अर्थकाम ने अपनी शुरुआत ही बीएसई में लिस्टेड एक इक्विटी रिसर्च कंपनी के साथ गठजोड़ से की थी ताकि पाठकों को शेयर बाज़ार की रिसर्च आधारित सूचनाएं दी जा सकें। हम पूरी शिद्दत से उससे मिली सूचनाएं और सिफारिशों को पेश करते रहे। लेकिन दो साल बीतने से पहले ही साफ हो गया कि उक्त कंपनी कहीं से भी निष्पक्ष नहीं है और ऑपरेटरों के साथ मिलकर रिटेल निवेशकों को चरका पढ़ाती है। अब मंगल की दृष्टि…और भीऔर भी

वित्तीय बाज़ार के दूसरे क्षेत्रों की बात मैं नहीं जानता। पर दस साल के अपने अनुभव से भलीभांति जान गया हूं कि अपने शेयर बाज़ार में हर तरफ ठगों की भरमार है। ब्रोकरेज़ फर्मों से लेकर रिसर्च कंपनियां तक रिटेल निवेशकों को झांसा देने का काम करती हैं। करोड़ों की पूंजीवाले ग्राहकों से इनसे रिश्ते अलग रहते होंगे। लेकिन 20-25 लाख तक की पूंजीवाले सामान्य निवेशकों को चरका पढ़ाना इनके डीएनए में है। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

बचपन, जवानी, बुढ़ापा और मौत। जीवन के इस चक्र में इंसान सबसे ज्यादा मूल्यवान अपनी जवानी में होता है। तमाम कंपनियां भी ऐसे ही चक्र से गुजरती हैं। लेकिन कुछ कंपनियां वक्त की नब्ज़ और ज़रूरत से ऐसी जुड़ती हैं कि बहुत लंबा जीवन जीती हैं। सालों-साल बाद भी वे एकदम जवान रहती हैं। ऐसी कंपनियों को अगर हम वक्त रहते पकड़ लें तो हमारी बचत को पंख लग जाते हैं। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

बुद्ध ने करीब ढाई हजार साल पहले विपश्यना की पुरानी पद्धति खोज निकाली थी। इसमें शरीर में पल-पल होती संवेदनाओं को देखते-देखते आप मन के विकारों, खासकर राग व द्वेष से मुक्त होने लगते हो। इसी तरह आप शेयर बाज़ार में पल-पल के भावों को निष्पक्ष भाव से देखने लगें तो लालच व भय की भावना से ऊपर उठकर उनकी सच्चाई से वाकिफ हो जाएंगे और ट्रेडिंग से कमाई का सूत्र पा जाएंगे। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

हमारे शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग भले ही सुबह 9.15 से शाम 3.30 बजे तक होती है। लेकिन ग्लोबल हो चुकी दुनिया में सारे वित्तीय बाज़ार एक-दूसरे से जुड़ चुके हैं और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की हलचलों से प्रभावित होते हैं। एशिया के तमाम बाज़ार हमसे पहले खुलते हैं। उसके बाद यूरोप में ट्रेडिंग शुरू होती है। फिर अमेरिका का बाज़ार सक्रिय हो जाता है। वित्तीय बाज़ार की धड़कन छुट्टियों के अलावा कभी नहीं रुकती। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी