बैंक, बीमा कंपनियां और प्रोफेशनल ट्रेडर एक साथ बाज़ार में हर तरफ हाथ-पैर नहीं मारते। वे गहराई से परखते हैं कि कौन-से सेक्टर में अभी तेज़ी की लहर चल रही है या चलनेवाली है। वे भारतीय मुद्रा से लेकर मुद्रास्फीति जैसे तमाम पहलुओं पर नज़र रखते हैं और उसका फायदा उठाते हैं। मसलन, रुपया डॉलर के सापेक्ष कमज़ोर हो रहा हो तो उन्हें आईटी या फार्मा जैसे निर्यात से कमानेवाले सेक्टर सुहाते हैं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

बाज़ार के गुरुघंटाल एक बार पकड़ लें तो आखिरी बूंद तक निचोड़ लेते हैं। इसलिए उनके चक्कर में पड़ना ही नहीं चाहिए। असल में सारी विद्या आपके सामने खुली है। कमियों के बावजूद हमारा शेयर बाज़ार इतना पारदर्शी है कि नज़र व समझ हो तो सब कुछ खुद जान-समझ सकते हैं। मोटी-सी बात यह है कि आपको किसी विशेषज्ञ की सलाह नहीं, बल्कि संस्थाओं की चाल को समझने की पुरज़ोर कोशिश करनी चाहिए। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

ट्रेडिंग भयंकर मायाजाल है। लगता है कि बहुत सारे शेयर एक ही दिन में 4-5% बढ़ जाते हैं तो हम क्यों नहीं कमा सकते। काश, कोई पहले से हमें इनके बारे में बता देता! यहीं पर हम घात लगाए बैठे बहुतेरे गुरुओं व सलाहकारों का शिकार बन जाते हैं। हफ्ते-दस दिन की मुफ्त की सेवा। उसके बाद खुदा-न-खास्ता फंसे तो हज़ारों की फीस। फिर ट्रेडिंग का विकट चक्रव्यूह हमें निचोड़कर फेंक देता है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

इंसान की तरह कंपनियों के भी जीवन में एक दौर बनने और जमने का होता है। इस दौरान उसे बहुत सारे उतार-चढ़ाव देखने पड़ते हैं। लेकिन इस दौर की समाप्ति के बाद जीवन एक ढर्रा पकड़ लेता है और बेरोकटोक आगे बढ़ता जाता है। जहां इंसान के जीवन का अंत निश्चित है, वहीं कंपनियों का जीवन अनंत है। अनिश्चितता हालांकि कभी खत्म नहीं होती। आज तथास्तु में बनने से लेकर जमने के दौर तक पहुंची एक कंपनी…औरऔर भी