशनल ट्रेडरों की खरीद आने लगती है। परखें कि बेचने को बचे हैं कितने बेताब और संस्थाएं खरीद शुरू करेंगी क्या! अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी








